सपा सरकार में हुआ था ये काम, अब योगी सरकार में लगे घोटाले के आरोप, मचा हड़कंप

बड़े गोलमाल के लग रहे आरोप

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Updated: 07 Jun 2018, 08:46 PM IST

बुलंदशहर। योगी राज में सपा सरकार में घोटालों की परत खुलती नजर आ रही है। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में जिला पंचायत ने करोड़ों रुपयों का कॉमर्शियल और रेजिडेंशियल मॉल सांठ-गांठ कर ऐसे ठेकेदार से बनवा दिया जो कि जिला पंचायत में रजिस्टर्ड ही नहीं था। जिला पंचायत आरटीआई में यह स्वीकार कर चुकी है कि ठेकेदार जिला पंचायत में पंजीकृत नहीं है, लेकिन अब अध्यक्ष का कहना है कि सब कुछ नियमानुसार हुआ था। लेकिन ठेकेदार के पंजीयन दस्तावेज की जांच हो जाए तो साफ हो जाएगा कि ठेकेदार और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष का फर्म में क्या हिस्सा था, क्यों ठेकदार को यह काम दिया गया और क्यों सब पर लीपा पोती की जा रही है।

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जिला पंचायत का यह बहुमंजिला मॉल शहर के बीचों-बीच पॉश एरिया काले आम के निकट स्थित है। वर्ष 2013 में इस मॉल के निर्माण के लिये विज्ञापन निकाला गया था। विज्ञापन में एक शर्त रखी गई थी। उसी के सहारे सारा खेल कर दिया गया। दरअसल इस विज्ञापन में यह शर्त रखी गई कि व्यवसायिक और आवासीय भवन निर्माण का कार्य करने वाले अनुभवी व दक्ष ठेकेदार इस कार्य के लिए आवेदन कर सकते हैं। बताया जाता है कि इस प्रकार का कोई ठेकेदार जिला पंचायत में पंजीकृत ही नहीं था। इसीलिए बाहरी जनपद से ठेकदारों को टेंडर के लिए आमंत्रित किया गया था और मॉल के निर्माण का ठेका दे दिया गया। इसीलिए बाहर की एक कंपनी को मॉल निर्माण का ठेका दिया गया।

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बताया जाता है कि इस ठेकेदार के संबंध उस समय जिला पंचायत के अधिकारियों से भी थे। जब इस मॉल का विज्ञापन निकाला गया तब भी विवाद गहराया, शिकायतें हुईं। लेकिन सब कुछ मिला जुला था। इसलिए मैनेज हो गया। लेकिन अब सत्ता बदली और यहां वर्षों से तैनात रहे अपर मुख्य अधिकारी का ट्रांसफर लखनऊ हुआ तब जाकर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरटीआई लगाई और मामले की जानकारी ली। तब जाकर जानकारी मिली कि सम्बन्धित ठेकेदार पंजीकृत ही नहीं था।

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जिला पंचायत अध्यक्ष के बयान से साफ़ है कि लीपा-पोती हो रही है, यदि सही जांच हो जाए कि मॉल का ठेका किस कंपनी को दिया गया। इस कंपनी में का डायरेक्टर कौन है। उस समय कौन डायरेक्टर था। जिला पंचायत का ठेकदार से क्या नाता था। कितने रुपयों में मॉल का निर्माण हुआ। कौन-कौन से हेड से इस मॉल में धन राशि खर्च की गयी। सरकारी योजनाओं का भी रुपया इस मॉल में क्यों लगाया गया।ये वह सवाल हैं, जो मॉल से जुड़े हैं और अभी तक अनसुलझे हैं, लेकिन इन सबका कोई जबाव देने को तैयार नहीं है।

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