धर्मेन्द्र के छोटे भाई अजीत सिंह भी थे एक्टर, डेब्यू फिल्म ही हो गई थी बंद

By: Mahendra Yadav
| Published: 04 Jul 2018, 07:18 PM IST
धर्मेन्द्र के छोटे भाई अजीत सिंह भी थे एक्टर, डेब्यू फिल्म ही हो गई थी बंद
Dharmendra and Ajit deol

धर्मेन्द्र ने ही अपने छोटे भाई को एक्टिंग के गुर सिखाए थे।

अभिनेता अभय देओल के पिता और मशहूर अभिनेता धर्मेन्द्र के छोटे भाई अजीत सिंह देओल को भी एक्टिंग का शौक था। धर्मेन्द्र ने ही अपने छोटे भाई को एक्टिंग के गुर सिखाए थे। अजीत सिंह ने कुछ फिल्मों में एक्टिंग भी की है। उन्होंने हिंदी फिल्म के अलावा पंजाबी फिल्मों में भी काम किया।

स्क्रीन नेम था कुंवर अजीत:
धर्मेन्द्र के भाई का स्क्रीन नेम कुंवर अजीत था। उन्होंने कई चर्चि‍त फिल्मों में काम किया जैसे खोटे सिक्के, मेहरबानी, बरसात आदि। उन्होंने कई ऐसी फिल्मों में भी काम किया, जिनमें उन्हें क्रेडिट नहीं मिला।

ये फिल्में की डायरेक्ट:
अजीत ने दो फिल्में भी डायरेक्ट की थीं। इन फिल्मों के नाम हैं 'मेहरबानी'और 'संतो बंतो'। इसके अलावा उन्होंने कुछ फिल्में प्रोड्यूस भी की। इनमें 'वीरता','मेहरबानी', 'दिल्लगी', 'प्रतिज्ञा' जैसी फिल्में शामिल हैं।

चिलमन से करने वाले थे डेब्यू:
बता दें कि अजीत सिंह वर्ष 1965 में फिल्म 'चिलमन' से डेब्यू करने वाले थे लेकिन यह फिल्म बीच में ही बंद हो गई। इस फिल्म में उनके किरदार का नाम अभय था। बाद में उन्होंने अपने बेटे का नाम अभय रखा। उनकी एक और फिल्म 'जहां जागे वहां सवेरा' भी इसी तरह से बंद हो गई थी। इस फिल्म में वे लीड रोल में थे।

अजीत सिंह पर किताब:
अजीत सिंह पर एक किताब भी छप चुकी है। लेखक सरजीत सिंह संधू ने अजीत सिंह पर एक किताब लिखी थी। इस किताब का नाम 'जीते सीते दे जट जफे'है। यह किताब पंजाबी में है।

अभय नहीं करते धर्मेन्द्र,सनी और बॉबी के साथ फिल्में:
बता दें कि अजीत सिंह के बेटे अपने ताया धर्मेन्द्र और अपने भाईयों सनी देओल और बॉबी देओल के साथ फिल्में नहीं करते। पिछले दिनों अभय ने इसके पीछे की वजह का खुलासा करते हुए कहा था, ‘मुझे समझ नहीं आता है कि मैं अपने भाइयों (सनी-बॉबी) और ताया जी (धर्मेंद्र) के सामने कोई और इंसान कैसे बनूंगा? मेरे लिए उनके सामने एक्टिंग करना बेहद मुश्किल होगा। सोचिए अगर मुझे किसी सीन में ताया जी पर गुस्सा होना है तो मैं कैसे करूंगा? मुझमें इतनी हिम्मत ही नहीं है कि मैं उनसे गुस्सा हो सकूं।’

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