scriptKangana do not consider yourself a role model and a special heroine | खुद को आदर्श और खास दर्जे की हीरोइन नहीं मानती : कंगना रनौत | Patrika News

खुद को आदर्श और खास दर्जे की हीरोइन नहीं मानती : कंगना रनौत

खुद को आदर्श और खास दर्जे की हीरोइन नहीं मानती : कंगना रनौत

 

Published: December 15, 2017 04:27:42 pm

मुंबई। अभिनेत्री कंगना रनौत खुद को रील और रियल लाइफ की आदर्श व खास श्रेणी की हीरोइन नहीं मानती हैं। वह अपना जीवन अपनी पसंद के मुताबिक जीती हैं, लेकिन मानती हैं कि 21वीं सदी में भी महिलाओं को अपनी आवाज उठाने में मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं।
Kangana_Ranaut
Kangana_Ranaut

कंगना से जब पूछा गया कि ऐसी कौन सी चीजे हैं, जो लड़कियां उनके जीवन से सीख सकती हैं, तो उन्होंने कहा, 'मैं हमेशा खुद को प्राथमिकता देती हूं। मैं उस सिद्धांत पर नहीं चलती, जिसमें कहा जाता है कि अच्छी लड़कियों को अपने बारे में नहीं सोचना चाहिए और वे सभी बलिदान देने के लिए हैं। मेरा जीवन मेरा है और इसे अपने लिए जीना चाहती हूं।'

उन्होंने कहा, 'मैं अपनी क्षमता का उपयोग करना चाहती हूं और खुद को जानना चाहती हूं। यह केवल मेरे भाई, बेटे, पति या मां के लिए नहीं है। मैं उन महानतम नायिकाओं की श्रेणी में शामिल नहीं हूं जो सबसे महान भारतीय महिला हैं और हर किसी को खुद से पहले रखती हैं और सबसे आखिर में खुद के बारे में सोचती हैं।'

कंगना अपने निजी व पेशेवर जीवन के संघर्ष पर बेबाकी से बात करती हैं। इनकी बेबाकी व बहादुरी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने बतौर फिल्म उद्योग का हिस्सा होकर फिल्म उद्योग में खास रसूख रखने वाले फिल्मकार करण जौहर को वंशवाद का ध्वजवाहक तक कह दिया था।

उनके लिए समाज की कड़वी सच्चाई का सामना करना कितना चुनौतीपूर्ण होता है? इस सवाल पर कंगना कहती हैं,'एक छोटे शहर से यहां आना निश्चित रूप से बहुत ही चुनौतीपूर्ण था, जो आकांक्षी महिलाओं, खासकर महत्वाकांक्षी महिलाओं के लिए बहुत सहिष्णु नहीं है। अगर आप महत्वाकांक्षी हैं तो आपको एक खलनायिका के रूप में देखा जाता है। अगर आप अपना खुद पैसा कमाना चाहती हैं या आप किसी पर निर्भर नहीं होना चाहती हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'जो महिलाएं अपनी पसंद से चलती हैं और जो अपने अधिकारों के लिए लड़ती हैं, उन्हें हमेशा विद्रोहियों के रूप में देखा जाता है।'

कंगना ने कहा, 'मैं खुद का आकलन अपनी सहजता व लड़ने की भावना से नहीं करती हूं।' वह मानती हैं कि 21वीं सदी में भी महिलाओं के लिए अपनी आवाज उठाने में मुश्किलें आती हैं। उन्होंने कहा, 'यह बहुत मुश्किल है। मध्यकालीन सामाजिक मानदंड कुछ लोगों के लिए बहुत ही सुविधाजनक हैं, इसलिए इससे महिलाओं और कुछ पुरुष भी परेशान होते हैं।'

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

Trending Stories

17 जनवरी 2023 तक 4 राशियों पर रहेगी 'शनि' की कृपा दृष्टि, जानें क्या मिलेगा लाभज्योतिष अनुसार घर में इस यंत्र को लगाने से व्यापार-नौकरी में जबरदस्त तरक्की मिलने की है मान्यतासूर्य-मंगल बैक-टू-बैक बदलेंगे राशि, जानें किन राशि वालों की होगी चांदी ही चांदीससुराल को स्वर्ग बनाकर रखती हैं इन 3 नाम वाली लड़कियां, मां लक्ष्मी का मानी जाती हैं रूपबंद हो गए 1, 2, 5 और 10 रुपए के सिक्के, लोग परेशान, अब क्या करें'दिलजले' के लिए अजय देवगन नहीं ये थे पहली पसंद, एक्टर ने दाढ़ी कटवाने की शर्त पर छोड़ी थी फिल्ममेष से मीन तक ये 4 राशियां होती हैं सबसे भाग्यशाली, जानें इनके बारे में खास बातेंरत्न ज्योतिष: इस लग्न या राशि के लोगों के लिए वरदान साबित होता है मोती रत्न, चमक उठती है किस्मत

बड़ी खबरें

ताजमहल के बंद 22 कमरों का खुल गया सीक्रेट, ASI ने फोटो जारी करते हुए बताई गंभीर बातेंकर्नाटक: हथियारों के साथ बजरंग दल कार्यकर्ताओं के ट्रेनिंग कैम्प की फोटोज वायरल, कांग्रेस ने उठाए सवालPM Modi Nepal Visit : नेपाल के बिना हमारे राम भी अधूरे हैं, नेपाल दौरे पर बोले पीएम मोदीमहबूबा मुफ्ती ने कहा इनको मस्जिद में ही मिलता है भगवानइलाहाबाद हाईकोर्ट: ज्ञानवापी में मिला बड़ा शिवलिंग, कोर्ट के आदेश पर स्थान सरंक्षित, 20 को होगी अगली सुनवाईIPL 2022 DC vs PBKS Live Updates : पावर प्ले में दिल्ली ने बनाए 3 विकेट के नुकसान पर 54 रनBJP कार्यकर्ता अभिजीत सरकार की हत्या के मामले में CBI ने TMC विधायक को किया तलब49 डिग्री के हाई तापमान से दिल्ली बेहाल, अब धूलभरी आंधी के आसार
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.