छात्रों के विरोध के बाद सीयू बैकफुट पर, अब चुनाव 24 की बजाय 31 जनवरी को

student council election: छात्र परिषद चुनाव को लेकर मचे संग्राम के 24 घंटे बाद गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय ने बैकफुट पर आते हुए चुनाव नए सिरे से कराने का निर्णय लिया है।

बिलासपुर. छात्र परिषद चुनाव को लेकर मचे संग्राम के 24 घंटे बाद गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय ने बैकफुट पर आते हुए चुनाव नए सिरे से कराने का निर्णय लिया है। कल तक चुनाव नहीं कराने को लेकर अड़ी व छात्रों से इस संबंध में किसी प्रकार की बातचीत नहीं करने के मूड में दिख रही विशवविद्यालय प्रशासन ने छात्रों के विरोध को देखते हुए घुटने टेक दिए। 24 घंटे तक चले मेलोड्रामा पर पटाक्षेप करते हुए 22 जनवरी को चुनाव का नया शेड्यूल जारी किया है। अब चुनाव 24 की बजाय 31 जनवरी को होगा व परिणाम भी उसी दिन शाम को जारी किया जाएगा।

चुनाव के लिए नामिनेशन की प्रक्रिया 23 जनवरी से शुरू की जाएगी, इस दिन छात्र अपने विभाग से नामांकन फार्म ले सकेंगे और 24 जनवरी तक संबंधित विभाग में जमा कर सकेंगे। वैध फार्मों की जांच 27 जनवरी तक की जाएगी और उम्मीदवारों का नाम शाम तक जारी किया जाएगा। नाम वापसी 28 जनवरी तक होगा व उसी दिन अंतिम उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की जाएगी। मतदान 31 को होगा व परिणाम 31 को जारी किया जाएगा।

छात्रों ने किया विश्वविद्यालय बंद, 5 घंटे प्रशासनिक भवन का घेराव

छात्रो ने अंसंवैधानिक रुप से चुनाव का फिर से निर्धारण किए जाने पर बुधवार को विश्वविद्यालय बंद करा दिया। सभी कक्षाओं का बहिष्कार कर करीब 5 घंटे तक प्रशासनिक भवन का घेराव किया। घंटों की नारेबाजी के बाद मुख्य चुनाव अधिकारी प्रो. बीएन तिवारी, कुलानुशासक प्रो. विशन सिंह राठौड़ व छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एमएन त्रिपाठी छात्रों से मिलने पहुंचे। छात्रों ने अधिकारयों को इस बात के लिए घेरा कि सेंट्रल यूनिवर्सिटी एक्ट 2009 व छात्र परिषद चुनाव नियमावली के तहत चुनाव की तिथि आगे बढ़ाना असंवैधानिक है।

अधिकारियों ने मानी गलती

छात्रों के इस तर्क पर अधिकारियों ने स्वीकार किया कि फिजिकल साइंस फार्म की गणना में अधिकारियों से चूक हुई। इसे कारण से चुनाव को आगे बढ़ाना पड़ा। हालांकि कुलपति द्वारा किए गए व्यवहार के संबंध में अधिकारियों ने चुप्पी साध ली और इस संबंध में कुछ भी कहने से बचते रहे।

चुनाव टालने के पीछे की रणनीति क्या

नामिनेशन फार्म को आधार बना कर चुनाव को स्थगित करने या चुनाव समय पर नहीं कराने के पीछे की पूरी रणनीति क्या है। आखिरकार चुनाव कराने को लेकर विश्वविद्यलय प्रबंधन के हाथ-पांव क्यों फुल जाते हैं। इस पर छात्र परिषद के पूर्व अध्यक्ष उदयन शर्मा का साफ कहना है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन नहीं चाहता कि चुनाव समय पर हो। अगर चुनाव समय पर होंगे तो छात्रों को पूरा एक वर्ष कार्य के लिए मिलेगा। विश्वविद्यालय की सभी प्रशासनिक गतिविधियों में छात्र परिषद को अनिवार्य या किसी न किसी रूप से शामिल करना होगा। पूर्व अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि एक्जिक्यूटिव काउंसिल में जगह देने की पिछले कई वर्षों से मांग के बाद भी निर्णय नहीं लिए जाने के कई अहम वजह है। प्रशासन को डर है कि काउंसिल में जगह देने पर अध्यक्ष व सचिव को साल में दो बार बैठक में अनिवार्य रूप से शामिल करना होगा। विश्वविद्यालय में प्राध्यापकों की नियुक्ति से लेकर हॉस्टल, मेस टेंडर, मिलने वाले अनुदान, किए गए खर्च समेत तमाम जानकारियां साझा करनी होगी। प्रबंधन नहीं चाहता कि इसमें छात्रों की किसी प्रकार की भूमिका हो।

निष्पक्ष चुनाव कराना विश्वविद्यालय प्रबंधन की जिम्मेदारी है। फिजिकल साइंस फार्म को लेकर चुनाव की तिथि बढ़ाई गई है। ये नीतिगत व प्रशासनिक आधार पर लिया गया निर्णय है। छात्रों को सहयोग करना चाहिए।

प्रतिभा जे मिश्रा, मीडिया प्रभारी
सीयू

Murari Soni Reporting
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