खुले आसमान में चल रहे विद्यालय के लिए मिली भूमि, भवन निर्माण का खुला रास्ता

उपखंड की माणी ग्राम पंचायत के श्रीपुरा गांव निवासी 65 वर्षीय केसरसिंह राजपूत ने अपने गांव के नौनिहालों की पढ़ाई के लिए भवन रहित प्राथमिक विद्यालय के लिए भवन निर्माण के लिए अपने खाते की भूमि विद्यालय प्रबंधन समिति को दान कर दी।

By: Narendra Agarwal

Published: 13 Jul 2020, 12:28 PM IST

नैनवां. उपखंड की माणी ग्राम पंचायत के श्रीपुरा गांव निवासी 65 वर्षीय केसरसिंह राजपूत ने अपने गांव के नौनिहालों की पढ़ाई के लिए भवन रहित प्राथमिक विद्यालय के लिए भवन निर्माण के लिए अपने खाते की भूमि विद्यालय प्रबंधन समिति को दान कर दी। केसरसिंह ने भूमि को विद्यालय के नाम किए दन पत्र की उप पंजीयक अधिकारी से रजिस्ट्री करवाकर विद्यालय के सुपुर्द कर दी। गांव में पहले का विद्यालय भवन क्षतिग्रस्त होने से नौनिहालों के लिए खतरा मानते हुए एक वर्ष पहले प्रशासन ने ध्वस्त करा दिया था। भवन ध्वस्त होने के बाद से ही गांव में विद्यालय भवन का अभाव हो गया था। सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता ने 14 मार्च 2019 को पहले के क्षतिग्रस्त भवन को जर्जर बताकर विद्यालय के उपयोग पर रोक लगा दी थी। 24 जुलाई 2019 की रात को हुई तेज बरसात मेेंं विद्यालय का आधा हिस्सा गिर जाने के बाद अधिशासी अभियंता की रिपोर्ट पर मुख्य जिला शिक्षाधिकारी के आदेश पर विद्यालय प्रबंधन समिति ने 19 सितम्बर 2019 को भवन को जमींदोज कर शिक्षा विभाग को सूचित कर दिया था। भूमि उपलब्ध हो जाने से अब आसमान के नीचे पढ़ रहे नौनिहालों को बैठाने के लिए भवन निर्माण के लिए बजट स्वीकृत होने का इंतजार है।

अब विभाग से बजट का इंतजार
गांव में कोई ऐसा सामुदायिक भवन, मन्दिर या धर्मशाला नही है। जिसमें बच्चों को बैठाया जा सके। जिससे विद्यालय आसमान के नीचे खुले में ही चल रहा है। पुराना भवन जिस भूमि पर बना हुआ था, वह भूमि भी दानदाता केसरसिंह के खातें की भूमि थी। गांव में विद्यालय भूमि उपलब्ध नहीं हो पाने से नये भवन के लिए राशि का आवंटन नहीं हो पा रहा था। विद्यालय प्रबंधन समिति, अध्यापकों व ग्रामवासियों के आग्रह पर गांव के नौनिहालों व विद्यालय हित में भवन निर्माण के लिए भूमिदान कर 17 जून को करवर नायब तहसील कार्यालय में उपपंजीयक से दान की 11 बिस्वा भूमि की विद्यालय के नाम रजिस्ट्री करवा दी। भूमि उपलब्ध हो जाने से अब आसमान के नीचे पढ़ रहे नौहिालों को बैठाने के लिए भवन निर्माण के लिए बजट स्वीकृत होने का इंतजार है।

बड़ी खुशी महसूस कर रहा
भूमि दान करने वाले केसरसिंह राजपूत का कहना है कि गांव में चालीस वर्ष से उनकी भूमि पर ही विद्यालय चल रहा था। पुराना भवन ढह जाने से गांव के नौनिहालों को खुले आसमान के नीचे पढ़ाई करनी पड़ रही थी। अपनी भूमि पर शिक्षा मन्दिर बनाने का अध्यापकों व ग्रामीणों की ओर से प्रस्ताव आया तो सहर्ष स्वीकार करके अपनी 11 बिस्वा भूमि को दान करके मुझे बहुत खुशी मिली। अब गांव का कोई बच्चा बिना पढ़े नहीं रहेगा।

प्रधानाध्यापक का कहना
विद्यालय के प्रधानाध्यापक गजेन्द्र वर्मा ने बताया कि विद्यालय में वर्तमान में 66 बच्चों का नामांकन है। भवन के अभाव में विद्यालय खुले आसमान के नीचे ही चल रहा है। भवन निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध हो जाने से नये भवन के निर्माण का रास्ता खुल गया है। भूमि उपलब्ध होते ही विभाग के उच्चाधिकारियों को भवन निर्माण के लिए बजट उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भेज दिया है। अब विद्यालय भवन निर्माण के लिए बजट का इंतजार है।

Narendra Agarwal Desk
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