दिलीप और वहीदा का रहा हूं फैन: अमिताभ
Kamal Singh Rajpoot
Publish: Jan, 04 2016 08:16:00 (IST)
दिलीप और वहीदा का रहा हूं फैन: अमिताभ

देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रह चुके सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को अब उनके चाहने वाले जल्द ही फिल्म वजीर में अलग अंदाज देखने के लिए तैयार हैं।

रोहित तिवारी
मुंबई। देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रह चुके सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को अब उनके चाहने वाले जल्द ही फिल्म वजीर में अलग अंदाज देखने के लिए तैयार हैं। इसी सिलसिले में हुई एक मुलाकात में उन्होंने कई बातों पर विस्तार से चर्चा की, जिनके पेश हैं कुछ अंश-

पहले तो फिल्म की कहानी के बारे में कुछ बता दीजिए?
दो अलग-अलग व्यवसाय में दो व्यक्ति हैं। इसके अलावा इनके जीवन के कुछ ऐसी परिस्थितियां आ जाती हैं, जिनमें कुछ समानता है। इस तरह से दोनों की (फरहान अख्तर और अमिताभ बच्चन) दोस्ती कैसे होती है और जो भी समस्या है, उसका समाधान कैसे किया जाता है। बस, इसी से रिलेटेड कहानी है...।

अपने किरदार, बगैर पैर के कैसे संभव हो सका?
बस..., यह तो टेक्नोलॉली का कमाल है। हालांकि इसके लिए हमे काफी मेहनत करनी पड़ती है। जैसे, सीन होते समय जरा भी हिलना नहीं चाहिए...। फिर भी ट्रेनिंग के तौर पर हमारे पैर बांधे गए, ताकि फिल्म में जान आ सके।

अपने सह कलाकार फरहान अख्तर के बारे में आपकी क्या राय है?
वे दोनों ही जगह सफल हुए हैं। अभिनेता के अलावा उन्होंने निर्देशन में भी खुद को साबित करके दिखाया है, जैसाकि आप लोग देख ही रहे हैं...। यह बहुत ही अच्छी बात है।

अपने चर्चित टीवी शो के बारे में कुछ शेयर करना चाहेंगे?
वाकई में आज की रात है जिंदगी... में काफी कुछ अलग और अदभुत है। वाकई में हमारे देश में कई लोग ऐसे नेक काम कर रहे हैं, जिन्हें याद रखना चाहिए। वे बगैर किसी प्रोत्साहन के अपने व्यक्तिगत रूप से काम कर रहे हैं, जिसके बारे में किसी को जानकारी तक नहीं थी...। इस शो की कई एक कहानियां बहुत ही भावुक रहीं... उसी दरम्यान, एक सौरभ जी से मुलाकात हुई, जो मुंबई की लोकल ट्रेन में गिटार बजाकर, उससे आई हुई धनराशि से लोगों की मदद करते थे आदि कई कहानियां...। वह ट्रेन का सफर यादगार रहेगा...। एक आर्मी विधवा सुभासिनी वसंत की कहानी समेत कई बातें शेयर कीं...। वाकई में ऐसे लोगों को शो पर मंच दिया गया है, जिन्होंने हकीकत में कुछ अलग कर दिखाया है। मैं सभी का शुक्रगुजार हूं...।

आज के दौर की सोशल मीडिया की अहमियत के बारे में आप कुछ बताएंगे?
वाकई में... मैंने जो ब्लॉग शुरू किया था... उसमें आज प्रतिदिन 2 हजार 8 सौ 98 ब्लॉग पर मैं कमेंट करता हूं। फिर ट्विटर पर 2 हजार के करीब...। इसके बाद फेसबुक... टोटल आज हमें करीब 44 मिलियन लोग फॉलो करते हैं, वह भी ट्विटर, ब्लॉग, फेसबुक आदि के जरिए। इस तरह से आज सोशल मीडिया की अहमियत काफी बढ़ गई है। इसके अलावा यह भी सच है कि हम सभी को जवाब नहीं दे पाते, जिसका हमें भी खेद रहता है।

आपकी नजर में महानायक कौन हैं...?
दिलीप कुमार और वहीदा रहमान जैसे लोगों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। वाकई में वे इंडस्ट्री के अद्भुत रहे हैं और मैं इन सभी का फैन भी रहा हूं।

आगे की आपकी क्या योजना है?
निर्देशक सुजाय घोष की एक फिल्म है। फिर जनवरी में सुजीत सरकार निर्देशित फिल्म है, जो मार्च में खत्म हो रही है। इसके बाद मार्च के आखिर में आंखे 2 पर काम करना है। साथ ही की एंड का में भी मेरा एक गेस्ट रोल है। इसके अलावा 2016 के आखिर में एक और अन्य फिल्म है। इन सभी के बीच टेलीविजन के शो पर भी काम जारी रहेगा।

क्या वाकई में वजीर इमोशनल ड्रामा है?
जी हां, इमोशनल ड्रामा है वो...। साथ में उसमें थ्रिलर भी पेश किया गया है। लेकिन इमोशनल ही है। इसकी किसी फिल्म से तुलना करना उचित नहीं होगा, क्योंकि हर फिल्म की अपनी अलग कहानी होती है, इसलिए...। वजीर में भी कुछ अलग ही दिखाया गया है।

कैंसर पीडि़तों और महाराष्ट्र के सूखा ग्रस्त किसानों की मदद के लिए सिद्धिविनायक जैसे आगे आ रहे लोगों के बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?
इस दिशा में जितना भी काम किया जाए, सब सही है...। कुछ ऐसे भी लोग होते हैं, जो मदद तो करते हैं, लेकिन लोगों से अपने को छिपाकर रखते हैं। मैं अपना ही बताता हूं, (खुद का ही उदाहरण देते हुए...) तकरीबन 10 साल पहले जब मैं विशाखापटनम में शूटिंग कर रहा था तो वहां के अखबार में पढ़ा कि वहां के किसान अपना कर्जा 2, 3, से 5 हजार तक का कर्जा भी नहीं चुका पा रहे हैं। यह जानकार मुझे बुरा लगा।

इसलिए अपनी घर वापसी पर मैंने कुछ एनजीओ से बात की तो उन्हीं के माध्यम से मैंने खुद कुछ 50 किसान परिवार की रुपये देकर मदद की थी, जिसकी मैंने कभी किसी से कोई चर्चा भी नहीं की। इसके अलावा अभी करीब 3 साल पहले महाराष्ट्र के विदर्भ में भी 60 किसानों की मदद की, लेकिन इस बार हमने उन किसानों के बैंक से संपर्क किया और उन्हें ही धनराशि अदा की। ऐसा इसलिए किया, क्योंकि हमें पता चला था कि किसान कई बार इस तरह से मिली धनराशि का गलत उपयोग कर लेते हैं...।