पत्रिका की खबर का असर: मांग व वचन पत्र देने पर ही मिलेंगी अशासकीय स्कूलों को शासकीय पुस्तकें

शासकीय व गोद लिए विद्यालयों में तो पाठ्य पुस्तक निगम की पढ़ाई होती है, लेकिन अशासकीय स्कूलों में हर बार शासन को शिकायत मिलती है कि बच्चों के अभिभावकों से निजी स्कूल प्राइवेट राइटर्स की पुस्तकों को मंगाने व उससे ही पढ़ाई करने का दबाव बनाते हैं।

By: Karunakant Chaubey

Published: 07 Sep 2020, 11:31 AM IST

बिलासपुर. जिले के 571 विद्यालयों में पढऩे वाले हजारों विद्यार्थियों को अगस्त माह बीतने के बाद भी छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम की पुस्तकों का वितरण न होने से पढ़ाई में पिछडऩे की शिकायत को पत्रिका ने प्रमुखता से उठाया था। पत्रिका की खबर को संज्ञान में लेते हुए राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ बोर्ड से मान्यता प्राप्त 571 स्कूलों में मांग पत्र व वचन पत्र देने पर पाठ्य पुस्तक निगम की पुस्तकों को वितरण गतौरी से शुरू होगा।

छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षण विभाग से मान्यता प्राप्त कक्षा पहली से दसवीं के शासकीय, शासन द्वारा गोद लिए हुए व अशासकीय स्कूलोंं में शासन स्तर पर नि:शुल्क पाठ्य पुस्तक निगम की पुस्तकों का वितरण होता है। शासकीय व गोद लिए विद्यालयों में तो पाठ्य पुस्तक निगम की पढ़ाई होती है, लेकिन अशासकीय स्कूलों में हर बार शासन को शिकायत मिलती है कि बच्चों के अभिभावकों से निजी स्कूल प्राइवेट राइटर्स की पुस्तकों को मंगाने व उससे ही पढ़ाई करने का दबाव बनाते हैं।

लगातार शिकायतों को देखते हुए शासन ने शासकीय व गोद लिए हुए स्कूलों में पाठ्यक्रम की पुस्तकों का वितरण करा दिया था। अशासकीय स्कूलों में पुस्तक वितरण न होने से निजी स्कूल के बच्चों को पढ़ाई पूरी करने में परेशानी हो रही थी। मालमे में पत्रिका ने राज्य शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम से बात कर मामले को प्रमुखता से उठाया था। बातचीत के दौरान शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम ने जल्द ही पुस्तक वितरण की बात कही थी। अशासकीय स्कूलों में पाठ्य पुस्तक निगम की नि:शुल्क पुस्तक को वितरण करने का आदेश जारी कर दिया है।

मांग पत्र व वचन पत्र देना होगा निजी स्कूलों को

छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम की नि:शुल्क पुस्तक पाने के लिए निजी स्कूलों को छात्रों की संख्या बताकर मांग पत्र व वचन पत्र में लिख कर देना होगा कि स्कूल प्रबंधन किसी भी अभिभावक पर बाहरी पुस्तक लाने का दबाव नहीं बनाएगा व पाठ्य पुस्तक निगम की पुस्तकों से ही बच्चों को शिक्षा दी जाएगी।

Karunakant Chaubey Desk/Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned