रेप, मर्डर, नशा जैसी सामाजिक बुराइयां टीवी सिखा रहा- गृहमंत्री

Home Minister Tamradhwaj Sahu: गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि बच्चों को पढ़ाएं-लिखाएं, लेकिन उन्हें संस्कारित भी करें।

बिलासपुर. एक निजी कॉलेज में महिलाओं की आत्मरक्षा के प्रशिक्षण कार्यक्रम में आए गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने अपने भाषण में कहा गलती करने के लिए किसी क्लास की जरूरत नहीं है। गलती सीखने के लिए टीवी है।

गृहमंत्री ने कहा कितनी बच्चियों को आत्मरक्षा के गुर सिखाएंगे। क्या यह आज की आवश्यकता है उन्होंने कहा ये सब इसलिए हो रहा है क्योंकि हमारी जडें़ खराब हैं। क्या कभी ऐसा सोचा जा सकता है कि बेटियों को आत्मरक्षा के प्रशिक्षण की जरूरत ही न पड़े। गृहमंत्री ने कहा गलती करने के लिए किसी क्लास की जरूरत नहीं है। किसी लेक्चरर, प्रोफेसर, प्रिंसिपल की जरूरत नहीं है। गलती सीखने के लिए टीवी है। कैसे चाकू मारना है, एक सेकेंड में टीवी सिखाता है। कैसे शराब पीना है टीवी एक मिनट में सिखाता है। रेप हो रहा है, टीवी सिखा रहा है। मारपीट करना ही नहीं सास को कैसे घर से निकालना है, वह भी टीवी सिखा रहा है। भाई-भाई के बीच कैसे झगड़ा होना है, टीवी सिखा रहा है। इससे बढिय़ा शैक्षणिक संस्थान दूसरा नहीं है। यह गंभीर चिंतन का विषय है। टीवी में दिखाई जा रही पाश्चात्य सभ्यता हमारी भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी दुश्मन है। कार्यक्रम के दौरान विधायक शैलेश पाण्डेय, कार्यवाहक शहर अध्यक्ष प्रमोद नायक, अभयनारायण राय, रिषी पाण्डेय, पूर्व पार्षद दीपांशु श्रीवास्तव सहित अन्य शामिल थे।

संस्कार की शिक्षा बहुत जरूरी

गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि बच्चों को पढ़ाएं-लिखाएं, लेकिन उन्हें संस्कारित भी करें। यह समाज, देश और मानवता के प्रति आपका उपकार होगा। संस्कार की शिक्षा बहुत जरूरी है, वरना हमारी आने वाली पीढ़ी खराब होती जाएगी। इस पर गंभीर चिंतन करने की जरूरत है। मंत्री साहू ने कहा कि आज के युग की यह महती आवश्यकता है कि महिलाएं एवं बालिकाएं आत्मरक्षा के तरीके से परिचित हों। उन्होंने कहा कि हम किसी वृक्ष के फूल, पत्ते और फल की ओर ही ध्यान देते हैं, जड़ की ओर हमारा ध्यान नहीं जाता। जड़ की ओर ध्यान देने से पेड़ के सभी अंग अच्छे रहते हैं। उसी तरह सामाजिक व्यवस्था भी एक जड़ है, यह व्यवस्था ठीक रहेगी तो महिलाओं को आत्मरक्षा के लिए प्रशिक्षण लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली मानवता के निर्माण की दिशा में अनुपयोगी है और यह शिक्षा केवल नौकरी प्राप्त करने का साधन बन गया है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम जीवन के मूल उद्देश्य ही भूल गए हैं। इसके लिए सरकार कुछ नहीं कर सकती, बल्कि समाज एवं परिवार को प्रयास करना होगा।

Murari Soni Reporting
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