यहां शेरों को है कुत्तों से खतरा, जाने ये अनोखी वजह

Tiger crisis in india: बाघों के लिए खतरा बने एटीआर के सोनकुत्ता

By: Murari Soni

Published: 08 Dec 2019, 06:19 PM IST

बिलासपुर. अचानकमार टाइगर रिजर्व में सोन कुत्ते बाघों के लिए खतरा बन गए हैं। जानकारों का मानना है कि बाघों के लिए कोई खतरा है तो उसमें सबसे अधिक सोन कुत्ते ही होते हैं, जो झुंड में रह कर शिकार कर देते हैं। सोन कुत्तों को विलुप्तप्राय प्रजाति माना जा रहा है। एक समय अचानकमार टाइगर रिजर्व में इन पर शोध की बात कही जा रही थी। इनके रहवास, भोजन, व्यवहार से जुड़ी जानकारी जुटाने में अफसर से लेकर मैदानी अमला जुटा था। यह अपनी प्रजाति का इकलौता जीवित प्राणी है, जो कुत्तों में वंशावली से अलग है।

इसे अंतरराष्ट्रीय संगठन ने विलुप्तप्राय घोषित कर दिया है। आवासीय क्षेत्र में कम, शिकार, घरेलू व जंगली कुत्तों से बीमारी के कारण इनकी संख्या घट रही है। ऐसे में इस प्रजाति का अचानकमार टाइगर रिजर्व में नजर आना अचरज की बात है। अब सवाल उठ रहे हैं कि टाइगर रिजर्व में यह प्रजाति कैसे है और उन्हें यह जगह क्यों रास आ रही है। इसका पता लगाने और इस प्रजाति के संरक्षण के लिए प्रबंधन ने इस पर शोध करने की योजना बनाई थी। यह बात सामने आ रही है कि सोन कुत्तों की संख्या बढऩे से बाघों पर खतरा मंडरा रहा है। जानकार भी मानते हंै कि टाइगर रिजर्व जैसे जंगल में सोन कुत्तों का बढऩा ठीक नहीं है। ये झुंड में शिकार करते हैं। ये इतने खतरनाक होते हैं कि बाघ को घेर लेते हैं। झुंड में होने से बाघ भी इनसे डरते हैं। ऐसे में रिजर्व प्रशासन को खुश होने की जगह चिंतित नजर आ रहा है।

बाघों का बच्चा चोर
सोन कुत्तों को बाघों का बच्चा चोर माना गया है। दूर से ही बाघिन के शावकों की गंध पा जाते हैं। इसके चलते बाघों के लिए सोन कुत्तों को खतरा माना जाता है। ये जिस जंगल में रहते हैं, वहां से बाघ अपना ठिकाना बदल देते हंै।


मादा 6 से 8 बच्चों को देती है जन्म

मादा सोन कुतिया 6 से 8 बच्चे को जन्म देती है। इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ये सबसे अधिक खतरा गर्भवती बाघिन के लिए भी होते हैं। इन्में बहुत दूर तक की बदबू या खुशबू को सूंघने की शक्ति प्राप्त है। सबसे बढ़ी बात यह है कि अगर कहीं किसी बाघिन ने शावक को जन्म दी है तो वे उनके गंध को पा जाते हैं। बाघिन को घेरकर उसके बच्चे का शिकार कर देते हैं।

प्रजाति पर एक नजर
ये कुत्तों के कुल के जंगली प्राणी हैं, जो दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया में पाया जाते हैं। इसे ढोल भी कहा जाता है। यह अपनी प्रजाति का इकलौता जीवित प्राणी है जो कि कुत्तों से दंतावली और स्तनाग्रों में अलग है। यह निहायत सामाजिक प्राणी है, जो बड़े कुटुम्बों में रहता है। ये अक्सर शिकार के लिए बंट जाते हैं। ये जंगली सुअर, जंगली भैंसा व बाघ पर भी आक्रमण करने से नहीं हिचकिचाते।

Murari Soni
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