तीन चौथाई आंगनबाड़ी केन्द्रों के पास नहीं अपना आंगन

नैनवां उपखंड में संचालित तीन चौथाई से अधिक आंगनबाड़ी केन्द्रों के पास वर्षों से अपना भवन नहीं है। अपना भवन नहीं होने से केन्द्र किराए के कमरों व अन्य भवनों में चल रहे हैं।

By: Narendra Agarwal

Published: 02 Jul 2020, 06:59 PM IST

नैनवां. नैनवां उपखंड में संचालित तीन चौथाई से अधिक आंगनबाड़ी केन्द्रों के पास वर्षों से अपना भवन नहीं है। अपना भवन नहीं होने से केन्द्र किराए के कमरों व अन्य भवनों में चल रहे हैं। जिनके पास अपना भवन है उनमें से आधेे भवन मरम्मत मांग रहे हंै। किराये के व अन्य सरकारी भवनों में भी एक-एक कमरों में चल रहे आंगनबाड़ी केन्द्रों पर कैसे खेले-कूदे नौनिहाल। न खेलने को मैदान न बैठने के लिए पर्याप्त जगह। दस-गुणा दस फीट आकार के कमरों में आंगनबाड़ी कर्मचारी सामान रखे या नौनिहालों को बैठाए। उसी कमरे में पोषाहार पकाना पड़ रहा है तो गर्भदात्री व किशोरियों के लिए आने वाले पोषाहार को भी उसमें ही रखना पड़ रहा। उपखंड में ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में 249 केन्द्र संचालित है। इनमें से 58 केन्द्रों के पास ही अपना भवन है। इनमें से भी 25 भवनों को मरम्मत की दरकार है। ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में 31 केन्द्र किराये के कमरों में चल रहे है। जिनमें 17 ग्रामीण व आठ नैनवां शहरी क्षेत्र में है। ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में 137 केन्द्र की विद्यालयों में तो 23 केन्द्र अन्य सरकारी भवनों में वैकिल्प व्यवस्था कर रखी है।

यह केन्द्र चल रहे किराये के कमरों में
आंगनबाड़ी केन्द्र करवर प्रथम, करवर द्वितीय, खजूरी पचंायत के फटूकड़ा, सहण के मीणों का झोपड़ा, करवर में अरियाली, देई में केन्द्र संख्या सात, कालबेलिया बस्ती, मीणों का झोपड़ा, गुढासदवार्तिया, फूलेता पंचायत में दलेलपुरा, बागेड़ा, नाथड़ी, पीपल्या का केन्द्र संख्या दो, भजनेरी का केन्द्र संख्या तीन च सरसों बणजारो का झोपड़ा, खानपुरा में चेनपुरिया व खानपुरा प्रथम किराये के कमरों में चल रहे है। नैनवां शहरी क्षेत्र में टोडापोल द्वितीय व तृतीय, देईपोल, सुभाष कॉलोनी, भवानीनगर, कालबेलिया बस्ती, प्रतापनगर तथा विवेकानन्द कॉलोनी के केन्द्र भी किराये के कमरों में सचांलित हो
रहे है।

निशुल्क भूखंड मिलने पर ही स्वीकृत होती है राशि
महिला व बाल विकास विभाग के सूत्रों के अनुसार आंगनबाड़ी भवन के निर्माण के लिए नियम है कि पहले 40 गुणा 60 फीट का भूखंड निशुल्क मिले। उसके बाद ही भवन का निर्माण कराया जा सकता है। गांवों में तो जगह उपलब्ध हो जाती है तथा ग्राम पंचायतों को निशुल्क भूखंड देने का अधिकार होता है जबकि नगरपालिका क्षेत्र में निशुल्क भूखंड नहीं दिया जा सकता। निशुल्क भूखण्ड मिलने पर ही आंगनबाड़ी भवन निर्माण के लिए राशि स्वीकृत करता है। गांवों में संचालित 51 विद्यालयों ने अपने परिसर में आंगनबाड़ी भवन बनाने के लिए एनओसी जारी कर रखी है, लेकिन उनके लिए भी भवन निर्माण की राशि स्वीकृत नही हो पाई।

सूचना भेज रखी
महिला एवं बाल विकास विभाग नैनवां के लेखाकार आशाराम नागर का कहना है कि भवन विहीन आंगनबाड़ी केन्द्रों व मरम्मत मांग रहे भवनों की सूचना विभाग के उपनिदेशक को भेज रखी है।

Narendra Agarwal Desk
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