नौ साल की उम्र में बनाई पहली धुन, ऐसे मिला पंचम दा नाम

By: Shaitan Prajapat
| Published: 03 Jan 2020, 08:01 PM IST
नौ साल की उम्र में बनाई पहली धुन, ऐसे मिला पंचम दा नाम
RD Burman

फिल्म जगत में पंचम दा के नाम से मशहूर बर्मन को यह नाम तब मिला जब उन्होंने अभिनेता अशोक कुमार को संगीत के पांच सुर सा.रे.गा.मा.पा गाकर सुनाए। नौ वर्ष की छोटी सी ...

बॉलीवुड में अपनी मधुर संगीत से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने वाले महान संगीतकार आर. डी. बर्मन भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन अपने गानों के जरिए वे लोगों के दिलों में आज भी जिंदा हैं। उनका गाना 'चुरा लिया है तुमने जो दिल को' अब भी काफी लोकप्रिय है। बर्मन का जन्म 27 जून, 1939 को कलकत्ता में हुआ था। उनके पिता एस. डी. बर्मन जाने—माने फिल्मी संगीतकार थे। घर में फिल्मी माहौल के कारण बर्मन का रूझान संगीत की ओर हुआ। आइए जानते हैं उनके बर्थडे पर जिंदगी से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें।

300 हिंदी फिल्मों में दिया संगीत
फिल्म जगत में पंचम दा के नाम से मशहूर बर्मन को यह नाम तब मिला जब उन्होंने अभिनेता अशोक कुमार को संगीत के पांच सुर सा.रे.गा.मा.पा गाकर सुनाए। नौ वर्ष की छोटी सी उम्र में पंचम दा ने अपनी पहली धुन 'ए मेरी टोपी पलट के आ' बनाई और बाद में उनके पिता सचिन देव बर्मन ने उसका इस्तेमाल वर्ष 1956 में प्रदर्शित फिल्म 'फंटूश' में किया। बर्मन ने अपने सिने कॅरियर की शुरुआत बतौर सहायक संगीतकार के रूप में की। लेकिन इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने से पहले उन्हें 10 साल तक संघर्ष करना पड़ा था। उन्होंने अपने चार दशकों से भी ज्यादा लंबे सिने कॅरियर में लगगभ 300 हिन्दी फिल्मों के लिए संगीत दिया। इसके अलावा अन्य भाषाओं की फिल्मों में भी म्यूजिक दिया।

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कॅरियर के हिट सॉन्ग और फिल्में
वर्ष 1961 में बतौर संगीतकार सिने कॅरियर शुरू करने वाले बर्मन ने फिल्म 'भूत बंगला' में गाना 'आओ ट्विस्ट करे','तीसरी मंजिल' में सॉन्ग 'आजा आजा मैं हू प्यार तेरा' और 'ओ हसीना जुलफों वाली', 'शोले' में 'महबूबा महबूबा' जैसी फिल्मों में कई हिट सॉन्ग दिए। इसके अलावा उन्होंने फिल्म 'छोटे नवाब', 'चलती का नाम गाड़ी','कागज के फूल', 'बंदिनी','तीन देवियां', 'गाइड', 'भूत बंगला', 'तीसरी मंजिल', 'सीता और गीता', 'मेरे जीवन साथी', 'बाम्बे टू गोवा', 'परिचय' 'शोले', 'आंधी', 'दीवार', 'खूशबू' और 'जवानी दीवानी' जैसी कई फिल्मों में म्यूजिक दिया।

RD Burman

संगीत में साथ निभाते बने जीवन साथी
संगीत के साथ प्रयोग करने में माहिर आर.डी.बर्मन पूरब और पश्चिम के संगीत का मिश्रण करके एक नई धुन तैयार करते थे। उनकी ऐसी धुनों को गाने के लिए उन्हें एक ऐसी आवाज की तलाश रहती थी जो उनके संगीत में रच बस जाए। यह आवाज उन्हें पाश्र्वगायिका आशा भोंसले में मिली। लंबी अवधि तक एक दूसरे का गीत संगीत में साथ निभाते-निभाते दोनों जीवन भर के लिए एक दूसरे के हो गए और अपने सुपरहिट गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करते रहे। लेकिन वर्ष 1994 में बर्मन इस दुनिया को अलविदा कह गए।