सर्दी, खांसी व बुखार के मरीज निजी अस्पताल का लगा रहे चक्कर, नहीं कर रहे भर्ती

जिले में 250 से अधिक निजी चिकित्सक ओपीडी चलाते हैं जहां हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। वायरल इंफेक्शन से ग्रसित मरीज सर्दी, खांसी की शिकायत बताते हैं तो उन्हें ओपीडी से लौटा दिया जाता है। एेसे में अब मरीज जांच कराने के लिए भटक रहे हैं। कोरोना के डर से सरकारी अस्पताल जाना नहीं चाहते।

By: Karunakant Chaubey

Published: 28 Sep 2020, 07:25 PM IST

बिलासपुर. कोरोना संक्रमण का साइड इफेक्ट अब अन्य बीमारी पर दिखने लगा है। निजी चिकित्सक सामान्य बीमारी के मरीजों को अस्पताल में भर्ती नहीं कर रहे हैं। सर्दी, खांसी व बुखार के मरीज तो जांच और इलाज कराने निजी अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं। डॉक्टर सर्दी बुखार का नाम सुनते ही मरीजों को गेट से ही लौटा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 5 लोगों की टीम बनाई गई है, जो इन शिकायतों का निवारण करंेगे लेकिन लगातार शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाही नहीं की जा रही है।

जिले में 250 से अधिक निजी चिकित्सक ओपीडी चलाते हैं जहां हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। वायरल इंफेक्शन से ग्रसित मरीज सर्दी, खांसी की शिकायत बताते हैं तो उन्हें ओपीडी से लौटा दिया जाता है। एेसे में अब मरीज जांच कराने के लिए भटक रहे हैं। कोरोना के डर से सरकारी अस्पताल जाना नहीं चाहते।

कुछ दिनों पहले निजी चिकित्सकों की बैठक लेकर जिला प्रशासन ने कोविड के साथ ही सामान्य बीमारी के मरीजों के इलाज को लेकर चिंता व्यक्त की थी लेकिन इसके बाद भी जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था सुधर नहीं पाई है। इसके चलते अब जिले के सर्दी, खांसी सहित अन्य सामान्य बीमारी से पीडि़त मरीजों को निजी अस्पताल का चक्कर काटना पड़ रहा है।

डॉ.तृप्ति ने संभाला डीन का कार्रभार

सिम्स की नई डीन डॉ. तृप्ति नागरिया ने रविवार को पहुंच कर डीन का कार्रभार संभाल लिया है। चार्ज लेने के साथ ही डॉ. तृप्ति ने सिम्स की खामियों की जानकारी ली वहीं कोरोना प्रभारी डॉ.आरती पांडे को तलब किया और कोरोना के संबध में जानकारी मांगी है। वे सोमवार को सिम्स के सभी डॉक्टरों के साथ बैठक कर व्यवस्था सुधारने पर चर्चा कर सकती हैं।

Karunakant Chaubey Desk/Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned