बॉलीवुड में शोक की लहर, लॉकडाउन के कारण एक्ट्रेस के अंतिम संस्कार में नहीं पहुंच सके स्टार्स

Pawan Kumar Rana
| Updated: 26 Mar 2020, 10:27 PM IST
बॉलीवुड में शोक की लहर, लॉकडाउन के कारण एक्ट्रेस के अंतिम संस्कार में नहीं पहुंच सके स्टार्स
बॉलीवुड में शोक की लहर, लॉकडाउन के कारण एक्ट्रेस के अंतिम संस्कार में नहीं पहुंच सके स्टार्स

एक्ट्रेस को बायकुला के रहमताबाद कब्रिस्तान में दफना दिया गया। इस मौके पर उनके कुछ करीबी परिजन मौजूद थे। बॉलीवुड के सितारे लॉकडाउन की वजह से उन्हें आखिरी विदाई देने नहीं पहुंच सके।

हिन्दी सिनेमा के शोमैन राज कपूर की पहली खोज के तौर पर मशहूर बीते जमाने की अभिनेत्री निम्मी का बुधवार शाम मुम्बई में देहांत हो गया। वे 88 साल की थीं। सांस लेने में तकलीफ होने पर उन्हें एक नर्सिंग होम में भर्ती किया गया था, जहां उन्होंने आखिरी सांस ली। आखिरी दिनों में उनकी याददाश्त भी काफी कमजोर हो गई थी। उनके देहांत से बॉलीवुड में शोक का माहौल है। 

बॉलीवुड में शोक की लहर, लॉकडाउन के कारण एक्ट्रेस के अंतिम संस्कार में नहीं पहुंच सके स्टार्स

कई सितारों ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्हें गुरुवार दोपहर बाद बायकुला के रहमताबाद कब्रिस्तान में दफना दिया गया। इसी कब्रिस्तान में उनके पति अली रजा को दफनाया गया था। इस मौके पर उनके कुछ करीबी परिजन मौजूद थे। बॉलीवुड के सितारे उन्हें आखिरी विदाई देने नहीं पहुंच सके, क्योंकि लॉकडाउन की वजह से भीड़ जमा नहीं की जा सकती थी।

बॉलीवुड में शोक की लहर, लॉकडाउन के कारण एक्ट्रेस के अंतिम संस्कार में नहीं पहुंच सके स्टार्स

राज कपूर ने दिया था नाम
आगरा में 18 फरवरी, 1933 को जन्मीं निम्मी का मूल नाम नवाब बानो था। निम्मी नाम राज कपूर ने दिया, जिनकी 'बरसात' (1949) से उनका कॅरियर शुरू हुआ। इस फिल्म की कामयाबी ने निम्मी के लिए प्रस्तावों के रास्ते खोल दिए। उन्होंने 50 और 60 के दशक में दिलीप कुमार, देव आनंद, भारत भूषण, किशोर कुमार, राजेन्द्र कुमार और धर्मेंद्र के साथ कई हिट फिल्मों में काम किया। लेखक अली रजा से शादी के बाद उन्होंने फिल्मों में काम करना बंद कर दिया था। तेरह साल पहले रजा के देहांत के बाद वे अकेली हो गईं। उनकी कोई संतान नहीं है।

अधूरी रह गई ख्वाहिश
कुछ साल पहले एक इंटरव्यू में निम्मी ने कहा था कि वह जिस तरह के किरदार करना चाहती थीं, फिल्मों में उन्हें मौके नहीं मिले। उनका कहना था- 'मेरी ख्वाहिश कुछ अलग तरह के किरदार करने की थी। 'बैजू बावरा' और 'कोहिनूर' जैसी फिल्में छोडऩे का मुझे कोई मलाल नहीं है। हां, 'मदर इंडियाÓ जैसे किरदार मिलते तो जरूर करती।'

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