scriptThe decision of the High Court will be disrupted for the recruitment o | खाद्य नागरिक आपूर्ति निरीक्षक पद की भर्ती हाईकोर्ट के निर्णय रहेगी बाधित | Patrika News

खाद्य नागरिक आपूर्ति निरीक्षक पद की भर्ती हाईकोर्ट के निर्णय रहेगी बाधित

जिले के प्रवीण मिश्रा द्वारा खाद्य नागरिक आपूर्ति निरीक्षक के पद पर भर्ती हेतु आवेदन किया गया था। इसमें व्यापम द्वारा गलत उत्तर लिये जाने से क्षुब्ध होकर मिश्रा ने याचिका दायर की थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि खाद्य नागरिक आपूर्ति निरीक्षक पद की भर्ती इस याचिका में पारित होने वाले अन्तिम निर्णय के अधीन रहेगी। कोर्ट ने प्रतिवादियों को नोटिस भी जारी किया है।

बिलासपुर

Published: April 21, 2022 07:44:25 pm

बिलासपुर। जिले के प्रवीण मिश्रा द्वारा खाद्य नागरिक आपूर्ति निरीक्षक के पद पर भर्ती हेतु आवेदन किया गया था। इसमें व्यापम द्वारा गलत उत्तर लिये जाने से क्षुब्ध होकर मिश्रा ने याचिका दायर की थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि खाद्य नागरिक आपूर्ति निरीक्षक पद की भर्ती इस याचिका में पारित होने वाले अन्तिम निर्णय के अधीन रहेगी। कोर्ट ने प्रतिवादियों को नोटिस भी जारी किया है।
खाद्य नागरिक आपूर्ति निरीक्षक पद की भर्ती हाईकोर्ट के निर्णय रहेगी बाधित
खाद्य नागरिक आपूर्ति निरीक्षक पद की भर्ती हाईकोर्ट के निर्णय रहेगी बाधित
छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मण्डल द्वारा 04 जनवरी 2022 को खाद्य नागरिक आपूर्ति निरीक्षक के 84 पदों की भर्ती हेतु विज्ञापन जारी किया गया था। इसकी लिखित परीक्षा 20 फरवरी को आयोजित की गई। अभ्यर्थी प्रवीण मिश्रा इस पद में भर्ती के लिए प्रस्तुत आवेदन के अनुसार लिखित परीक्षा में सम्मिलित हुए। लिखित परीक्षा परिणाम में मिश्रा को ओवर आल 29वाँ रैंक प्राप्त हुआ। इस दौरान व्यापम द्वारा मॉडल आंसर जारी किया गया और दावा आपत्ति मंगाई गई। इस पर प्रवीण मिश्रा के द्वारा प्रश्नोत्तर क्रमांक 31, 85, 102, 118, 165, 172 एवं 176 पर आपत्ति दर्ज कराई। इसके बावजूद व्यापम ने प्रवीण मिश्रा की आपत्ति को नजरअन्दाज करते हुए अंतिम उत्तर जारी कर दिया गया और गलत उत्तरों को सही ठहरा दिया गया। इससे क्षुब्ध होकर प्रवीण मिश्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।याचिका का मुख्य आधार यह लिया गया कि याचिकाकर्ता द्वारा सही उत्तर देने के बाद भी छ.ग. व्यापम द्वारा गलत उत्तरों का चयन किया गया तथा दो प्रश्नों के उत्तर सही होने के बावजूद बिना किसी कारण के विलोपित कर दिया और याचिकाकर्ता के द्वारा प्रमाण के साथ सही उत्तर देने के बावजूद बिना समिति गठित कर गलत उत्तर का चयन करना असंवैधानिक है।

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