रोबोटिक स्पाइनल सर्जरी है कारगर

रोबोटिक स्पाइनल सर्जरी है कारगर

Mukesh Sharma | Publish: Jul, 11 2018 04:34:57 AM (IST) तन-मन

आजकल रीढ़ की हड्डी से जुड़ी बीमारियों से ग्रसित मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। जिसमें कमर और गर्दन में दर्द के मामले सबसे...

आजकल रीढ़ की हड्डी से जुड़ी बीमारियों से ग्रसित मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। जिसमें कमर और गर्दन में दर्द के मामले सबसे ज्यादा देखे जा रहे हैं। कुछ समय पहले इसे बढ़ती उम्र से जुड़ी समस्या मानते थे, लेकिन यह परेशानी आज युवाओं में ज्यादा देखी जा रही है।

खासतौर पर 24-28 साल के आयुवर्ग के बीच के लोगों में यह कॉमन है। साथ ही ऐसे लोग जिन्हें कभी रीढ़ की हड्डी से जुड़ी दुर्घटना हुई हो, उन्हें रोबोटिक स्पाइनल सर्जरी राहत पहुंचा सकती है।

अंतिम विकल्प सर्जरी

रीढ़ की हड्डी के रोग के उपचार के लिए कई मेडिकल प्रक्रियाओं का प्रयोग किया जाता है। जैसे फिजियोथैरेपी, दर्द निवारक दवाएं, इंजेक्शन आदि। कई मामलों में ये उपाय कारगर साबित नहीं होते। ऐसी में सर्जरी ही अंतिम विकल्प बचती है।

ओपन सर्जरी या पारंपरिक स्पाइन सर्जरी यूं तो मरीज की हालत में सुधार लाती है, पर इसमें कई जोखिम भी होते हैं। जैसे इंफेक्शन, दोबारा ऑपरेशन, गलत नब्ज दबने का डर, घाव भरने में देरी आदि। इन खतरों के चलते आजकल विशेषज्ञ रोबोटिक स्पाइनल सर्जरी की सलाह देते हंै।

कई बीमारियों में उपयोगी

रोबोटिक स्पाइनल सर्जरी जिसे कम्प्यूटर असिस्टेड स्पाइनल सर्जरी (सीएएसएस) भी कहते हंै, काफी प्रचलन में है। इसके चलते रीढ़ की हड्डी के विकार का इलाज हो रहा है। वे लोग जिनकी रीढ़ किसी दुर्घटनावश प्रभावित हुई हो या जिन्हें स्पाइनल ट्यूमर है, उनके इलाज में यह विधि असरदार है।

सर्वाइकल माइलोपैथी या स्पाइनल इंफेक्शन से पीडि़त लोगों के लिए भी रोबोटिक स्पाइनल सर्जरी सफल साबित होती है। रीढ़ की हड्डी की विकृति से जुड़ी बीमारी जैसे स्कोलियोसिस आदि के इलाज में भी यह उपयोगी है।

थ्री-डी तकनीक

इस सर्जरी को शुरू करने से पहले सर्जन रोबोटिक गाइडेंस सिस्टम की सहायता से मरीज की स्थिति को ध्यान में रखते हुए थ्री-डी तकनीक से ऑपरेशन करने की योजना बनाते हैं। सबसे खास बात होती है उन हिस्सों को अंकित करना जहां छोटे चीरे लगेंगे।

 

मिलते बेहतर नतीजे

 

रोबोटिक स्पाइनल सर्जरी के नतीजे पारंपरिक सर्जिकल तकनीक की तुलना में बेहतर होते हंै। स्पाइन जर्नल में प्रकाशित अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के मुताबिक इस सर्जरी से 98.3 प्रतिशत सटीक परिणाम मिलते हैं।

इसके अलावा सर्जरी से जुड़ी जटिलताएं जैसे दोबारा सर्जरी करने की आशंका, ब्लड लॉस, संक्रमण का खतरा आदि की आशंका कम हो जाती है। साथ ही मरीज दिनचर्या में जल्द वापस लौट सकता है।

स्पाइनल सर्जरी की विधि

कम्प्यूटर द्वारा संचालित ‘रोबोट द विन्सी सिस्टम’ की मदद से सर्जरी करते हैं। इसको विशेषज्ञ पास रखे कम्प्यूटर सिस्टम से पूरी तरह से कंट्रोल करते हंै। रोबोट के मशीनी हाथों को मरीज की रीढ़ के साथ जोड़ दिया जाता है। यह रोबोटिक आर्म लचीले होते हैं जो प्रभावित हिस्से तक आसानी से पहुंच जाते हैं। सर्जरी के दौरान मिनिमल इंवेसिव तकनीक के जरिए प्रभावित हिस्से पर काफी छोटा चीरा लगाते हैं।

 

इस दौरान रीढ़ की हड्डी में उभार व इसकी प्राकृतिक रचना को छेड़े बिना उपचार करते हैं। सर्जरी के बाद विशेषज्ञ के निर्देशानुसार रोबोट ही टांके लगाते हैं। यदि किसी प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है तो रोबोटिक आर्म की मदद ली जाती है।

Ad Block is Banned