मेरे लिए बेस्ट एक्टिंग स्कूल रही 'माई नेम इज खान' : सिद्धार्थ मल्होत्रा
Jamil Ahmed Khan
| Updated: 04 Sep 2016, 09:34:00 PM (IST)
मेरे लिए बेस्ट एक्टिंग स्कूल रही 'माई नेम इज खान' : सिद्धार्थ मल्होत्रा
Siddharth Malhotra

बी-टाउन में अपनी अलग पहचान बनाने में काफी हद तक सफल रह चुके सिद्धार्थ मल्होत्रा का मानना है कि लाइफ में मिलने वाले हर मौके का पकड़ लेना चाहिए

बी-टाउन में अपनी अलग पहचान बनाने में काफी हद तक सफल रह चुके सिद्धार्थ मल्होत्रा का मानना है कि लाइफ में मिलने वाले हर मौके का पकड़ लेना चाहिए। साथ ही बचपन से एक चार्मिंग हीरोइन के साथ काम करने का सपना भी उनकी इस फिल्म से पूरा होने जा रहा है। जी हां, वे कैटरीना कैफ के साथ इस बार 'बार बार देखो' में प्यार करने दिखने वाले हैं। इस सिलसिले में हुई 'खास' मुलाकात में उन्होंने कई सारी बातें शेयर कीं-

'माई नेम इज खान' से अब तक की जर्नी को कैसे देखते हैं आप?
बहुत अच्छी और लंबी जर्नी रही है। मैं 22 साल ही उम्र में मुंबई आया था, अब 31 का हो गया हूं। इस दौरान फिल्मी स्कूल या फिल्मी बैकग्राउंड न होने के नाते कई तरह की परेशानियां भी हुईं। इस लिहाज से यहां आपको कोई कुछ बताया नहीं है, बल्कि इसके लिए आपको खुद ही सीखना पड़ता है। खास बात है कि पहले जो मुझे शूट सही से न कर पाने के कारण गाली देते थे, अब 'माई...' डीओपी रवि के चंद्रन आज मुझे शूट कर रहे हैं। अब मेरा अच्छा सर्किल बन गया है, जो मेरे करियर के लिहाज से अच्छा है। 'माई...' मेरे लिए बेस्ट एक्टिंग स्कूल रहा है, जहां छोटी से बड़ी चीजें सीखने का मौका मिला और उन्हें मैं आज भी इस्तेमाल कर रहा हूं।  

 क्या आपको लगता है कि लोगों पर 'काले चश्मे...' का जादू चलने वाला है?

'काले चश्मे...'लोगों को बहुत पसंद आया है। साथ ही उससे पहले भी फिल्म में जो कुछ भी दिखाया गया है, सब नया है। एक लव स्टोरी होने के साथ ही इसमें आज के यूथ से रिलेटेड कहानी है और उसे दिखाने का तरीका नया है। इसमें मेरा किरदार एक प्रोफेसर जय वर्मा का है और उसके एम्बिशन सारे काम से ही संबंधित हैं। इस लिहाज से आज दुनिया में कई लोग हैं, जो पैसे और सफलता ही तरफ ही ध्यान देते हैं, जबकि रिलेशनशिप के बारे में कोई नहीं सोचता। इस तरह से मैं प्यार को इगनोर करते हुए एक जर्नी पर जाता हूं, वहां पता चलता है कि छोटी-छोटी चीजें भी लाइफ में बहुत मायने रखती हैं। 'बार बार देखोÓ में दिखाया गया है कि अगर आपको लव स्टोरी के भविष्य का देखने का मौका मिले  और उसी में अगर आपको कुछ फिक्स करने का मौका हो तो तुरंत कर लेना चाहिए, क्योंकि मौका किसी को बार-बार नहीं मिलता है।

एक स्टार की पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को कितना अलग रहना चाहिए?
डिफ्रेंस रखना तो आपके ऊपर ही निर्भर करता है। अगर आपकी खानदानी फिल्मी बैकग्राउंड से आते हैं तो बहुत मुश्किल हो जाता है। मेरे जैसों के लिए थोड़ा आसान रहता है। वैसे ही दोनों ही चीजों को बैलेंस ही रखना चाहिए। फिल्म में भी यही दिखाया गया है कि आपके पास दौलत और शोहरत तो हैं, लेकिन साथ में कोई एंज्वॉय करने वाला नहीं है, फिर उसका का फायदा...। एक इंडस्ट्री का ही उदाहरण देखा जाए कि अक्षय कुमार साल में तीन फिल्म भी करते हैं और अपने परिवार को भरपूर समय भी देते हैं।

कैटरीना के साथ बिताए पलों को कैसे याद रखना चाहेंगे?
बहुत ही अच्छी तरह से याद रखूंगा। दरअसल, वे बहुत ही टैलेंटेड और जुझारू एक्ट्रेस हैं और वे आज भी अपने सीन, रिहर्सल सब कुछ वैसे ही लेती हैं, जैसे कोई न्यू कमर करता हो। उन्हें देखकर लगता है कि चाहें कोई जितना भी सक्सेज हो जाए, लेकिन इस फील्ड में 24 घंटे मेहनत की जरूरत होती है और उनकी इस लगन को मैं भी एप्रीशिएट करता हूं। एक लव स्टोरी के लिहाज से कंफर्ट फील करने के लिए एक-दूसरे को काफी जानने और समझने का मौका मिला। उनके साथ काम करके मेरे बचपन का सपना पूरा हो गया।

कुछ यादगार लम्हें शेयर करना चाहेंगे?
वैसे तो सब कुछ याद रहने वाला है। सबसे ज्यादा यादगार रहने वाला है, वह एक बड़ी एज में दिखने के लिए तैयार होने में करीब 4 घंटे लगते थे। अपनी ऐज से आगे आप के किस तरह दिखने वाले हैं, यह कर पाने के लिए हमारी यूके की टीम मा खोलियो ने बहुत अच्छा काम किया है। उस समय मेरी बॉडी लैंग्वेज बदल जाती है।

'बार बार देखो' के बाद क्या?
इसके बाद एक फिल्म की शूटिंग चल रही है, जिसका अभी टाइटल नहीं रखा गया है। उसमें मेरे साथ जैकलीन फर्नांडीस है और वह एक्शन फिल्म है। उसके बाद एक मर्डर मिस्ट्री पर आधारित यश चोपड़ा की फिल्म 'इत्तेफाक' है। वह राजेश खन्ना की फिल्म थी और शायद 1969 में आई थी, उसी का रीमेक है।

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