मंत्रोच्चारण से गूंज उठा व्यंकटेश मंदिर, भक्तों ने सस्वर किया स्त्रोत पाठ, लिया आशीर्वाद

शृंगार आरती के साथ देवी गोदाम्बा व भगवान व्यंकटेश की पूजा की गई।

By: Amil Shrivas

Published: 18 Dec 2018, 12:41 PM IST

बिलासपुर. स्त्रोत पाठ व सहस्त्रनाम जाप के साथ सोमवार को श्री व्यंकटेश मंदिर में गोदाम्बा उत्सव की शुरुआत हुई। इस दौरान मंत्रोच्चारण की गूंज मंदिर परिसर में सस्वर गूंजती रही। संस्कृत विद्यालय के शिष्यों ने एक लय में स्त्रोत पाठ करते हुए माहौल को भक्तिमय किया। शृंगार आरती के साथ देवी गोदाम्बा व भगवान व्यंकटेश की पूजा की गई।

सिम्स के सामने व्यंकटेश मंदिर में गोदाम्बा उत्सव की शुरुआत सोमवार को सुबह हुई। विधि-विधान से पूजा-अर्चना मंदिर के मठाधीश डॉ.कौशलेंद्र प्रपन्नाचार्य के मार्गदर्शन में हुआ। इस दौरान भगवान व्यंकटेश का फूलों से शृंगार किया गया। स्त्रोत पाठ व सहस्त्रनाम पाठ का जाप सामूहिक रूप से किया गया। जिसमें संस्कृत विद्यालय के छात्र व श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और उत्साह से पाठ किया। शृंगार पूजन के बाद महाआरती की गई। श्री गोदा रंगनाथ भगवान का मंगल भजन किया गया। इसके बाद प्रसाद वितरण का कार्यक्रम किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धाल उपस्थित रहे।

Vyankatesh
IMAGE CREDIT: patrika

प्रत्येक शुक्रवार को होगी विशेष पूजा, दूध व दही से होगा अभिषेक : गोदाम्बा महोत्सव लगातार एक माह तक मनाया जाएगा। मंदिर के सेवक गोपाल कृष्ण ने बताया कि प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष दशमी से गोदाम्बा महोत्सव का पावन पर्व प्रारंभ हुआ। इस अवसर पर वैष्णव संप्रदाय द्वारा प्रतिष्ठित सभी मंदिरों में गोदाम्बा महोत्सव का पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ पूरे एक माह तक मनाया जाएगा। इसमें विशेष पूजन, शृंगार व आरती का कार्यक्रम किया गया। साथ ही प्रति शुक्रवार को भगवान का तिरुमंजन यानी की महाअभिषेक दूध, दही, घी, शहद आदि से किया जाएगा।

राधा का रूप है देवी गोदाम्बा : श्रवण मासपूर्व फाल्गुन नक्षत्र मे प्रात: पाण्ड्य द्रविण देश में तुलसी वन मे विश्व का भरण पोषण करने वाली राधा गोदाम्बा के नाम से प्रकट हुई। दक्षिण देश के श्री बिल्लीपुत्तुर नगर मे संत श्री विष्णुचित आल्वारण भगवान की फूल तुलसी सेवा करते हुए निवास थे। एक दिन जब तुलसी के बगीचे की सेवा कर रहे थे तो उन्हे पृथ्वी से अनुपम रूपवती कन्या प्राप्त हुई। गो अर्थात् पृथ्वी द्वारा दिए जाने के कारण इस कन्या का नाम उन्होंने गोदा रखा कुमारी गोदा ने भगवान के साथ विवाह का निश्चय करके भगवान को पति स्वरूप में प्राप्त करने के लिए ब्रज गोपीयों की तरह धनुर्मास व्रत धन की संक्रांति से मकर संक्रांति तक, एक माह का व्रत करके भगवान श्री कृष्ण को पति स्वरूप में प्राप्त किया। कुमारी गोदा की तरह जो कन्या यह व्रत करती है उन्हे सुंदर अनुरूप पति प्राप्त है तथा जिस प्रकार भगवान ने गोदा का मनोरथ पूर्ण किया वैसे ही सब भक्तों का मनोरथ पूर्ण करते है।

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