हाईकोर्ट का आदेश, पाक्सो एक्ट के साथ कोई अन्य अपराध भी दर्ज तो पाक्सो कोर्ट में ही होगी सुनवाई

शासन ने उसका अभियोग पत्र स्पेशल जज एससीएसटी एक्ट की अदालत में पेश किया। लेकिन सवाल यह उठा कि पाक्सो एक्ट का मामला साथ कैसे चलेगा, क्योकि पाक्सो एक्ट की धारा 28 (2) में प्रावधान है कि साथ में दर्ज अन्य मामला भी उक्त कोर्ट में चल सकता है, जबकि एट्रोसिटी एक्ट में यह प्रावधान नहीं है।

By: Karunakant Chaubey

Published: 18 Dec 2020, 11:21 PM IST

बिलासपुर. हाईकोर्ट ने एक मामले में कहा है कि पाक्सो के साथ ही किसी अन्य विशेष एक्ट में भी प्रकरण दर्ज हो तो दोनों मामलों की पाक्सो कोर्ट में ही सुनवाई होगी। कोरबा निवासी रामस्वरूप राजवाड़े के खिलाफ अनुसूचित जाति जनजाति अधिनियम 1989 और पाक्सो एक्ट 2012 के अंतर्गत अपराध दर्ज किया गया था।

शासन ने उसका अभियोग पत्र स्पेशल जज एससीएसटी एक्ट की अदालत में पेश किया। लेकिन सवाल यह उठा कि पाक्सो एक्ट का मामला साथ कैसे चलेगा, क्योकि पाक्सो एक्ट की धारा 28 (2) में प्रावधान है कि साथ में दर्ज अन्य मामला भी उक्त कोर्ट में चल सकता है, जबकि एट्रोसिटी एक्ट में यह प्रावधान नहीं है।

राजवाडे ने अधिवक्ता अदिति सिंघवी के जरिये हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दोनों मामले एक ही कोर्ट में साथ चलाने की मांग की। कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायमित्र अनुराग दयाल ने भी अभिमत दिया कि पाक्सो अधिनियम में यह प्रावधान है कि एक ही अपराध के लिए अन्य एक्ट में भी मामला दर्ज किया गया है तो पाक्सो स्पेशल जज ही इसकी सुनवाई करेगा।

बहस के बाद जस्टिस संजय के अग्रवाल ने इसी प्रावधान के अंतर्गत निर्णय देते हुए एससीएसटी एक्ट स्पेशल जज के यहां चल रहे मामले को पाक्सो स्पेशल कोर्ट में ट्रांसफर करने का आदेश दिया।

Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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