स्पाइनल स्टेनोसिस तो नहीं पीठदर्द की वजह?

आजकल पीठदर्द आम बात है। किशोर से लेकर वृद्ध तक किसी न किसी रूप में पीठदर्द से परेशान हैं। ऐसा ही एक दर्द स्पाइनल स्टेनोसिस है। इस...

By: मुकेश शर्मा

Published: 07 Jun 2018, 04:36 AM IST

आजकल पीठदर्द आम बात है। किशोर से लेकर वृद्ध तक किसी न किसी रूप में पीठदर्द से परेशान हैं। ऐसा ही एक दर्द स्पाइनल स्टेनोसिस है। इस रोग की वजह से हमारे शरीर की ***** उभरने लगती है और ऊत्तक मोटे हो जाते हैं जिससे रीढ़ नलिका से जाने वाली नस सिकुडऩे लगती है व पीठ में दर्द होता है।

यह है समस्या

स्पाइनल स्टेनोसिस में हमारी रीढ़ की हड्डी में मौजूद खुले स्थान बंद होने लगते है जिससे स्पाइनल कॉर्ड और नसों पर दबाव पड़ता है। ज्यादातर मामलों में स्पाइन का सिकुडऩा, स्टेनोसिस होने के कारण ही होता है जिससे नर्व रूट दबने से पैरों में दर्द, थकान, अकडऩ व झनझनाहट महसूस होने लगती है।

अचानक पीठदर्द

इसका इलाज मुश्किल हो सकता है क्योंकि इस तरह के लक्षण किसी अन्य कारण से भी हो सकते हैं। जिन लोगों को स्टेनोसिस हो यह जरूरी नहीं की उन्हें पहले कभी पीठ में दर्द हो या कभी किसी तरह की चोट लगी हो। स्पाइनल स्टेनोसिस में अचानक पीठदर्द होता है जो आराम करने पर चला जाता है। अगर रोग अधिक न बढ़ा हो तो सर्जरी से उपचार संभव है। इसके लिए जरूरी है कि शारीरिक रूप से सक्रिय रहा जाए क्योंकि इससे रोग जल्दी ठीक होता है। छोटे-छोटे बदलाव जैसे स्ट्रेट जैकेटेड कुर्सी की जगह झुकने वाली चेयर से अच्छे परिणाम मिलते हैं।

सर्जरी में सावधानी

एपिडरल इंजेक्शन से मरीजों को ठीक किया जा सकता है। जिन लोगों को सर्जरी करानी पड़ती है उनके जल्दी ठीक होने में भी यह इंजेक्शन मददगार होता है। जब सभी प्रयास विफल हो जाते हैं तो सर्जरी ही विकल्प होती है। हालांकि सर्जरी से पहले मरीज के शारीरिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखना जरूरी होता है। फिर डॉक्टर को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह क्षतिग्रस्त नब्ज को पहचानकर उसका उपचार करे। इलाज करते समय पूरी सावधानी बरती जानी चाहिए कि किसी और नस को नुकसान न पहुंचे।

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मुकेश शर्मा Reporting
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