हुक्का-पानी बंद : छत्तीसगढ़ की बेखौफ खाप, न पुलिस को चिंता न गांव को लग रही नाइंसाफी

हुक्का-पानी बंद : छत्तीसगढ़ की बेखौफ खाप, न पुलिस को चिंता न गांव को लग रही नाइंसाफी

Anil Kumar Srivas | Publish: Oct, 23 2018 11:36:51 AM (IST) Bilaspur, Chhattisgarh, India

। इस प्रताडऩा के चलते दो दिन पहले सुनीता पोर्ते की बड़ी मां का निधन हो गया। जब निधन हुआ तो 20 घंटे तक शव घर में पड़ा रहा, लेकिन गांव से एक भी व्यक्ति की दिल नहीं पसीजा।

शिवतराई. आखिर समाज किस गलती की सजा दे रहा है? आदिवासी समाज की बेटी सुनीता पोर्ते की बड़ी बहन के इस सवाल का जवाब शिवतराई गांव के आदिवासी समाज के वे नेता नहीं दे रहे हैं, जिन्होंने पिछले डेढ़ साल से सुनीता पोर्ते व उसके पूरे परिवार का हुक्का-पानी बंद कर रखा है। इस प्रताडऩा के चलते दो दिन पहले सुनीता पोर्ते की बड़ी मां का निधन हो गया। जब निधन हुआ तो 20 घंटे तक शव घर में पड़ा रहा, लेकिन गांव से एक भी व्यक्ति की दिल नहीं पसीजा। आखिरकार प्रशासन और पुलिस के सहयोग से अंत्येष्टि हो सकी। ग्राउंड जीरो से शिव सिंह की रिपोट...

खाप की तरह इकतरफा फरमान : जब हम घर पहुंचे तब सुनीता की बहनें, बहनोई और बच्चे घर के कामों में व्यस्त थे। सुनीता व उसके पिता रूप सिंह पोर्ते जरूरी काम से कोटा गए थे। बहनों से सीधे मुद्दे पर बात शुरू हुई तो बोली कि समाज ने बिना किसी वजह के सजा दी है। न तो मेरी बहन ने किसी गैर समाज में जाकर शादी की है न ही कुछ और। जबकि समाज की बैठक में समाज से बहिष्कृत करने का आधार गैर आदिवासी से शादी से करने की बात कही। इनका कहना है कि वे उनके परिवार ने समाज की बैठक में जाकर पक्ष भी रखा लेकिन न्याय नहीं मिला। थक-हार कर सखी केन्द्र व पुलिस में भी मामला दर्ज किया गया, लेकिन परिणाम यह निकला कि अभी तक सामाजिक बहिष्कार जारी है। गांव के रास्ते बंद है। गांव के कार्यक्रमों में भी नहीं जा सकते।
दो छोटी बेटियों के हाथ नहीं हो पा रहे पीले : सामाजिक बहिष्कार का दंश झेल रही सुनीता की मां राधा बाई बेहद दु:खी हैं। वे कहती हैं कि उनकी बेटियां पढ़-लिखकर आगे बढ़ रही हैं तो कुछ लोग दुश्मनी निकाल रहे हैं। राधा की सात बेटियां व एक बेटा है।

गांव वाले ऐसे बोलते जैसे कुछ हुआ ही नहीं : पत्रिका टीम ने शिवतराई गांव के हर कोने से खोजबीन कर इस संवेदनशील मामले में तह तक जाने की कोशिश की। शुरुआत गांव में सुनीता पोर्ते के मकान का पता लगाने से हुई। कई ग्रामीणों से पूछने के बाद भी सही जानकारी नहीं मिली तो वनकर्मी ने घर तक पहुंचाया। ग्रामीण ऐसे व्यवहार कर रहे थे जैसे किसी को कुछ भी पता नहीं।
इन्हें परवाह नहीं किसी कानून की : पत्रिका टीम इन तीनों से मिलने के लिए उनके घर भी पहुंची, लेकिन सिर्फ किसान होरी लाल मेश्राम से उनके खेत में भेंट हो पाई। मेश्राम ने कहा कि पूरे गांव में समाज की लड़की के बारे में पोस्टर लगे तो पता चला कि उसके गैर आदिवासी समाज से रिश्ते हैं। उसके परिवार को बुलाया गया, लेकिन नहीं आया। पुलिस के पास गया और पुलिस से नोटिस मिलने पर गांव का आदिवासी समाज थाना गया। पूरी बात रखी। मेश्राम यह मानने के लिए तैयार नहीं हैं कि बिना किसी आधार पर सामाजिक बहिष्कार किया गया और यह पूरी तरह से गैरकानूनी है।

