प्रसव के बाद ऐसे करें स्ट्रेच मार्क्स से बचाव

स्ट्रेच मार्क्स गर्भावस्था के दौरान होने वाली आम समस्या है। इसमें त्वचा की निचली परत डर्मिस के अंदर का प्रोटीन कोलेजन...

By: मुकेश शर्मा

Published: 20 Jul 2018, 05:33 AM IST

स्ट्रेच मार्क्स गर्भावस्था के दौरान होने वाली आम समस्या है। इसमें त्वचा की निचली परत डर्मिस के अंदर का प्रोटीन कोलेजन व इलास्टीन टूट जाता है। इससे त्वचा में एक प्रकार का निशान बन जाता है।

क्या हो सकते हैं कारण

त्वचा पर इस प्रकार के निशान केवल खिंचाव से नहीं बल्कि वजन बढऩे और त्वचा के विकास से भी होते हैं। हमारे शरीर में मौजूद कार्टिसोन हार्मोन एडे्रनल गं्रथि से स्त्रावित होता है। अधिक मात्रा में इस हार्मोन के स्त्रावण से त्वचा का कसाव कम होने लगता है जिससे त्वचा ढीली पडऩे लगती है। साथ ही हार्मोन में गड़बड़ी से भी यह निशान उभरने लगते हैं। जिम में जरूरत से ज्यादा स्ट्रेचिंग से भी ऐसा होता है। गर्भावस्था के दौरान गर्भ के साथ पेट का आकार बढऩे से त्वचा उस अनुपात में तेजी से नहीं फैल पाती जिससे स्ट्रेच माक्र्स बनने लगते हैं।

शुरुआत में त्वचा के लाल पडऩे के साथ खुजली जैसे लक्षण सामने आएं तो इसे लीनिया रूब्रा कहते हैं। धीरे-धीरे जब इनका रंग फीका पडऩे लगे तो इस स्थिति को लीनिया अल्बा कहा जाता है। महिलाओं में पेट, ब्रेस्ट व जांघ जैसे भागों पर ऐसे निशान ज्यादा उभरते हैं। इसके अलावा पुरुषों को भी यह समस्या होती है।

स्टेरॉयड का प्रयोग भी कारण

कई विशेषज्ञों के अनुसार स्टेरॉयड्स वजन बढ़ाने का अहम कारक है। ऐसे में कई बार जांघों के ऊपरी हिस्से, कमर पर दाद व खुजली होने पर जब स्टेरॉयड, एंटीबायोटिक और एंटीफंगल क्रीम को लगाते हैं तो त्वचा में खिंचाव होने से स्ट्रेच माक्र्स बनते हैं। इनके रेगुलर प्रयोग से त्वचा की ऊपरी सतह पतली हो जाती है व कोलेजेन प्रोटीन कमजोर होने लगता है। दमा या गठिया के मरीज यदि स्टेरॉयड रोज लेते हैं, तो उनमें भी इस परेशानी की आशंका बढ़ जाती है।

क्या है इलाज

शुरुआती स्टेज यानी जिस समय त्वचा के लाल होने (लीनिया रूब्रा) में इलाज करने से ज्यादा लाभ होता है। यदि इसका रंग सफेद हो चुका हो यानी लीनिया अल्बा में बदल चुका हो, तो ठीक होने में समय लगता है।


द्द डर्मेटोलॉजिस्ट इस अवस्था में ट्रेटीनोइन क्रीम रात में और विटामिन-ई, सेरामाइड व एलोवेरा मिश्रित क्रीम को दिन में लगाने की सलाह देते हैं।


द्द अनेक प्रकार के लेजर ट्रीटमेंट (जैसे- पल्स्ड डाइ लेजर, एनडी वाइएजी लेजर, फे्रक्शनल सीओटू लेजर) को आईपीएल मशीन, रेडियो फ्रिक्वेंसी मशीन से स्ट्रेच माक्र्स हटाने में 50 फीसदी से ज्यादा कारगर माना गया है।


द्द कई मामलों में विशेषज्ञ मरीज की शारीरिक संचना और अवस्था के बाद टीसीए केमिकल लगाने के लिए देते हैं। इससे त्वचा ठीक होती है और नया कोलेजन बनने लगता है। यह स्ट्रेचमाक्र्स को कम तो करते हैं लेकिन कुछ मामलों में इन सबके बावजूद ये निशान पूरी तरह से नॉर्मल स्किन में नहीं बदल पाते।

ऐसे करें बचाव

* स्ट्रेच माक्र्स ना हों इसके लिए कुछ सावधानियां शुरू से ही अपनानी चाहिए-
* गर्भावस्था में त्वचा को हाइड्रेट रखें। इसके लिए त्वचा पर बार बार मॉइश्चराइजर जैसे- एलोवेरा, विटामिन-ई, लाइट लिपिड पैराफीन या ग्लिसरीन लगाना जरूरी है।
* इस अवस्था में पानी या अन्य तरल पदार्थ अधिक लेना चाहिए।
* विटामिन और प्रोटीन ज्यादा लें। इसके लिए ड्रायफू्रट या दूध आदि का लेना फायदेमंद होता है।
* नहाते समय स्क्रब करें।
* प्रारंभिक अवस्था में ही डॉक्टर से सलाह लें औऱ इसका इलाज शुरू कराएं।

मुकेश शर्मा Reporting
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