मनोरंजन के अंधेरे-उजाले, कश्मीर में 30 साल से बंद पड़े हैं Theatres

By: पवन राणा
| Published: 11 Feb 2021, 08:14 PM IST
मनोरंजन के अंधेरे-उजाले, कश्मीर में 30 साल से बंद पड़े हैं Theatres

  • घाटी में खंडहर हो चुके हैं कुछ सिनेमाघर, कुछ में चल रही हैं दुकानें
  • अर्से बाद बनी कश्मीरी फिल्म 'कश्मीर डेली' का भी कश्मीर में प्रदर्शन नहीं
  • श्रीनगर का ब्रॉडवे सिनेमाघर बदलेगा पांच मंजिला मल्टीप्लेक्स में

 

-दिनेश ठाकुर

मध्य युग के महाकवि अमीर खुसरो ने कश्मीर की खूबसूरती पर फारसी में लिखा था- 'गर फिरदौस बर-रू-ए-जमीं अस्त/ हमी अस्तो, हमीं अस्तो हमीं अस्त' (अगर धरती पर कहीं स्वर्ग है/ यही है, यहीं है, यहीं है)। आनंद बक्षी ने अमिताभ बच्चन की 'बेमिसाल' के गीत में इसी खूबसूरती का गुणगान किया- 'कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है/ मौसम बेमिसाल, बेनजीर है/ ये कश्मीर है, ये कश्मीर है।'

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आतंकवाद ने बिगाड़ा माहौल
तीस साल से कश्मीर में क्या चल रहा है, सभी जानते हैं। इस दौरान वहां दो पीढिय़ां जवान हो गईं। वे सिनेमाघरों में फिल्में देखने के अनुभव से वंचित हैं, क्योंकि घाटी के सभी सिनेमाघर 30 साल से बंद पड़े हैं। अस्सी के दशक के आखिर में, जब आतंकवाद ने घाटी की हरी-भरी वादियों में बारूद का धुआं उड़ाना शुरू किया था, सिनेमाघर सबसे पहले निशाने पर आए। अल्लाह टाइगर नाम के आतंकी संगठन ने फिल्म देखने को इस्लाम के खिलाफ बताते हुए सिनेमाघरों के शटर गिराने का फरमान जारी किया। जिनके शटर नहीं गिरे, उन सिनेमाघरों पर हमले हुए, कुछ में आग लगा दी गई। श्रीनगर, अनंतनाग, बारामूला, सोपोर, हंदवाड़ा और कूपवाड़ा में कभी 19 सिनेमाघर हुआ करते थे। इनमें से कुछ खंडहर हो चुके हैं, कुछ में दुकानें चल रही हैं। पैलेडियम सिनेमाघर कभी श्रीनगर की शान था। वह अब सीआरपीएफ की चौकी बना हुआ है।

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फिर चल पड़ा शूटिंग का सिलसिला
कश्मीर हिन्दी फिल्मों की पसंदीदा शूटिंग लोकेशन रहा है। हिंसा के कारण वहां फिल्मों की शूटिंग का सिलसिला कुछ साल ठप रहा। हालात सुधरने के बाद फिल्मों की शूटिंग फिर होने लगी हैं। पिछले दस साल के दौरान वहां फिल्माई गई फिल्मों में 'रॉकस्टार', 'जब तक है जान', 'हैदर', 'सात खून माफ', 'शिकारा', 'बजरंगी भाईजान', 'जॉली एलएलबी 2', 'राजी', 'कलंक', 'ट्यूबलाइट' आदि शामिल हैं। कश्मीरी इन फिल्मों को सिनेमाघरों में नहीं देख पाए। पिछले 30 साल में बनी पहली कश्मीरी फिल्म 'कश्मीर डेली' (2018) देश के कुछ शहरों के सिनेमाघरों में दिखाई गई। कश्मीर में इसका प्रदर्शन कब होगा, यह अपने आप में पहेली है।

1999 में खोले गए थे श्रीनगर के चार सिनेमाघर
फारूक अब्दुल्लाह जब मुख्यमंत्री थे, 1999 में श्रीनगर के चार सिनेमाघर दोबारा खोले गए थे। इनमें से एक सिनेमाघर में हुई फायरिंग के बाद इन्हें फिर बंद कर दिया गया। दो साल पहले श्रीनगर में एक मल्टीप्लेक्स की इजाजत दी गई थी। इससे पहले कि इसकी पहली ईंट रखी जाती, बिल्डर ने हाथ खींच लिए। अब खबर है कि श्रीनगर के ब्रॉडवे सिनेमाघर को, जिसमें आतंकियों ने आग लगा दी थी, पांच मंजिला मल्टीप्लेक्स में तब्दील किया जा रहा है। इसके खुलने के बाद घाटी के लोगों को 30 साल बाद थिएटर में फिल्म देखने का मौका मिलेगा।

4जी इंटरनेट का सहारा
कोरोना काल में देशभर के सिनेमाघर आठ-दस महीने बंद रहने से परेशान लोग कश्मीर की जनता की हालत का अंदाजा लगा सकते हैं। कश्मीर में 18 महीने बाद हाल ही 4जी इंटरनेट सेवाओं की बहाली कश्मीरियों के लिए बड़ी राहत है। इंटरनेट के जारिए ही वे मोबाइल, लैपटॉप पर फिल्में देखने का शौक पूरा करते हैं।