हाईकोर्ट बोला- इस लड़के का DNA टेस्ट कराकर पता करे पुलिस, क्या यही है बलात्कार पीड़ित लड़की के बच्चे का बाप

हाईकोर्ट बोला- इस लड़के का DNA टेस्ट कराकर पता करे पुलिस, क्या यही है बलात्कार पीड़ित लड़की के बच्चे का बाप

Murari Soni | Updated: 04 Aug 2019, 11:50:58 AM (IST) Bilaspur, Bilaspur, Chhattisgarh, India

Rape case: बलात्कार के कथित आरोपी की डीएनए टेस्ट की मांग हुई मंजूर, हाईकोर्ट बोला- परेशान किए बिना की जाए जांच

बिलासपुर. हाईकोर्ट ने बलात्कार(Rape case) के कथित आरोपी की डीएनए टेस्ट(dna test) की मांग को लेकर लगाई गई याचिका को मंजूर कर लिया है। जस्टिस रजनी दुबे की एकलपीठ ने 16 जुलाई को सुरक्षित रखे गए फैसला को सुनाते हुए निचली अदालत(bilaspur high court) के आदेश को निरस्त कर दिया है। एकलपीठ ने जिले के एसपी को डीएनए जांच की पर्याप्त व्यवस्था किए जाने का आदेश देते हुए ताकिद किया है कि पुलिस(bilaspur police) अधिकारी इस पूरी जांच प्रक्रिया के दौरान सिविल ड्रेस में रहेंगे व जांच के दौरान बच्चा व उसकी मां को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो। दरअसल बलात्कार के एक कथित आरोपी ने खुद को निर्दोष बताते हुए डीएनए टेस्ट की जांच किए जाने की मांग करते हुए कहा था कि इससे साबित होगा कि वो कथित बच्चे का पिता नहीं है।

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गौरतलब है कि रायपुर निवासी राजेश साहू पर एक युवती ने कई बार बलात्कार किए जाने का आरोप लगाया है। कहा गया है कि उक्त युवक ने उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया, जिसके कारण वो गर्भवती हो गई। बच्चे के जन्म के बाद समाज के डर से उसने बच्चे को मातृछाया में छोड़ दिया। बच्चे को किसी दंपत्ति द्वारा गोद भी ले लिया गया है। आरोपी युवक ने निचली अदालत में युवती के इस आरोप के खिलाफ खुद के डीएनए टेस्ट कराने की मांग की थी, लेकिन उसका आवेदन अदालत ने खारिज कर दिया था।

 

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जेल में एक वर्ष से सजा काट रहे राजेश ने खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर के माध्यम से हाईकोर्ट(bilaspur high court) में डीएनए टेस्ट की मांग को लेकर याचिका लगाई है। मामले(Rape case) की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 53 ए के तहत डीएनए टेस्ट की जिम्मेदारी पुलिस की होती है। वे अपनी जिम्मेदारी से नहीं मुकर सकते। इस मामले में निचली अदालत का फैसला भी अभी तक नहीं आया है, वहां से स्टे है। लिहाजा याचिकाकर्ता की मांग मंजूर की जानी चाहिए। 16 अगस्त को प्रकरण को सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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