साढ़े 34 फीट भराव, दो सौ किमी लंबी नहरें, स्टाफ कम

बूंदी जिले के सबसे बड़े गुढ़ा बांध की भराव क्षमता साढ़े 34 फीट व करीब 200 किलोमीटर लंबी नहरों की देख रहे के लिए मात्र 4 मेटों से ही काम चलाना पड़ रहा है। जबकि दो दशक पूर्व यहां पर 100 से अधिक बेलदार कार्यरत थे।

By: pankaj joshi

Updated: 04 Oct 2021, 06:11 PM IST

साढ़े 34 फीट भराव, दो सौ किमी लंबी नहरें, स्टाफ कम
1 क्षेत्र की 11 हजार हैक्टेयर से अधिक भूमि होती है सिंचित
चार मेटों के भरोसे
हिण्डोली. बूंदी जिले के सबसे बड़े गुढ़ा बांध की भराव क्षमता साढ़े 34 फीट व करीब 200 किलोमीटर लंबी नहरों की देख रहे के लिए मात्र 4 मेटों से ही काम चलाना पड़ रहा है। जबकि दो दशक पूर्व यहां पर 100 से अधिक बेलदार कार्यरत थे।
जानकारी के अनुसार गुढ़ा बांध में वर्ष निब्बे व दो हजार के दशक में यहां पर 100 से अधिक बेलदार बांध व नहरों के रखरखाव व सुरक्षा का कार्य देखते थे, लेकिन धीरे-धीरे उनकी सेवानिवृत्त होने पर नई भर्ती नहीं होने से हालात विकट हो गए हैं। वर्तमान में बांध व नहरों की देखरेख के लिए मात्र 4 मेट कार्यरत हैं। वह भी कई बार कार्यालय व अन्य काम में व्यस्त होने के कारण यहां पर दो-तीन के भरोसे ही रहना पड़ता है। वर्तमान में चारों मेट बांध के गेट और पाल की सुरक्षा में लगे हुए हैं।
जल संसाधन विभाग की मानें तो सरकार द्वारा मेटों की नई भर्ती नहीं निकालने से यह समस्या विकट हो गई है। बांध की नहरें काफी लंबी होने से यहां पर 5 दर्जन से अधिक मेटों की जरूरत पड़ती है। कई माइनर धोरे अलग-अलग गांवों में होने के कारण वहां पर दो चार लोगों से काम नहीं चलता है। जिस समय नहरों में जल प्रवाह किया जाता है। क्षेत्र की 11 हजार हैक्टेयर भूमि सिंचित होती है। उस दौरान देखरेख की जरूरत होती है। कई बार नहर टूटने और फ्लो होने पर मेटों की काफी आवश्यकता पड़ती हैं, लेकिन उनकी कमी के चलते अन्य लोगों से मदद ली जाती है, लेकिन स्टाफ नहीं होने से उनसे ही काम चला रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि एक समय बांध के नहरों की विजिट करने के लिए जयपुर से उच्चाधिकारी आते थे, लेकिन समय के साथ अब यहां पर सहायक अभियंता व अधिशासी अभियंता ही उनके स्तर पर का निरीक्षण
करते हैं।
गुढ़ा बांध में मेटों की कमी होने के चलते नहरों की सुरक्षा व देखरेख में परेशानी होती है। यहां पर मेट लगाने के लिए उच्च अधिकारियों को प्रस्ताव भिजवा रखे हैं।
बीएल मीणा, कनिष्ठ अभियंता जल संसाधन विभाग गुढ़ा बांध।

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