छठ महाव्रत :कल सुबह 6.09 बजे से उदीयमान सूर्य को व्रती देंगे दूसरा अर्घ्‍य

इसके साथ ही छठ पर्व का चार दिनी अनुष्ठान संपन्न होगा। इसके बाद छठ व्रती पारण कर ठेकुआ का प्रसाद बांटेंगे। कोरोना संक्रमण से बचने तथा प्रशासन की अपील पर हजारों व्रतियों ने अपने घरों की छतों पर पानी भरे टब में खड़े होकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्‍य प्रदान किया।

By: Karunakant Chaubey

Published: 20 Nov 2020, 11:03 PM IST

बिलासपुर. शहर के बीच से निकली अंत:सलीला अरपा नदी के छठ घाट, पचरीघाट, कुदुदंड घाट सहित जोरापारा तालाब, ईरानी मोहल्ला चांटीडीह, भारतमाता चौक चिंगराजपारा सहित अन्य तालाबों, जलाशयों व सरोवरों पर बने घाटों पर, घर की छतों पर टब में और आवासीय प्रांगण में बनाए गए कुंड में हजारों की संख्या में व्रत करने वाले श्रद्धालुओं ने शुक्रवार को सायं 4.50 से 5.17 के बीच अस्ताचलगामी सूर्य को अघ्र्य दिया।

महिलाओं ने बांस के बने सूप में सभी प्रकार के फल, सब्जियां और हाथों से बनाए गए मिष्ठान रखकर अस्त होते सूर्य देव को अर्घ्‍य दिया। कुछ महिलाओं ने सूर्य देव से संतान प्राप्ति की मनोकामना की। व्रती महिलाओं ने अपने नाक से लेकर मांग तक सिंदूर कर अपने पति की लम्बी उम्र और घर में सुख, समृद्धि और यश की भी मनोकामना की। शनिवार को सुबह 6.09 बजे से उदीयमान सूर्य को व्रती दूसरा अघ्र्य देंगे।

इसके साथ ही छठ पर्व का चार दिनी अनुष्ठान संपन्न होगा। इसके बाद छठ व्रती पारण कर ठेकुआ का प्रसाद बांटेंगे। कोरोना संक्रमण से बचने तथा प्रशासन की अपील पर हजारों व्रतियों ने अपने घरों की छतों पर पानी भरे टब में खड़े होकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्‍य प्रदान किया।

अरपा छठ घाठ पर व्रतियों की सर्वाधिक भीड़ देखी गई। लेकिन पिछले सालों की तुलना में भीड़ काफी कम रही। हालांकि व्रतियों सहित उनके साथ गए श्रद्धालुओं ने मास्क का प्रयोग करते हुए सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने का प्रयत्न किया। जिला प्रशासन की ओर से छठ महाव्रत का आयोजन न करने संबंधी बैनर भी लगाए गए थे।

दोपहर बाद से ही अरपा छठ घाट सहित अन्य घाटों की ओर बढऩे लगे कदम

गुरुवार को खरना के बाद से व्रतियों ने 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू कर दिया था। रातभर व्रतियों ने छठी मइया की आराधना की। घर-घर छठी मइया के गीत गाये जा रहे थे। ऐसे में सुबह कब हो गई, व्रतियों को पता तक नहीं चला। शुक्रवार को दिन चढऩे के साथ ही व्रतियों में अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अघ्र्य प्रदान करने के लिए उत्साह चरम पर पहुंच चुका था।

दोपहर दो बजे के बाद से ही व्रतियों के कदम अरपा घाटों, तालाबों और जलाशयों की ओर बढऩे शुरू हो गये। शाम होते ही घाट व्रतियों से भर गये। इस बार घरों की छतों का माहौल पूरी तरह से उत्सवी हो गया। आसपड़ोस की महिलाओं ने एकत्र होकर छठ के गीत गाए और भगवान भास्कर को अघ्र्य दिया।

छठी मइया के गीत गा रहे रहे थे व्रती

शहर का माहौल पूरी तरह से भक्तिमय दिखा। व्रती पारंपरिक छठ गीतों मारबऊ रे सुगवा धनुष से, चलआ छठी माई के घाट, हे छठि माई, हे छठि माई, हम हई इहां परेदेश में, आईल छठि के बरत... केरे उठाई माथे सुपवा, दउरवा, केरे करत घाट भराई...अरपा के घाट पर हमहं अरगिया देबई हे छठी मइया... कांच के बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए..होख न सुरुजदेव सहाय ..बहंगी घाट पहुंचाए..बाबा कांचे कांचे बंसवा कटाई दीह फरा फराई दीह...केलवा जे फरेले घवद से वोह पर सुगा मडऱाए जैसे गीत गाते हुए जहां घाटों पर पहुंचे। वहीं इन गीतों को गाते हुए घर वापस आये।

फिजा में महक रही थी ठेकुआ की खुशबू

छठी मइया को ठेकुआ का प्रसाद चढ़ाया जाता है। ऐसे में शुक्रवार की सुबह से व्रतियों द्वारा घर-घर में ठेकुआ का प्रसाद बनाया गया। देसी घी में ठेकुआ बनाने के चलते व्रतियों के घरों के आसपास व घाटों पर ठेकुआ की खुशबू गमक रही थी।

गाजे-बाजे संग हुई आतिशबाजी

अघ्र्य देने के दौरान अरपा के विभिन्न घाटों, तालाबों व घरों की छतों पर गाजे-बाजे संघ आतिशबाजी भी की गई। घाटों पर पुलिस की भी सुरक्षा व्यवस्था रही।

Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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