scriptToday is the first day of Ram Navami, know the worship method and Muh | रामनवमी का पहला दिन आज, जानें मां शैलपुत्री की पूजा विधि और मुहूर्त | Patrika News

रामनवमी का पहला दिन आज, जानें मां शैलपुत्री की पूजा विधि और मुहूर्त

रामनवमी के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम रूप श्री शैलपुत्री का पूजन किया जाता है। मां के इस भव्य स्वरूप की उत्पत्ति शैल यानी पत्थर से हुई है और इसीलिए इसीलिए मां को शैलपुत्री नाम से जाना जाता है। मां के इस स्वरुप को वृषारूढ़ भी कहते हैं क्योंकि मां शैलपुत्री का वाहन वृष यानी बैल है।

बिलासपुर

Published: April 01, 2022 11:33:00 pm

बिलासपुर . रामनवमी (चैत्र नवरात्रि) का त्योहार 2 अप्रैल 2022 से शुरू होने वाला है। हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व होता है। इस दौरान मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। रामनवमी के पहले दिन घटस्थापना की जाती है। नवरात्रि में घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री का होता है। मां दुर्गा के 9 स्वरूपों में मां शैलपुत्री पहला रूप हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में पैदा होने के कारण इनका नाम 'शैलपुत्री' पड़ा, ऐसे में पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। आइए जानते हैं मां शैलपुत्री की पूजा का शुभ मुहूर्त, मंत्र, पूजा विधि और आरती।
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जानें मां शैलपुत्री की पूजा विधि और मुहूर्त
मां शैलपुत्री पूजा विधि
नवरात्रि के पहले दिन एक लकड़ी की पटरे पर सफेद या लाल कपड़ा बिछाकर मां शैलपुत्री की मूर्ति रखें।
मां शैलपुत्री को सफेद रंग की चीजें काफी प्रिय हैं, ऐसे में मां को सफेद रंग की चीजें अर्पित करें।
मां शैलपुत्री के सामने घी का दीपक जलाएं और सफेद आसन पर उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठें।
एक साबुत पान का पत्ता लें और उसमें 27 साबुत लौंग रखें।
इसके बाद ओम शैलपुत्रये नम: मंत्र का 108 बार जाप करें।
मां के मंत्र का जाप करने के बाद लौंग को कलावे से बांधकर माला बना लें। इस लौंग की माला को मां शैलपुत्री को अर्पित करें।
मां को सफेद बर्फी का भोग लगाएं।
मां शैलपुत्री का मंत्र
ओम देवी शैलपुत्र्यै नम:॥
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
स्तुति: या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता: नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
मां शैलपुत्री आरती
शैलपुत्री माँ बैल असवार। करें देवता जय जय कार॥
शिव-शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने न जानी॥
पार्वती तू उमा कहलावें। जो तुझे सुमिरे सो सुख पावें॥
रिद्धि सिद्धि परवान करें तू। दया करें धनवान करें तू॥
सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती जिसने तेरी उतारी॥
उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दु:ख तकलीफ मिटा दो॥
घी का सुन्दर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के॥
श्रद्धा भाव से मन्त्र जपायें। प्रेम सहित फिर शीश झुकायें॥
जय गिरराज किशोरी अम्बे। शिव मुख चन्द्र चकोरी अम्बे॥
मनोकामना पूर्ण कर दो। चमन सदा सुख सम्पत्ति भर दो॥
मां शैलपुत्री की पूजा का महत्व
जीवन के समस्त कष्ट क्लेश और नकारात्मक शक्तियों के नाश के लिए एक पान के पत्ते पर लौंग सुपारी मिश्री रखकर मां शैलपुत्री को अर्पण करें। मां शैलपुत्री की आराधना से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और कन्याओं को उत्तम वर मिलता है। नवरात्रि के प्रथम दिन उपासना में साधक अपने मन को मूलाधार चक्र में स्थित करते हैं. शैलपुत्री का पूजन करने से मूलाधार चक्र जागृत होता है और अनेक सिद्धियों की प्राप्ति होती है।

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