जाते-जाते 2 लोगों के जीवन में रोशनी कर गए सुरेंद्र

जाते-जाते 2 लोगों के जीवन में रोशनी कर गए सुरेंद्र

Anil Kumar Srivas | Publish: Sep, 05 2018 12:44:13 PM (IST) Bilaspur, Chhattisgarh, India

हैंड्सग्रुप के सदस्य अविनाश आहूजा एवं सुनील तोलानी सिम्स की डॉक्टर की टीम एवं नेत्रदान सलाहकार के साथ उनके घर पहुंचे, और सुरेंद्र टुटेजा का कार्निया सुरक्षित कर लिया।

बिलासपुर. मंगलवार को नेत्रदान की कड़ी में एक और नाम जुड़ गया। वैशाली नगर बिलासपुर निवासी 63 वर्षीय सुरेंद्र सिंह टुटेजा का निधन हो गया। घर में हुई इस अकस्मात मृत्यु के बाद उनकी पत्नी जसपाल कौर एवं उनके बेटे हनी सिंह ने उनकी आंखें दान करने का पुनीत कार्य किया। सुरेंद्र रिटायर एसडीओ एवं समाजसेवी थे। वे हमेशा समाज का भला सोचते थे। उनकी मृत्यु के बाद परिवारजनों ने उनके नेत्रदान के लिए हैंड्सग्रुप से संपर्क किया। हैंड्सग्रुप के सदस्य अविनाश आहूजा एवं सुनील तोलानी सिम्स की डॉक्टर की टीम एवं नेत्रदान सलाहकार के साथ उनके घर पहुंचे, और सुरेंद्र टुटेजा का कार्निया सुरक्षित कर लिया। परिजनों का मानना है कि तरह से मृत्यु उपरांत नेत्रदान से मृतआत्मा की आखें सदैव जीवित रहती हैं। इससे दो अंधेरे जीवन को रोशनी मिल सकती। इसी के तहत लगातार हैण्ड्ग्रुप भी नेत्रदान के लिए लोगों को प्रेरित कर रहा है।

चल रहा नेत्रदान पखवाड़ा : 25 अगस्त से 8 सितंबर तक नेत्रदान पखवाड़ा चल रहा है। हैंड्स ग्रुप अलग-अलग संस्थाओं के पास जाकर के उन्हें नेत्रदान के प्रति जागरूक कर संकल्प पत्र भरवा रहा है। हैंड्स गुप पिछले 4 सालों से नेत्रदान के प्रति लोगों को जागरुक कर रहा है। अब तक हैंड्सग्रुप के माध्यम से 200 लोगों ने मरणोपरांत नेत्रदान किया है, जिससे कई लोगों के जीवन में रोशनी आ सकी।

अनोखी पहल : हैड्स ग्रुप द्वारा चलाया जा रहा है कार्य सराहनीय है। देश में लाखों लोग अंधत्व के शिकार है। नेत्रदान होने से लाखों लोगों के जीवन में उजियारा आ सकता है। लोगों के मन यह भ्रांतियां रहती है कि आंख निकाल लेने से चेहरा विकृत हो जाता है। जबकि नेत्रदान करने वाले व्यक्ति के आंख का सिर्फ कार्निया ही निकाला जाता है। जिससे मृतक के चेहरे पर किसी भी प्रकार की विकृति नहीं रहती है। जो भी व्यक्ति नेत्रदान करता है, उसके मृत्यु के घंटे के अंदर कार्निया को निकाल लेना चाहिए।

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