भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम बिना शिवलिंग लिए लौटी, ग्रामीणों और संस्थाओं ने किया विरोध

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम शुक्रवार को गुप्तकाल के शिवलिंग को ले जाने के लिए भीमलत के जंगलों में पहुंची, जिसे लोगों के विरोध के बाद बिना शिवलिंग को लिए लौटना पड़ा। यहां लोगों का तर्क था कि इस ऐतिहासिक शिवलिंग को इसी स्थान पर स्थापित रखकर सुरक्षित किया जाना चाहिए।

pankaj joshi

February, 1501:10 PM

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम बिना शिवलिंग लिए लौटी, ग्रामीणों और संस्थाओं ने किया विरोध
- भीमलत के जंगलों में एकमुखी शिवलिंग का मामला
- मूल स्थान पर विकसित करने की उठी मांग
बूंदी. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम शुक्रवार को गुप्तकाल के शिवलिंग को ले जाने के लिए भीमलत के जंगलों में पहुंची, जिसे लोगों के विरोध के बाद बिना शिवलिंग को लिए लौटना पड़ा। यहां लोगों का तर्क था कि इस ऐतिहासिक शिवलिंग को इसी स्थान पर स्थापित रखकर सुरक्षित किया जाना चाहिए। इस दौरान टीम को अलग-अलग संस्थाओं ने विरोध पत्र सौंपे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम सुबह बूंदी पहुंची थी। बाद में वह भीमलत महादेव के समीप स्थापित गुप्तकाल (5वीं सदी) के एक मुखी शिवलिंग को देखने पहुंची।टीम ने यहां शिवालय का जायजा लिया जो अब खंडित हो चुका। शिवलिंग दो हिस्सों में बंटा मिला। टीम इसे अपने साथ दिल्ली ले जाना चाहती थी, जिसे मौके पर मौजूद सेव अवर हेरिटेज, इंटेक और आस-पास के ग्रामीणों ने विरोध कर दिया। इन संस्थाओं के लोगों का कहना था कि इसे इसी स्थान पर स्थापित रखा जाना चाहिए। भारतीय पुरातत्व विभाग इस स्थान को विकसित करें, ताकि यहां पर पर्यटन की संभावनाओं को और अधिक मजबूती मिले। तब टीम ने सभी की बात को दिल्ली मुख्यालय पर रखने का भरोसा दिया। टीम में सीनियर ऑर्कोलोजिस्टमनोज द्वितीय, सुरेश कुमार शामिल थे।
संस्थाओं ने सौंपे पत्र
सेव अवर हेरिटेज के अध्यक्ष अरिहन्त सिंह शेखावत,प्रसून बाहेती, इंटेक संयोजक विजयराज सिंह मालकपुरा, खीण्या सरपंच राजकुमार मीणा, भीमलत महादेव मंदिर समिति सदस्य, खीण्या सरपंच राजकुमार मीणा ने ज्ञापन सौंपे। उन्होंने शिवलिंग स्थल को विकसित करने की मांग की।ज्ञापन में बताया कि एकलिंगी शिवलिंग बूंदी की प्राचीन धरोहर है। इसे बूंदी में ही सुरक्षित किया जाना चाहिए।
स्थानीय लोगों में अधिक महत्व का स्थल
सेव अवर हेरिटेज के अध्यक्ष शेखावत ने बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को शिवलिंग के संरक्षण के लिए आधिपत्य में लेना था।भीमलत स्थित शिवलिंग जो यहां स्थित शिव मंदिर का अभिन्न भाग है, जिसे दूसरी जगह स्थानान्तरित करने से इस स्थल का महत्व समाप्त हो जाएगा। मंदिर में अभी गर्भगृह जिसमें शिवलिंग, जलेरी व शिवलिंग का पार्वती भाग, मंदिर का अन्तराल और नंदीमण्डल भग्नावस्था में मौजूद है।ऐसे में इसे अपने अधीन लेकर इसी स्थान पर विकसित किया जाना चाहिए, क्योंकि यह गुप्तकालीन शिवलिंग होने की वजह से इसस्थल का महत्व यहां के स्थानीय लोगों में अधिक है।

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