बढ़ती आबादी के बावजूद धीमी गति से बढ़ी इस जिला मुख्यालय की जनसंख्या, पिछले जनगणना तक मात्र 31,250 लोग अब इतने

बढ़ती आबादी के बावजूद धीमी गति से बढ़ी इस जिला मुख्यालय की जनसंख्या, पिछले जनगणना तक मात्र 31,250 लोग अब इतने

Saurabh Tiwari | Updated: 11 Jul 2019, 12:09:53 PM (IST) Bilaspur, Bilaspur, Chhattisgarh, India

2021 की जनगणना का अनुमान, मुंगेली में रहने लगेंगे लगभग 60,000 लोग (world population day news in hindi)

मुंगेली। जब पुरे विश्व की जनसंख्या अनियंत्रित गति से बढ़ रही है। भारत कुछ समय में चीन को पीछे छोड़ जाएगा वहीँ दूसरी ओर भारत देश के छत्तीसगढ़ राज्य में मुंगेली शहर ने जनसंख्या वृद्धि में सबको हैरान किया है। मुंगेली की जनसँख्या वृद्धि दर इतनी काम रही के आप भी हैरान हो जाएंगे। पुरानी डायरी व संस्मरणों से यह जानकारी मिलती है कि मुंगेली की आबादी बढने की गति काफी धीमी रही। सन 1928 में मुंगेली की जनसंख्या 4 हजार मात्र थी। इसके बाद सन 1939 की जानकारी के अनुसार यानी 11 साल में नगर की आबादी 6 हजार तक हुई। इसके 19 साल बाद सन 1958 में नगर की जनसंख्या 8136 थी। सन 1968 में मुंगेली की जनसंख्या लगभग 19 हजार तक पहुंची। और 2011 की जनगणना के अनुसार यहां की जनसंख्या 31,250 है। यानी इन 83 सालों में नगर की आबादी केवल छः गुना ही बढी। (increasing population disadvantages)

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हालांकि विकीपीडिया के अनुसार 2013 में मुंगेली की आबादी 55,756 पहुंच चुकी थी। इस हिसाब से 2021 में होने वाली जनगणना में लगता है कि नगर की आबादी 60 हजार को पार कर ही जाएगी। सघन बसाहट वाले मुंगेली नगर में जिला बनने के बाद जनसंख्या में वृद्धि अधिक हुई है। (world population day logo) आसपास के गांवों के लोग बच्चों की बेहतर शिक्षा व स्वास्थ्य सेवा के लिए नगर के बाहरी क्षेत्र में जमीन खरीदकर घर बनाकर रहने लगे हैं। नगर के बाहरी क्षे.त्र में कालोनियां बनने लगी हैं। जिसके कारण नगर का क्रमिक विकास हो रहा है। जिले के रूप में मुंगेली की जनसंख्या को देखें तो पता लगता है कि जनवरी 2012 को जिला बने मुंगेली की जनसंख्या 7,01,707 है। जिले में जनसंख्या वृद्धि का दर 9 प्रतिषत है।

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2028 तक चीन को पछाड़कर most populated country होगा भारत
इसे विडंबना ही कहें कि जनसंख्या नियंत्रण हेतु परिवार नियोजन कार्यक्रम को 1952 में लागू करने वाला विष्व का पहला देश भारत (world population day) अगले सन 2028 तक जनसंख्या के लिहाज से चीन को पछाड़कर विष्व में प्रथम स्थान पर आ जाएगा। विगत सालों में चीन ने जनसंख्या में कमी लाने के लिए कई तरह की योजनाएं शुरू की हैं मगर भारत में इस ओर कोई सख्त कदम अभी तक नहीं उठाया गया है। हाल ही में जनसंख्या वृद्धि पर संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2050 तक पूरे विष्व की जनसंख्या के 970 करोड़ होने की संभावना है।

युवाओं का देश नहीं कहलाएगा ज़ादा समय तक भारत
आज की स्थिति में भारत युवाओं का देष है। (world population day india) मगर यह स्थिति अधिक सालों तक नहीं रहने वाली है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और विस्तार के कारण एक अनुमान है कि वर्ष 2050 तक वैश्विक औसत आयु 76 वर्ष और वर्ष 2100 तक 82 वर्ष हो जाएगी। संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट के अनुसार अफ्रीकी देशों की जनसंख्या 1.1 अरब से बढ़कर 2.4 अरब हो जाएगी, तथा वर्ष 2100 तक दुनिया भर में 60 वर्ष से ज्यादा आबादी की संख्या तिगुनी हो जाएगी। यह भी अनुमान है कि 2013-2100 के मध्य भारत सहित नाइजीरिया, पाकिस्तान, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, इथियोपिया, तंजानिया, इंडोनेशिया, मिस्र और अमेरिका में दुनिया भर की आधी आबादी रहेगी। वैश्विक जनसंख्या में जो वृद्धि होगी उसमें आधी से अधिक वृद्धि भारत, में होने का अनुमान है। इन देशों में भारत में सबसे अधिक वृद्धि होगी।

ये होगा विश्व स्तर पर बदलाव (objectives world population ion day)
संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी विश्व जनसंख्या संभावना नामक रिपोर्ट में बताया गया है कि अगले 30 वर्षों में विश्व की जनसंख्या (world population) दो अरब तक बढ़ने की संभावना है। 2050 तक जनसंख्या के 7.7 अरब से बढ़कर 970 करोड़ तक पहुंच जाने का अनुमान है। जहां अनेक देशों में जनसंख्या लगातार बढ़ रही है, वहीं चीन जैसे कुछ देशों में इसमें कमी आ रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार 2010 के बाद से 27 देश ऐसे हैं जिनकी जनसंख्या में एक या इससे भी अधिक फीसदी की कमी आई है। साल 2019 से 2050 तक 55 देशों में आबादी में एक फीसदी या उससे अधिक की कमी आने का अनुमान है। इनमें से 26 की जनसंख्या में 10 फीसदी तक की कमी आ सकती है। उदाहरण के तौर पर चीन में इस समय अवधि में जनसंख्या में 3.14 करोड़ यानी 2.2 फीसदी कम होने का अनुमान है।

बढ़ती जनसंख्या सीमित प्राकृतिक संसाधनों के लिये चुनौती भी बन रही है (population report of india) । कृषि विस्तार के लिये वनों को काटा जा रहा है। इससे कृषि योग्य बंजर भूमि तथा विविध वृक्ष प्रजातियों तथा बागों की सुरक्षित भूमि में कमी हो रही है (world population day theme 2019) । औद्योगिक विकास तथा आर्थिक विकास की चाह में उष्ण कटिबंधीय वनों का विनाश हो रहे हैं। उष्ण कटिबंधीय सघन वन प्रतिवर्ष एक करोड़ हेक्टेयर की वार्षिक दर से लुप्त हो रहे हैं (world population day theme) । थाईलैण्ड तथा फिलीपीन्स जैसे देश में जो कभी प्रमुख लकड़ी निर्यातक देशों में अग्रणी थे, वनों के विनाश के कारण बाढ़, सूखे के शिकार हैं।

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