जन एजेंडा 2019: पत्रिका के ख़ास चर्चा में सामने आए ये मुद्दे, जो पार्टी जीतना चाहती है इन पर करें अमल !

हर पार्टी बनाती हैं नीतियां, उन नीतियों को सहीं तरीके से अमल करने की ज़रूरत

By: Amil Shrivas

Published: 04 Apr 2019, 09:42 PM IST

Bilaspur, Bilaspur, Chhattisgarh, India

बिलासपुर। लोक सभा चुनाव को लेकर गुरुवार शाम पत्रिका कार्यालय में ख़ास चर्चा का आयोजन किया गया जिसमें शहर कांग्रेस, शहर भाजपा, शहर के युवा एवं चेंजमेकर्स शामिल हुए। चर्चा में सभी ने लोकसभा चुनाव को लेकर अपने सुझाव सामने रखे और लोक सभा के मुद्दों पर चर्चा किया गया। कांग्रेस के लोगों ने जहाँ अपनी 60 साल की उपलब्धियां गिनाई वहीँ भाजपा ने मोदी सरकार के कार्यकाल में हुए बड़े निर्णयों और जनहित योजनाओं का बखान किया। लोक सभा का प्रथम चरण के चुनाव कुछ ही दिनों में होंगे ऐसे में कुछ दिनों पहले ही कांग्रेस ने अपना घोषणा पत्र जारी किया जिसके बाद चुनावी गलियारों में खलबली मच गई। इसमें मुख्य बिंदुओं में गरीब परिवार को 72000 सालाना सीधे उनके बैंक खाते में जमा करने की योजना और देशद्रोही की धारा ख़तम करने की बातें शामिल हैं जिसके कारण कांग्रेस का चुनावी घोषणा पत्र जनता के लिए चर्चा का और प्रतिद्वंदी पार्टियों के लिए उपहास का विषय बना हुआ है।

वहीँ दूसरी ओर भाजपा अपनी पार्टी का प्रचार इस प्रकार कर रही जैसे उनका हर एक सांसद प्रत्याशी खुद नरेंद्र मोदी हो। देश के पीएम ने कांग्रेस के घोषणा पत्र को ढकोसला पत्र करार देते हुए कहा की कांग्रेस की ये सारी नीतियां सिर्फ 24 तारीख तक के लिए है। भाजपाई लोक सभा के लिए अभी भी राष्ट्रवाद के मुद्दे पर अडिग है। सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मुद्दों का राजनीतिकरण करने में व्यस्त हैं। हाल ही में हुए छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त से भाजपा तिलिमला उठी है। पत्रिका के साथ ख़ास कार्यक्रम "जन एजेंडा" में शहर कांग्रेस से मणि वैष्णव, ऋषि पांडेय, मोहम्मद जस्सास, मोहम्मद वसीम भाजपा से महेश चंद्रिकापुरे, मोहम्मद हकीकत, आदित्य तिवारी, शुभम शेण्डे, सपन निगम एवं शहर के युवा वोटर्स अभिनव तिवारी और मयंक सोनी उपस्थित रहे। पत्रिका द्वारा लोक सभा चुनाव को लेकर शुक्रवार शाम 6 बजे 'पत्रिका एजेंडा' कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा जिसे आप पत्रिका बिलासपुर के फेसबुक पेज पर जाकर लाइव देख सकते हैं।

पत्रिका के साथ चर्चा में सामने आए ये मुद्दे ---

मुद्दा 1 : आतंकवाद
राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा करने पर देश में आतंकवाद का मुद्दा सामने आया जो की लोक सभा के लिए बड़ा मुद्दा है। लोगों ने इस मुद्दे पर पीएम मोदी का समर्थन किया किया और कहा वह एकमात्र ऐसे पीएम हैं जिन्होंने आतंकवाद का कड़ा जवाब दिया है।

मुद्दा 2 : चकरभाठा एयरपोर्ट
बिलासपुर लोक सभा क्षेत्र के लिए चकरभाठा एयरपोर्ट सबसे बड़ा मुद्दा रहा। सालों से एयरपोर्ट का काम चल रहा है लेकिन अब तक वह चालू नहीं हो सका। शहर की जनता की मांग है की जल्द से जल्द यह एयरपोर्ट शुरू कर दिया जाए जो की केंद्र के हाथ में ही है।

मुद्दा 3 : शहर विकास और सड़कें
शहर विकास और सड़कों का मुद्दा लोक सभा के लिए भी सामने आया। बिलासपुर शहर में जहाँ सीवरेज से सड़क के गढ्ढों के कारण लोगों के कमर में दर्द आ गया है। वहीँ राष्ट्रिय मार्ग और शहर का स्मार्ट सिटी के तर्ज पर विकास किये जाने की मांग उठ रही है।

मुद्दा 4 : शिक्षा
शिक्षा के क्षेत्र में विकास इस बार के लोक सभा चुनाव में अहम् होगा। हाल ही में कांग्रेस में घोषणा पत्र में शिक्षा के क्षेत्र में जीडीपी का 6 त्न उपयोग करने की बात कही है। हालांकि यह भी एक चुनावी स्टंट दिखाई देता है।

मुद्दा 5 : रिक्त पदों की नियुक्ति
केंद्र सरकार द्वारा सरकारी पदों पर नियुक्ति बड़ा मुद्दा बना हुआ है। जहाँ हर पार्टी देश से बेरोजग़ारी हटाने की बात कर रही है वहीँ अभी भी 22 लाख पदों पर नियुक्ति बाकी है।

मुद्दा 6 : युवाओं को रोजग़ार
लोक सभा के लिए किसी भी पार्टी ने अब तक युवाओं को रोजग़ार पर कोई बात नहीं की है। युवाओं की इस मांग से सरकार पर कोनसी पार्टी प्रतिकिर्या देती है वह देखना होगा क्यूंकि बिलासपुर लोकसभा से 70000 युवा वोटर इस बार पहली बार मतदान करेंगे।

मुद्दा 7 : किसान
इस बार के लोक सभा चुनाव में सबसे बड़े घटक होंगे किसान। हम विधानसभ चुनाव में देख चुके हैं कैसे राज्य में किसानों के दम पर कांग्रेस ने 15 साल बाद अपनी जगह बनाई। लेकिन इसके बाद भी कांग्रेस के विधानसभा के पहले किये गए वाडे पूरी तरह पुरे नहीं किये गए हैं। अब लोक सभा चुनाव के लिए किसानों को अपने खेमें में लेना हर पार्टी का मुख्य उद्देश्य दिखाई पड़ता है।

मुद्दा 8 : नीतियों को लागू कर पाने वाली सरकार
युवा वोटरों की ख़ास मांग यह रही की वह ऐसी सरकार चाहते हैं जो न सिर्फ नीतियों का निर्माण करे बल्कि उसी भाव से उन्हें लागु भी करे। युवाओं की बात सुनें तो कुछ मोदी को चाह रहे कुछ राहुल को लेकिन अधिकतम युवा की नए चेहरे को खोजती हुई दिखाई पड़ रही है।

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