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बॉडी एंड सॉल

बचिए बहरेपन से

व्यक्ति की उम्र बढऩे के साथ-साथ उसके शरीर के विभिन्न अंगों की काम करने की क्षमता कम होने लगती है। इसके परिणामस्वरूप…

Sep 18, 2018 / 05:05 am

मुकेश शर्मा

Deafness

Deafness

व्यक्ति की उम्र बढऩे के साथ-साथ उसके शरीर के विभिन्न अंगों की काम करने की क्षमता कम होने लगती है। इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति अपने इन अंगों के प्रति उपेक्षित व्यवहार करने लगता है। इन उपेक्षित अंगो में से एक है कान। कान से संबंधित रोगों में बधिरता यानी सुनाई न देना वृद्धावस्था में काफी दुखदायी होता है। हमारे कान दो काम करते हैं। पहला, सुनने का और दूसरा, शरीर को संतुलित रखने का।

बहरेपन का इलाज

यदि सुनाई न देने की समस्या सामान्य से ज्यादा है तो वह पारिवारिक, सामाजिक और कार्यस्थल पर बाधक हो सकती है। एक बधिर व्यक्ति परिवार और समाज से धीरे-धीरे अलग हो जाता है व अवसाद का शिकार हो जाता है। इन्हें दूर करने का एक ही उपाय है कि बधिर व्यक्ति की सुनने की क्षमता का इलाज श्रवण यंत्र (हियरिंग एड) द्वारा किया जाए। ऐसे व्यक्ति जिनकी सुनने की क्षमता परीक्षण के दौरान 40 डेसिबल या उससे ज्यादा हो तो उन्हें श्रवण यंत्र (हियरिंग एड) की आवश्यकता महसूस होती है।

कॉक्लियर इंप्लान्ट

जिन मरीजों की सुनने की क्षमता 100 डेसिबल या उससे भी कम हो तथा हियरिंग एड से बिल्कुल सुनाई नहीं देता हो, उन्हें कॉक्लियर इंप्लान्ट लगाने की सलाह दी जाती है। कॉक्लियर इंपलान्ट एक विद्युत यंत्र है जिसे सर्जरी द्वारा कान के भीतर आरोपित कर दिया जाता है, जिससे विद्युत तरंगें (आवाज) कान की नस से होते हुए व्यक्ति के मस्तिष्क तक पहुंचती हंै।

बधिरता का परीक्षण

बधिरता का परीक्षण ट्यूनिंग फोर्क टेस्ट से किया जाता है, जिससे यह मालूम चलता है कि बधिरता संचालन संबंधी समस्या है या श्रवण तंत्रिका में कमजोरी है। यदि मिश्रित किस्म की बधिरता हो तो विश्वसनीय ट्यूनिंग फोर्क टेस्ट भी भ्रमित परिणाम दे सकते हैं। शत-प्रतिशत सुनने का सही परिणाम ऑडियोमेट्री जांच द्वारा ही संभव है। यह परीक्षण एक साउंड प्रूफ कमरे में किया जाता है।

इसमें 250-8000 डेसिबल तक की ध्वनि आवृत्ति से परीक्षण करते हंै। परीक्षण करने से पता चलता है कि किस भाग की सुनने की क्षमता कमजोर है। साथ ही यह भी पता किया जाता है कि किन कारणों से बहरेपन की समस्या हो रही है।

कान की सुरक्षा के लिए

लंबे समय व अत्यधिक मात्रा में दवा के सेवन से बचें ।
कान में संक्रमण, एलर्जी, संास संबंधी समस्या का इलाज करवाएं अन्यथा ये आपके कान को प्रभवित कर सकते हैं।

यदि आप ईयर प्लग नहीं पहन सकते तो लंबे समय तक ज्यादा तेज आवाजों से बचें। कान का मैल निकालने के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।


यदि आपके कान में दर्द हो, पानी निकल रहा हो, चक्कर, सिरदर्द या बुखार हो तो अपने डॉक्टर की सलाह लें।
अपने कान में रूई, सींक आदि कुछ भी न डालें।

सुनने की क्षमता बनी रहे

ज्यादा तेज आवाज में टेलीविजन और संगीत न सुनें।
अधिक शोरगुल वाले वातावरण में ईयर प्लग का प्रयोग करें।
अगर आप लम्बे समय तक ज्यादा तेज आवाज सुनते हैं तो आशंका है कि कान खराब हो जाएं। रोजाना होने वाला ध्वनि प्रदूषण कानों को नुकसान पहुंचा सकता है।

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