कई बीमारियां बताती एमआरआई

Mukesh Sharma

Publish: Jul, 11 2018 04:30:51 AM (IST)

तन-मन
कई बीमारियां बताती एमआरआई

एमआरआई स्कैन का इस्तेमाल मस्तिष्क, हड्डियों व मांसपेशियों, सॉफ्ट टिश्यू, चेस्ट, ट्यूमर-कैंसर, स्ट्रोक, डिमेंशिया, माइग्रेन, धमनियों...

एमआरआई स्कैन का इस्तेमाल मस्तिष्क, हड्डियों व मांसपेशियों, सॉफ्ट टिश्यू, चेस्ट, ट्यूमर-कैंसर, स्ट्रोक, डिमेंशिया, माइग्रेन, धम नियों के ब्लॉकेज और जेने टिक डिस्ऑर्डर का पता लगाने में होता है । बीमारी की सटीक जान कारी के लिए यह जांच होती है । पहली बार एम आर आई का प्रयोग वर्ष १९७७ में कैंस र की जांच में हुआ था ।

क्या है एम आर आई

मैग्ने टिक रेजोनेंस इमेजिंग (एम आर आई) मशीन बॉडी को स्कैन कर अंग के किस हिस्से में दिक्कत है, की जान कारी देती है । इसमें मैग्ने टिक फील्ड व रेडियो तरंगों का इस्ते माल किया जाता है जो शरीर के अंदर के अंगों की विस्ता र से इमेज तैयार करती हैं ।

क्या है तकनीक

शरीर में सबसे अधिक पानी होता है । पानी के हर मॉलिक्यूल में दो हाइ ड्रोजन प्रोटोन होते हैं । एम आर आई स्कैनिंग के दौरान पावर फुल मैग्ने टिक फील्ड बनता है । हाइड्रो जन के प्रोटोन मैग्ने टिक फील्ड से जुडक़र शरीर के अंगों की इमेज बनाने लगते हैं । जांच में करीब आधा घंटा लगता है ।

घबराएं नहीं रोगी

जांच के दौरान होने वाली आवाज से परेशान होने की जरूरत नहीं है । इससे न तो दर्द होता है और ना ही नुकसान। अगर आवाज बहुत तेज है तो टेक्नीशियन से कान में इयरप्लग लगवा सकते हैं ।

सीटी स्कैन से बेहतर एमआरआई

कम्प्यूटराइज्ड टोमोग्राफी (सीटी) स्कैन से एम आर आई बेहतर है। इसमें शरीर के अंग की अंदरूनी स्थिति की साफ तस्वीर मिलती है । इसमें रेडिएशन नहीं होता है । बच्चों और गर्भवती महिलाओं की भी यह जांच होती है ।


टैस्ट प्रिपरेशन

जांच के समय ज्वैलरी या मेटेलिक चीजें न पहनें । इससे इमेज की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है । पेसमे कर लगे मरीजों की यह जांच नहीं की जाती है ।

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