8-10 साल पुरानी है एंबुलेंसों के भरोसे गंभीर रोगियों की सांसे

कस्बे के राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रोगियों को गंभीर स्थिति में बाहर ले जाने के रोगी वाहन बूढ़े हो चले हैं और इन्हीं पर गंभीर स्थिति में रोगियों का जीवन बचाने का भार भी है।

By: Narendra Agarwal

Published: 20 May 2021, 06:46 PM IST

लाखेरी. कस्बे के राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रोगियों को गंभीर स्थिति में बाहर ले जाने के रोगी वाहन बूढ़े हो चले हैं और इन्हीं पर गंभीर स्थिति में रोगियों का जीवन बचाने का भार भी है। जानकारी के अनुसार उपखण्ड मुख्यालय पर स्थित सामुदायिक स्वास्थय केंद्र में घटना दुर्घटनाओं के अलावा महिने में 30-40 रोगी बड़े अस्पतालों को रैफर किए जाते हैं। कोरोना काल में तो यह स्थिति और बढ़ गई है। अस्पताल में उपलब्ध एंबुलेंस बूढ़ी हो चुकी है। 108 श्रेणी की आकस्मिक दुर्घटनाओं व बेस एंबुलेंस जो करीब 10 वर्ष पुरानी है। जननी सुरक्षा के तहत प्रसूताओं को लाने ले जाने वाली 104 एंबुलेंस 8 वर्ष पुरानी है और मेडिकल रिलीफ सोसायटी द्वारा खरीदी गई एंबुलेंस को भी 9-10 वर्ष हो गए हैं। रिलीफ सोसायटी के अलावा सभी एंबुलेसों की स्थिति जर्जर है। टायर भी घिस गए हैं। इस संबंध मेंं चिकित्सा प्रभारी डॉ. मांगीलाल मीणा ने बताया कि दो 108 एंबुलेंस में दो ही चालक है। जिससे यदा कदा अव्यवस्था हो सकती है। फिर भी व्यवस्था ठीक चल रही है।

रोगी रहते हैं परेशान
आरोप है कि इन एंबुलेंस पर कार्यरत चालक समय पर रोगी तक नहीं पहुंचते है। अस्पताल में ही एंबुलेंस ले जाने के लिए रोगियों को 3-4 घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। अधिकारियों को जानकारी होने के बाद भी कार्रवाई नहीं होती।

इनको हुई परेशानी
बड़ाखेड़ा निवासी महावीर शर्मा की तबीयत सोमवार रात खराब हुई। मंगलवार सुबह परिजन राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लाए। उन्हें चिकित्सकों ने कोटा रैफर कर दिया। परिजन 3 घंटे तक एंबुलेंस के लिए मशक्कत करते रहे। एंबुलेंस चालकों से बात की तो चालकों ने 2 घंटे बाद चलने को कहा। रोगी कोटा पहुंचा वहां उसे आईसीयू में बेड नहीं मिला और शाम होते होते उसने कोटा में दम तोड़ दिया।
केशवपुरा निवासी मोहनलाल के परिजन रोगी को मंगलवार अलसुबह 4 बजे अस्पताल लाए। चिकित्सकों ने उन्हें 6.30 बजे कोटा रैफर कर दिया। परिजन रोगी को कोटा ले जाने के लिए एंबुलेंस के लिए परेशान होते रहे। उपखण्ड अधिकारी के दखल के बाद करीब 7.30 बजे चालक पहुंचे, तब तक मरीज का दम टूट गया।
एक सप्ताह पूर्व सार्वजनिक निर्माण विभाग के सेवानिवृत कर्मचारी की तबीयत बिगडऩे पर अस्पताल से रोगी को रैफर कराया। परिजन 3 घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार करते

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