बहिष्कार करने वालों को न मलाल न भय : पोर्ते परिवार से जुड़े उन तीन किरदारों के नाम पता किए, जिनकी उपस्थिति में समाज ने पोर्ते परिवार को समाज से बहिष्कृत किया। ये नाम हैं किसान होरी लाल मेश्राम, वनोपज समिति के प्रबंधक मान सिंह धुर्वे और सरकारी मिडिल स्कूल के शिक्षक मालिक राम नेताम। इन तीनों की पकड़ गांव के आदिवासी समाज में अच्छी है।
तीरंदाजों के गांव में गड़बड़ : वनांचल क्षेत्र में बसे इस शिवतराई की चर्चा यहां के प्रतिभावान तीरंदाजों की वजह से होती है। उनकी राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर पहचान है, लेकिन एक आदिवासी परिवार के सामाजिक बहिष्कार की घटना को लेकर गांव चर्चा में आया है। शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास की मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था तो है लेकिन प्रभावी तरीके से यहां के लोगों के लिए उपलब्ध नहीं हैं।

प्रशासन, पुलिस की लाचारी : मामला मार्च 2017 से जारी है। इस बीच पुलिस की ओर से मामला दर्ज करने से लेकर कार्रवाई की रस्में भर अदा की गई हैं। इसके इतर कुछ भी नहीं। सामाजिक कार्यकर्ता अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला बताती हैं कि पीडि़ता बिलासपुर में नौकरी करती है। पिछले दिनों आरोपी बंजारे उसे तेजाब हमले की धमकी भी दे चुका है, लेकिन पुलिस ने उसके खिलाफ कोई एक्शन नहीं किया। ऐसी लाचारगी कभी नहीं देखी। जब न तो सामने कोई रसूखदार परिवार है न कोई राजनीतिक हस्तक्षेप। बावजूद पुलिस कोई कारगर कदम नहीं उठा पा रही। हालांकि अंत्येष्टि जरूर पुलिस की पहल पर हो पाई है।
कुएं से पानी नहीं ले सकता परिवार : सामाजिक बहिष्कार के कारण पोर्ते परिवार को गांव के कुएं से पानी तक लेने नहीं दिया जाता। भले ही इस कुएं में मोटरपंप के जरिए बाकी लोग गैरकानूनी तरीके से पर्याप्त पानी ले रहे हैं। इतना ही नहीं पोर्ते परिवार के बस्ती वाले मकान के निकट बोर वाला पंप भी है, लेकिन यहां भी पानी लेने में परेशान किया जाता है।

बात मानें नहीं तो जारी रहेगा बहिष्कार : आदिवासी समाज की बेटी किसी दूसरी जाति के साथ विवाह करे तो इसे समाज सहन नहीं करेगा। समाज की बैठक मेें संबंधित परिवार को बुलाया गया, लेकिन वे नहीं आए। उन्हें आना पड़ेगा और समाज की बात माननी होगी। अन्यथा समाज से बहिष्कार जारी रहेगा।
होरी लाल मेश्राम, किसान

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समाज के मामले में पंचायत क्या करे :यह सामाजिक मामला है। इसमें ग्राम पंचायत कुछ नहीं कर सकती। जहां तक समाज की बात है तो संबंधित परिवार के साथ हमारी संवेदना है। जरूरत के हिसाब से मदद भी कर रहे हैं।
निर्मला संतोष पोर्ते, सरपंच, शिवतराई

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प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के साथ प्रोविजनल एक्ट के तहत भी : शिवतराई गांव में पीडित परिवार के खिलाफ सामाजिक बहिष्कार का मामला सामने आया है। इस प्रकरण में दोषियों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के साथ ही प्रोविजनल एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जाएगी।
अर्चना झा, एएसपी ग्रामीण

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