Ajay Devgn पहली बार बनेंगे खलनायक, रावण के रंगों का आकर्षण

By: पवन राणा
| Published: 31 Aug 2020, 08:53 PM IST
Ajay Devgn पहली बार बनेंगे खलनायक, रावण के रंगों का आकर्षण
Ajay Devgn पहली बार बनेंगे खलनायक, रावण के रंगों का आकर्षण

रजनीकांत ( RajiniKant ) की '2.0' में अक्षय कुमार ( Akshay Kumar ) बतौर खलनायक खुद को आजमा चुके हैं। कन्नड़ के सितारे यश की नई फिल्म 'केजीएफ 2' ( KGF 2 ) में संजय दत्त ( Sanjay Dutt ) ने अधीरा नाम के खलनायक का किरदार अदा किया है। खबर है कि अजय देवगन ( Ajay Devgn ) भी पहली बार एक फिल्म में खलनायक बनने की तैयारी कर रहे हैं।

-दिनेश ठाकुर
मुम्बई में 1984 में हुए अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सव में यूरोपीय देश हंगरी की फिल्म 'द वल्चर' दिखाई गई थी। इसकी थीम यह थी कि प्रेम और हिंसा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। अमूमन शांत और संतुलित रहने वाला आदमी भी कभी-कभी हिंसक हो उठता है। फिल्म का नायक सिमोन सीधा-सादा टैक्सी ड्राइवर है। दो जेबकतरे उसकी जेब साफ कर भाग जाते हैं। पुलिस से शिकायत के बावजूद जेबकतरे नहीं पकड़े जाते। इन पेशेवर जेबकतरों पर कुछ सफेदपोश मुजरिमों का हाथ है। इन मुजरिमों को सबक सिखाने के लिए सिमोन इनमें से एक की बेटी का अपहरण कर फिरौती के तौर पर बड़ी रकम की मांग करता है। वह यह सब इतने शातिर ढंग से करता है कि मुजरिमों के साथ-साथ पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच जाता है। लेकिन अपनी इस कामयाबी पर सिमोन खुश नहीं है। उसकी अंतरात्मा उसे कचोटती है कि इस प्रक्रिया ने उसे भी मुजरिम बना दिया है।

कोई भी नेक इंसान मुजरिम नहीं बनना चाहता, लेकिन फिल्मों में मुजरिमों यानी खलनायकों का जिस भव्य तरीके से महिमामंडन किया जाता है, वह कई नायकों को भी आकर्षित करता रहा है। याद आता है कि जब रमेश सिप्पी 'शोले' ( Sholay Movie ) बनाने की तैयारी कर रहे थे तो पहले जय के किरदार के लिए शत्रुघ्न सिन्हा के नाम पर गौर किया गया था, क्योंकि तब वे अमिताभ बच्चन के मुकाबले बड़े सितारे हुआ करते थे। बाद में अमिताभ को साइन किया गया। उनकी जय के बदले गब्बर सिंह का किरदार निभाने में ज्यादा दिलचस्पी थी। 'शोले' में खलनायक बनने का मौका नहीं मिला तो कई साल बाद उन्होंने रामगोपाल वर्मा की 'आग' (यह 'शोले' की बचकाना पैरोडी थी) में बब्बन सिंह का किरदार अदा कर अपनी हसरत पूरी की। प्रति-नायक (एंटी हीरो) के किरदार करीब-करीब सभी बड़े अभिनेता अदा करते रहे हैं। जैसे 'गंगा-जमुना' में दिलीप कुमार, 'फूल और पत्थर' में धर्मेंद्र, 'दीवार' में अमिताभ बच्चन और 'खलनायक' में संजय दत्त। प्रति-नायक को हालात मुजरिम बनाते हैं, जबकि खलनायक जुर्म के हालात पैदा करता है।


इस हकीकत के बावजूद कि रावण की दुनिया चाहे जितनी रंगीन हो, जीत राम की ही होती है, हिन्दी सिनेमा के नायकों पर खलनायक बनने की धुन सवार है। रजनीकांत ( RajiniKant ) की '2.0' में अक्षय कुमार ( Akshay Kumar ) बतौर खलनायक खुद को आजमा चुके हैं। कन्नड़ के सितारे यश की नई फिल्म 'केजीएफ 2' ( KGF 2 ) में संजय दत्त ( Sanjay Dutt ) ने अधीरा नाम के खलनायक का किरदार अदा किया है। खबर है कि अजय देवगन ( Ajay Devgn ) भी पहली बार एक फिल्म में खलनायक बनने की तैयारी कर रहे हैं। इस तैयारी को उनकी 'सिंघम' के संवाद 'आता माझी सटकली' (मेरा दिमाग घूम गया है) से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। हिन्दी में एक कहावत है- 'घर का पूत कमाई करे, घर का करे या कचहरी करे।' यानी एक अकेला आदमी क्या-क्या कर सकता है? लेकिन अगर आदमी फिल्म अभिनेता है तो वह सब कुछ कर सकता है। चाहे नायक बना लो, प्रति-नायक या खलनायक।