scriptPublic interest litigation of Leader of Opposition to repeal new commi | झीरम कांड जांच के नए आयोग को निरस्त करने नेता प्रतिपक्ष की जनहित याचिका, 9 मई को सुनवाई | Patrika News

झीरम कांड जांच के नए आयोग को निरस्त करने नेता प्रतिपक्ष की जनहित याचिका, 9 मई को सुनवाई

झीरम घाटी कांड की जांच के लिए नए आयोग के गठन को चुनौती देते नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने जनहित याचिका दायर की है। याचिका में आयोग की वैधानिकता पर सवाल उठाते कहा गया है कि जस्टिस प्रशांत मिश्रा आयोग ने जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को सौंप दी है।

बिलासपुर

Published: April 29, 2022 07:22:34 pm

बिलासपुर। झीरम घाटी कांड की जांच के लिए नए आयोग के गठन को चुनौती देते नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने जनहित याचिका दायर की है। याचिका में आयोग की वैधानिकता पर सवाल उठाते कहा गया है कि जस्टिस प्रशांत मिश्रा आयोग ने जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। इसे 6 माह के भीतर विधानसभा में रखा जाना था। लेकिन, सरकार ने रिपोर्ट सार्वजनिक किए बिना ही नया आयोग गठित कर दिया है। कोर्ट ने याचिका पर 9 मई को सुनवाई तय की है।
झीरम कांड जांच के नए आयोग को निरस्त करने नेता प्रतिपक्ष की जनहित याचिका, 9 मई को सुनवाई
झीरम कांड जांच के नए आयोग को निरस्त करने नेता प्रतिपक्ष की जनहित याचिका, 9 मई को सुनवाई
जनहित याचिका में कौशिक ने कहा है कि पूर्व में राज्य सरकार ने झीरम घाटी कांड की जांच के लिए हाईकोर्ट जस्टिस प्रशांत मिश्रा की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था। आयोग ने आठ साल मामले की सुनवाई कर जांच पूरी कर ली थी। जस्टिस प्रशांत मिश्रा ने चीफ जस्टिस बनने के पहले अपनी जांच रिपोर्ट राज्य शासन को सौंप दी थी। कानून के अनुसार किसी आयोग की जांच रिपोर्ट को छह माह के भीतर विधानसभा में प्रस्तुत कर सार्वजनिक किया जाना चाहिए। राज्य सरकार ने ऐसा करने के बजाय लगभग पांच माह पहले दो सदस्यीय रिटायर्ड जस्टिस सुनील अग्निहोत्री और जस्टिस मिन्हाजुद्दीन का न्यायिक जांच आयोग का गठन कर दिया है। याचिका पर सुनवाई शुक्रवार को जस्टिस गौतम भादुड़ी व जस्टिस एनके चंद्रवंशी की डिवीजन बेंच में होनी थी। याचिकाकर्ता की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी नहीं आ पाए। इसलिए मामले की सुनवाई 9 मई को होगी।
नए आयोग की वैधानिकता पर सवाल

याचिका में कहा गया है कि जस्टिस प्रशांत मिश्रा आयोग की जांच रिपोर्ट को विधानसभा में रखा जाए और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। नए आयोग की वैधानिकता पर सवाल उठाते याचिका में कहा गया है कि एक आयोग जिस मामले की जांच कर चुका है, उसकी दोबारा जांच के लिए नया आयोग नहीं बनाया जा सकता, इसलिए नए आयोग को निरस्त किया जाए।

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