Video: शाहजहां-मुमताज की तरह की अमर हो गई इस आम आदमी की भी प्रेम कहानी, अखिलेश यादव ने की थी स्‍पेशल मुलाकात

बुलंदशहर डिबाई क्षेत्र के कसेरकलां गांव में रहने वाले फैजुल हसन कादरी ने बेगम की याद में बनवाया था मिनी ताजमहल

By: sharad asthana

Updated: 10 Nov 2018, 02:35 PM IST

बुलंदशहर। शाहजहां और मुमताज को कौन नहीं जानता। मुगल बादशाह शाहजहां ने बेगम मुमताज की याद में 17वीं सदी में ताजमहल का निर्माण कराया था। आज इसकी गिनती दुनिया के आठ अजूबों में होती है। लेकिन क्‍या आपने फैजुल हसन कादरी के बारे में सुना है। फैजुल हसन कादरी का नाम आज सभी अखबारों में सुर्खियां बन चुका है। इस आम आदमी की मोहब्‍बत के चर्चे पूरे देश में हो चुके हैं। गुरुवार रात को वह आम आदमी एक हादसे का शिकार हो गया, जिसमें उसकी मौत हो गई।

यह भी पढ़ें: जिस जेल में हुआ था मुन्‍ना बजरंगी का मर्डर, वहां के अंदर का ऐसा नजारा देखकर चौंक जाएंगे आप

बेगम की याद में बनवाया था मिनी ताजमहल

बुलंदशहर डिबाई क्षेत्र के कसेरकलां गांव में रहने वाले फैजुल हसन कादरी ने अपनी बेगम की याद में मिनी ताजमहल बनवाया था। फैजुल हसन कादरी ने इसके लिए अपनी जमीन बेच दी और जीवन भर की सारी जमा पूंजी लगा दी थी। वह कसेर गांव के रहने वाले थे। बताया जाता है क‍ि उनकी कोई औलाद नहीं थी। एक दिन फैजुल हसन कादरी की पत्नी तज्जमुली बेगम ने कहा कि उनकी कोई संतान नहीं है। उन्‍होंने ख्‍वाहिश जाहिर की कि एक ऐसी इमारत बनवानी चाहिए, जिसे देखकर मरने के बाद भी लोग उन्‍हें याद रखें। वर्ष 2011 में फैजुल हसन की बेगम की मौत हो गई। इसके बाद फैजुल हसन ने अपनी बेगम का सपना सच करने की ठानी।

यह भी पढ़ें: बड़ी खबर: NCR के इस जिले में 2 लाख रुपये में मिलेगा 2 कमरों का फ्लैट

खिड़की से करते थे ताजमहल का दीदार

फैजुल पेशे से पोस्ट मास्टर थे। रिटायरमेंट के बाद अपनी बेगम के साथ रहते थे। 86 साल के फैजुल हसन कादरी ने बेगम का यह सपना सच कर दिखाया था। फैजुल हसन ने फरवरी 2012 में अपने घर के खाली प्लाॅट पर ताजमहल का काम शुरू करवा दिया था। वे पहले कारीगरों को आगरा में ताजमहल घुमाकर भी लाए थे, ताकि वे डिजाइन को अच्छी तरह समझ सकें। उनके पास बचत और प्रोविडेंट फंड के रुपये थे। बाकी रकम का इंतजाम उन्होंने जमीन और बेगम के गहने बेच कर किया। कुल मिलाकर 11 लाख रुपए में 18 महीनो में एक ढांचा खड़ा हो गया था। धन के अभाव के कारण मिनी ताजमहल पर अभी पत्‍थर नहीं लग पाए हैं। इस पर उस समय तक करीब 11 लाख रुपये खर्च हुए थे। उन्‍होंने मिनी ताजमहल का निर्माण ऐसे कराया, जिससे जब भी उन्‍हें बेगम की याद आए वह अपने कमरे की खिडकी से ताजमहल का दीदार कर सकें।

यह भी पढ़ें: दारुल उलूम का नया फतवा, निकाह में इन रस्‍मों को बताया नाजायज

अखिलेश यादव ने की थी मदद

मिनी ताजमहल के चर्चे सुनने के बाद सूबे के तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने उनसे मुलाकात भी की थी। उन्‍होंने उन्‍हें लखनऊ बुलाया था। अखिलेश यादव ने उनकी आर्थिक मदद भी की थी। हालांकि, उससे कादरी ने पत्‍नी के नाम पर इंटर कॉलेज बनवा दिया था। इसके अलावा उन्‍होंने गांव में सड़क भी बनवा दी थी।

यह भी पढ़ें: महिला ने इस तरह दो बार रोकी ट्रेन, जीआरपी ने जब दिलाया भरोसा तो आगे जाने दी ट्रेन- देखें वीडियो

मिनी ताजमहल में बेगम के बराबर में दफनाया गया

गुरुवार की देर रात बाइक की टक्कर से फैजुल हसन कादरी के सिर और शरीर पर काफी चोटें आई थीं। फैजुल काे अलीगढ़ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां डॉक्टर उन्हें बचा नहीं पाए। शुक्रवार की शाम अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी। बताया जा रहा है कि उस मिनी ताजमहल में ही उनकी पत्‍नी को दफनाया गया था। कादिर को भी शनिवार को बेगम के बराबर में दफनाया गया है। उनकी भी प्रेम कहानी शाहजहां और मुमताज की तरह अमर हो गई।

Show More
sharad asthana
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned