सर्कल ऑफ फेट : प्रीता वॉरियर

सर्कल ऑफ फेट : प्रीता वॉरियर
circle of fate

Divya Singhal | Publish: May, 12 2015 01:05:00 PM (IST) पुस्तकें

इसमें कैरेक्टर्स को बहुत अच्छी तरह बयां किया गया है और उनके बीच उठने वाले हर इमोशंस को दर्शाया गया है

जो बीत गया वो लौट कर नहीं आएगा, लेकिन उसकी यादें जख्मों को फिर से हरा कर जाती है। ये एक सर्कल की तरह चलता रहता है। जिंदगी के कड़े अनुभवों को बताती है प्रीता वॉरियर की "Circle of Fate"। प्रीता का यह बुक लिखने का अंदाज काफी अच्छा और डिफरेंट है। वहीं बुक की कहानी भी यूनिक है।

ये कहानी एक यंग गर्ल शीला की है, जो अपने पैरेंट्स के साथ अमरीका में रहती है। शीला की जिंदगी में उस वक्त भूचाल आ जाता है, जब एक कार एक्सीडेंट में उसके पैरेंट्स की मौत हो जाती है। इसके बाद उसके पास फैमिली के नाम पर केवल दादी रह जाती है, जो उससे बहुत दूर केरल में रहती है। इससे पहले शीला ने अपनी दादी से ना तो कभी बात की है और ना ही कभी मिली है।

किसी कारण के चलते उसके पिता ने दादी से सारे रिश्ते तोड़ दिए थे। जिसके बारे में शीला कुछ नहीं जानती है। अब शीला की दादी देवकी अपनी पोती के घर आने का इंतजार करती है। वहीं दादी को बीते हुए पलों को याद करके सिरहन होने लगती है, क्योंकि वे पल उसे अपनी पोती से हमेशा के लिए दूर कर सकते हैं।

इस बुक की सबसे खास बात इसका डिफरेंट सब्जेक्ट है। इसमें कैरेक्टर्स को बहुत ही अच्छी तरह बयां किया गया है और उनके बीच उठने वाले हर इमोशंस को दर्शाया गया है, चाहे वह प्यार हो या नफरत। अगर आप सामान्य नोवल पढ़कर ऊब चुके हैं तो "सर्कल ऑफ फेट" का सब्जेक्ट आपको नई ताजगी देगा। इस बुक को एक बार पढ़ना तो बनता ही है। मजबूत नरेशन और यूनिक स्टोरी इसकी यूएसपी है।
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