आखिरी अबूझ मुहूर्त पर रही शादी-ब्याह की धूम

देव शयनी से पहले आखिरी अबूझ मुहूर्त भड़ल्या नवमी पर सोमवार को जिलेभर में शादियों की धूम रही। सरकार की गाइड लाइन के साथ कई जोड़े परिणय सूत्र में बंधे।

By: pankaj joshi

Published: 30 Jun 2020, 08:14 PM IST

आखिरी अबूझ मुहूर्त पर रही शादी-ब्याह की धूम
जिलेभर में सरकारी गाइड लाइन के अनुरूप हुए विवाह आयोजन
बूंदी. देव शयनी से पहले आखिरी अबूझ मुहूर्त भड़ल्या नवमी पर सोमवार को जिलेभर में शादियों की धूम रही। सरकार की गाइड लाइन के साथ कई जोड़े परिणय सूत्र में बंधे। दूल्हे की निकासी के कार्यक्रम नहीं हुए। बैंड-बाजों पर भी रोक ही रही। बारातियों के साथ-साथ दूल्हा-दुल्हन भी मास्क में दिखाई पड़े। शादी में कम ही लोगों को आने की अनुमति होने से परिवारों के लोगों को ही आमंत्रित किया गया। इस दौरान भी सभी एक-दूसरे को ऐहतियाती कदम उठाने के बारे में जानकारी देते रहे।
अब शादी की शहनाई पर 1 जुलाई के बाद पांच माह के लिए ब्रेक लग जाएगा। 1 जुलाई को देवशयनी एकादशी का अबूझ मुहूर्त रहेगा। इसके बाद चातुर्मास शुरू हो जाएंगे। 25 नवम्बर को देवोत्थानी एकादशी पर फिर से शहनाइयां बजनी शुरू होगी।


शादियों की रही भरमार, देखने को नहीं मिली भीड़भाड़
नैनवां. कोरोना महामारी के संक्रमण से बचाव के लिए सरकार द्वारा शादियों में पचास से अधिक लोगों के शामिल होने पर लगा रखी रोक के कानून के डर ने आयोजकों को बांधे ही नही रखा। विवाह समारोह पर होने वाले हर आयोजन को सुक्ष्म भी कर दिया। दिखावे पर होने वाली फिजुलखर्ची भी पर रोक लगाने का काम किया। अधिकंाश विवाह समारोह का आयोजन मेरिज गार्डनों की जगह अपने घरों पर किए। देवशयनी के दो दिन पहले भड़ल्या नवमी पर सोमवार को शादियों के अबूझ मुहूर्त पर कस्बों व गांवों में शादियों की तो खूब भरमार रही लेकिन न कोई शहनाई के सुर सुनाई दिए और न ही बैण्ड की धुनें। दूल्हे राजा न घोड़ी पर सवार हुए तो न ही आज मेरे यार की शादी है गीत पर दूल्हों के दोस्तों का डांस देखने मिला और न ही तोरण व वरमाला के समय ले जाऐंगे-ले जाऐंग दिल वाले दुल्हनियां ले जाऐंगे व बहारों फूल बरसाओं मेरा महबूब आया है गीत के सुर। दूल्हें पैदल ही तोरण मारने पहुंच रहे थे। शादियों में पचास से अधिक लोगों के शामिल होने पर लगा रखी रोक के कानून के डर ने शादियों की भरमार के बाद भी सोशल डिस्टेंसिंग बनाई रखी। न निकासियां निकली और न ही बारातों के जुलूस। विवाह समारोह में गिनती के बाराती तो गिनती के ही घाराती शामिल हुए। विवाह समारोह पर होने वाले भात, महिला संगीत, महंदी रस्म व अगवानी के आयोजन भी सुक्ष्म ही रहे। देवशयनी एकादशी के एक दिन पूर्व मंगलवार को शादियों की भरमार रहेेगी।
अबूझ सावों पर महंगाई हो जाती थी
जब-जब भी अबूझ सावों होते है तो शादियों की भरमार के समय विवाह स्थल संचालक, हलवाई, कैटर्स, पडित, बैण्ड, घोड़ी, लाइट व फ्लावर डेकोरेशन वालों के भाव बढ जाते थे। लेकिन पहली बार देखने को मिल रहा है कि इस प्रकार तामझाम के बिना शादी समारोह के आयोजन देखने को मिले। पहले दूल्हेे बैण्ड के साथ घोड़ी पर सवार होकर तोरण मारने जो थे दिखावे के लिए विवाह स्थल लाइट व फ्लावर डेकोरेशन से चकाचौंध कर दिए जाते थे। विवाह स्थल व हलवाई मुंह मांगे दामों पर करने पड़ते थे।

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