सब स्टेशन निर्माण के खिलाफ याचिका खारिज

हाईकोर्ट: स्थानीय नागरिक ने लगाई थी याचिका

By: Amil Shrivas

Published: 20 Jul 2018, 05:56 PM IST

बिलासपुर. हाईकोर्ट ने बिजली सब स्टेशन निर्माण के खिलाफ दायर याचिका जनहित के मद्देनजर खारिज कर दी। मामले की सुनवाई के दौरान विद्युत वितरण कंपनी की ओर से बताया गया था कोर्ट में मामला लंबित होने के बाद सब स्टेशन बनने के बाद भी बिजली आपूर्ति का काम शुरू नहीं हो पा रही और लोगों को दिक्कत हो रही है। जशपुर जिले के बगीचा के पास ग्राम रैनपुर में बिजली विभाग के सब स्टेशन निर्माण के खिलाफ वहीं के निवासी ल्यूस तिर्की ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि बिजली सब स्टेशन गांव की निस्तारी, गौचर जमीन पर बनाया जा रहा है। इसे यहां से हटाया जाए। कोर्ट ने बिजली विभाग को नोटिस जारी किया था। नोटिस के जवाब में विभाग ने बताया कि सब स्टेशन का निर्माण पूरा हो चुका है लेकिन हाईकोर्ट में मामला होने के कारण लोगों को वहां से बिजली नहीं मिल पा रही है।

गौचर जमीन से कब्जा हटाने, तालाब को बचाने का आदेश
हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई के बाद बिलासपुर के कलेक्टर व एसडीएम को आदेश दिया है कि कोटा के पास ग्राम धौराभाठा से गौचर व सरकारी जमीन से कब्जा हटाया जाए और तालाब को प्रदूषित होने से बचाया जाए। धौराभाठा निवासी राकेश साहू ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि गांव में सरकारी जमीन पर कब्जा किया जा रहा है और तालाब के
आसपास भी कब्जा कर रिहायशी इलाके का गंदा पानी तालाब में डाला जा रहा है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले में कार्रवाई के
निर्देश देते हुए याचिका निराकृत कर दी।

आदेश के बावजूद नियमित न करने पर लोनिवि सचिव को फटकार
बिलासपुर. श्रम न्यायालय के बाद हाईकोर्ट ने नियमितीकरण का आदेश दिया। फिर भी दैनिक वेतन भोगी गैंगमेन को नियमित न करने पर हाईकोर्ट ने लोनिवि सचिव को फटकार लगाई है। लोनिवि में कार्यरत रतनू यादव ने वर्ष 2004 में लेबर कोर्ट ने याचिका दायर की थी। सुनवाई के बाद लेबर कोर्ट ने उसको नियमित करने का आदेश दिया था। नियमित न करने पर रतनू ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। पिछले साल कोर्ट ने भी नियमित करने और पिछले वेतन व लाभ देने का आदेश विभाग को दिया था।

उसके बाद भी विभाग ने नियमित नहीं किया रतनू ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की। कोर्ट ने सचिव को फटकार लगाते हुए कहा कि कर्मचारी को 14 साल से घुमाया जा रहा है। दो सप्ताह में उसके नियमितीकरण की प्रक्रिया का आदेश कोर्ट ने दिया है।

Amil Shrivas
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned