भरपूर है भू-जल भंडार, फिर भी आधी से अधिक आबादी ने इस बार जल का हाहाकार सहा

water level dropped: कांक्रीट के जंगल ने ध्वस्त किया शहर का वाटर रिचार्जिंग सिस्टम, शहर में पानी की किल्लत प्राकृतिक नहीं, मानव निर्मित

By: Murari Soni

Updated: 07 Jul 2019, 09:25 PM IST

जयंत कुमार सिंह

बिलासपुर। न भू-जल स्तर में भारी गिरावट है न सतही जल ( water level dropped)में बावजूद इसके बिलासपुर की आधी से अधिक आबादी ने इस बार जल का हाहाकार सहा। यह कहती है केंद्रीय जलसंसाधन विभाग के केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट। चौंकिए मतयह सच है। आयोग की पूरी रिपोर्ट में सिर्फ बिल्हा और तखतपुर को सेमी क्रिटिकल एरिया में रखा गया है। बिलासपुर में हालात सामान्य हैं। यह खबर बिलासपुर के लिए राहत है लेकिन अधूरी। चूंकि रिपोर्ट अगले हिस्से में आगाह भी कर रही है। इसके मुताबिक बिलासपुर में भू-जल रिचार्ज घटा है। जबकि इसका दोहन बढ़ा है। आयोग के वैज्ञानिक इसकी सबसे बड़ी वजह हर घर में पानी के बोर को बताते हैं। दूसरी वजह जमीन के भीतर पानी ले जाने वाले ओपन फिल्ड या मड फिल्ड की कमी है। दुर्भाग्य से प्रदेश याा केंद्र के किसी भी विभाग के पास इन दोनों वजहों के निराकरण की कोई मुकम्मल योजना नहीं है। आइए समझते हैं इस रिपोर्ट को परत दर परत

 

सीजी वाटर बोर्ड के वैज्ञानिक सुजीत सरकार का कहना है कि जब तक चीजें आपको फ्री में मिलती हैं तब तक आप उसकी कद्र नहीं समझ पाते हो। ऐसी ही स्थिति पानी के साथ हो रही है। आज हालात ये हो गए हैं कि हमारे जिले में ग्राउंड वाटर का भरपूर स्टाक है इसके बाद भी बिलासपुर शहर सूख रहा है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि जिले में उपलब्ध ग्राउंड वाटर 41102.44 हेम (हेक्टेयर मीटर) है। इसमें सभी प्रयोजन के लिए उपलब्ध कुल ग्राउंड वाटर 18737.84 हेम है। इसमें से 15222.66 हेम सिंचाई के लिए तो 3215.18 हेम पेयजल और औद्योगिक प्रयोजन के लिए है। इस प्रकार यदि हम पूरे जिले की स्थिति में ग्राउंड वाटर के विकास की बात करें तो ये 45.59 प्रतिशत है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट कहती है कि जिले के सभी ब्लाक को सेफ यानि सुरक्षित की श्रेणी में रखा गया है। केवल बिल्हा और तखतपुर सेमी क्रिटिकल केटेगरी में रखा गया है।

कैसे तैयार होती है रिपोर्ट
केंद्रीय जल आयोग की ओर से ग्राउंड वाटर की जो रिपोर्ट तैयार की गई है उसके विधि की बात करते हैं। पूरे जिल में नेशनल हाइड्रोग्राफ स्टेशन के माध्यम से 92 सथायी आब्जर्वेशन सेंटर बनाए गए हैं। इसमें से 81 डग वेल हैं जबकि 11 पीजोमीटिर लगाए गए हैं। साल में चार बार ग्राउंड वाटर के स्थिति का आकलन कर रिपोर्ट तैयार किया जाता है। वहीं एक बार पानी की गुणवत्ता को परखा जाता है।

मानसून के पहले और बाद का असर
रिपोर्ट के अनुसार जिले के ग्राउंड वाटर लेवल पर मानसून के पूर्व और बाद की स्थिति में दस साल के आंकड़ों के अनुसार औसत फर्क पड़ता है। यदि प्री मानूसन की बात करें तो 2.00 एमबीजीएल (मीटर बिलो ग्राउंड लेवल) से 15.30 एमबीजीएल होता है। जबकि पोस्ट मानसून में ये 2.12 एमबीजीएल से 12.90 एमबीजीएल वैरी करता है।

 

