10 करोड़ के कारोबार पर कोरोना की काली छाया

कोरोना वायरस के बाद किए लॉकडाउन ने बूंदी का पर्यटन उद्योग पूरी तरह ठप कर दिया। इस कारोबार से जुड़े दर्जनों लोग बेरोजगार हो गए।

By: pankaj joshi

Published: 24 May 2020, 07:34 PM IST

10 करोड़ के कारोबार पर कोरोना की काली छाया
- बूंदी का पर्यटन उद्योग ठप, 17 हजार से अधिक विदेशी पर्यटक आ रहे थे हर साल
- पर्यटक थमने से परकोटे के भीतर पेईंग गेस्ट हाउस में सन्नाटा
- 500 से अधिक लोगों का कारोबार छिना
नागेश शर्मा
बूंदी. कोरोना वायरस के बाद किए लॉकडाउन ने बूंदी का पर्यटन उद्योग पूरी तरह ठप कर दिया। इस कारोबार से जुड़े दर्जनों लोग बेरोजगार हो गए। परकोटे के भीतरी शहर की तो मानों रौनक ही गायब हो गई। पेईंग गेस्ट हाउस और होटलों में छाया सन्नाटा टूटने का नाम नहीं ले रहा।
देशी और विदेशी पर्यटकों ने आने वाले सीजन और गर्मी की छुट्टियों के लिए जो एडवांस बुकिंग करा रखी थी, वह भी निरस्त हो गई। ऐसे में अब कारोबार से जुड़े लोगों ने बताया कि दिसम्बर माह के अंत तक इसके पटरी पर लौटने की उम्मीदें नहीं दिख रही। अभी जिले में 16 हजार से अधिक विदेशी और 60 हजार से अधिक देशी पर्यटक बूंदी के दर्शनीय स्थलों का अवलोकन करने के लिए आ रहे थे। यानी बूंदी शहर में आय का सबसे बड़ा उद्योग पर्यटन को कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। इस कारोबार से पांच सौ से अधिक लोगों का सीधा जुड़ाव है। अब लॉकडाउन को साठ दिन पूरे हो गए, ऐसे में इस उद्योग से जुड़े लोगों को भी पर्यटकों को भ्रमण को लेकर सरकारी एडवायजरी जारी होने का इंतजार है।
पांच सौ पर्यटक भी नहीं आए इस साल
बूंदी भ्रमण पर वर्ष 2018 में 16 हजार 534 विदेशी पर्यटक आएथे जो वर्ष 2019 में 14 हजार 210 रहे। इस साल कोरोना संकट के चलते यह आंकड़ा अब तक पांच सौ तक भी नहीं पहुंचा।ऐसे में इस उद्योग के लिए सरकार विशेष पैकेज
जारी करें।
30 गाइड, 25 पेईंग गेस्ट हाउस
बूंदी में 30 से अधिक गाइड पर्यटकों को दर्शनीय स्थलों का भ्रमण करा रहे थे। इसी प्रकार परकोटे के भीतरी बूंदी शहर में 25 पेईंग गेस्ट हाउस संचालित हो रहे जिनमें देशी-विदेशी पर्यटक रुक रहे थे। इसी से इन गेस्ट हाउस का खर्चा निकल रहा था। जब से लॉकडाउन शुरू हुआ पेईंग गेस्ट हाउस में सन्नाटा दौड़ गया। कई पेईंग गेस्ट हाउस संचालकों ने कर्मचारियों की संख्या कम कर दी।
अभी सिर्फ सन्नाटा
बूंदी की 84 खंभों की छतरी हों या फिर तारागढ़ महल, चहुंओर सन्नाटा दिखाई पड़ रहा है। इन सभी पर्यटन स्थलों पर लॉकडाउन की शुरुआत में ताले लगा दिए थे। पर्यटकों का प्रवेश रोक दिया था। इसके बाद से ही अब इन स्थानों पर चौकीदार के सिवाए कोई नहीं आता। निजी क्षेत्र के पर्यटन स्थलों पर तो चौकीदार भी नहीं जा रहे।
सरकार की गाइड लाइन पर ही पर्यटन उद्योग पटरी पर आएगा। अभी पर्यटन स्थल नहीं खोले जा रहे।
विवेक जोशी, पर्यटन अधिकारी, बूंदी
बूंदी में पहले ही संकट था। अब दिसम्बर तक पर्यटन उद्योग पूरी तरह ठप हो गया।एडवांस बुकिंग निरस्त हो गई।सरकार इस ओर सोचें।
अभिजीत उपाध्याय, संचार मंत्री, होटल एंड पेईंग गेस्ट हाउस एसोसिएशन
अग्रिम बुकिंग निरस्त हो गई। कर्मचारियों का खर्चा निकालना मुश्किल हो गया। ऐसे समय में सरकार को पर्यटन व्यवसाय के लिए आर्थिक पैकेज जारी करना चाहिए। जो संकट का समय आया, यह छंटेगा भी।
जे.पी. शर्मा, गढ़ पैलेस संचालक

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