बिलासपुर क्यों सूख रहा
अब सवाल उठता है कि जब पूर जिले में ग्राउंड वाटर भरपूर है फिर बिलासपुर में पेयजल के लिए हाहाकार क्यों है। इस ममले में जब जल वैज्ञानिक से बात की गई तो उनका कहना था कि ये हाहाकर प्राकृतिक नहीं मानव निर्मित है। जिन इलाकों में पानी के लिए खासकर ग्राउंड वाटर के लिए हाहाकार की स्थिति है यदि वहां गौर करें तो हमने उसके या उसके आसपास के वाटर रिर्चाजिंग प्वाइंट को खत्म कर दिया है। इसके उलट लगातार यहां ग्राउंड वाटर का दोहन हो रहा है। बोर की संख्या बढ़ती चली जा रही है। कांक्रीट की चौड़ी सड़कें, कांक्रीट के भवन जिस प्रकार से एरिया को कवर कर रहे हैं और खुला स्पेस व मिट्टी खत्म हो रही है और जब मिट्टी खत्म होगी तो बारिश का पानी उस इलाके में बजाए रिसने के कहीं दूर बह जाएगा।

एक नजर भू-जल पर
41102.44 हेम कुल उपलब्धता
15522.66 हेम कुल सिंचाई के लिए
3212.18 उपलब्ध पेयजल व उद्योग के लिए
18737.84 उपलब्ध हर प्रकार के उपयोग के लिए
हेम (हेक्टेयर मीटर), आंकड़े 2013 की स्थिति में

 

सीधी बात, सुजीत सरकार, जल वैज्ञानिक-बी, सीजी जल बोर्ड

प्रश्न- ग्राउंड वाटर भरपूर है फिर भी बिलासपुर क्यों सूख रहा है
सरकार- यहां पानी का खपत ज्यादा है लेकिन रिचार्ज नहीं किया जा रहा है। ये प्राकृतिक नहीं है ये मानव निर्मित समस्या है।

प्रश्न- ग्राउंड वाटर की किल्लत क्यों है
सरकार- हमने शहर में अधिकांश वाटर रिचार्ज प्वाइंट बंद कर दिए हैं।

प्रश्न- बंद कर दिए हैं से आशय
सरकार- कांक्रीट की सड़के, भवन, यहां तक कि खाली जगह को भी कांक्रीट से ढाल रहे हैं। ग्राउंड वाटर रिचार्ज नहीं हो रहा। दूसरी ओर जो स्टाक है उसका दोहन लगातार बोर या ड्रील के माध्यम से कर रहे हैं।

प्रश्न- अब इस संकट का समाधान क्या है
सरकार- हमें अवेयर होना होगा, वाटर रिचार्ज की दिशा में जागना होगा।

प्रश्न - सिर्फ अवेयरनेस पर्याप्त है?
सरकार - साउथ इंडिया में बिना रेन वाटर हार्वेस्टिंग के मकान बनाने की अनुमति नहीं है। यहां भी कानून में सख्ती करनी होगी। सरकार और नागरिक सबको मिलकर काम करना होगा।

प्रश्न- आम आदमी क्या कर सकता है
सरकार- हम जितने एरिया में कांक्रीट का निर्माण कर रहे हैं उस एरिया के पानी को अपने ही कैंपस में एब्जार्ब करें।

फैक्ट फाइल,
खतरनाक हालात
26 वार्ड सूखे की चपेट में
66 वार्ड हैं कुल
43 बोर सूख गए
12 टंकियों के बोर सूखे

क्या हैं उपाय

रेन वाटर हार्वेस्टिंग
अरपा नदी पर एनीकट
ज्यादा से ज्यादा पौधरोपण
निगम की दुरुस्त वाटर सप्लाई
बोर खनन पर सख्ती
रिजर्वायर का निर्माण
परकोलेशन टैंक निर्माण
नाला बंद

जिले की स्थिति में
जिले में यदि कृत्रिम वाटर रिचार्ज सेटअप की बात करें तो भारत सरकार के जलसंसाधन मंत्रालय केंद्रीय भू-जल बोर्ड के मास्टर प्लान 2013 में बिलासपुर इलाके के लिए जो प्लान है उसके अनुसार औसतन पोस्ट मानसून जल स्तर की गहराई 5.78 एमबीजीएल (मीटर बिलो ग्राउंड लेवल) है। जिले का कुल एरिया 7476 स्कवायर किमी है। इसमें से 1927.09 स्कावयर किमी का इलाके को कृत्रिम रिचार्ज की जरूरत है या यहां बनाया जा सकता है। रिचार्ज के लिए बिलासपुर जिले को 217.4284 एमसीएम सतही वाटर की जरूरत है।

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