मूकदर्शक बने जिम्मेदार : हादसों से नहीं सबक,ओवरलोड यात्री वाहनों पर नहीं हो रही कार्रवाई

जिले में इतने बड़े हादसे के बाद भी पुलिस और परिवहन विभाग सडक़ों पर दौड़ते ओवरलोड ‘यमदूतों’ को नहीं रोक रहा।

By: pankaj joshi

Published: 01 Mar 2020, 03:50 PM IST

मूकदर्शक बने जिम्मेदार : हादसों से नहीं सबक,ओवरलोड यात्री वाहनों पर नहीं हो रही कार्रवाई
बसों व टैक्सियों की छतों पर करा रहे सवारी
बूंदी. जिले में इतने बड़े हादसे के बाद भी पुलिस और परिवहन विभाग सडक़ों पर दौड़ते ओवरलोड ‘यमदूतों’ को नहीं रोक रहा।यहां तक की बसों की छतों पर यात्रा कर रहे लोगों को नहीं रोका जा रहा। इन दिनों यह नजारा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की सडक़ों पर आम हो गया। हैरानी की बात तो यह कि पुलिस थानों के आगे से गुजर रहे इन वाहनों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।
इसी का परिणाम रहा कि अब तक इन अनफिट वाहन चालकों के हौसलें बुलंद हो गए। ‘पत्रिका टीम’ ने जिले की सडक़ों पर शनिवार को देखा तो ऐसी कोई सडक़ नहीं मिली जहां ओवरलोड वाहन चलते नहीं दिखे। इन्हें न कोई टोक रहा था और न ही कोई रोकता दिखा। हाइवे पर ही ऐसी बसें दौड़ रही थी, जिनकी छतों पर लोगों को बैठे हुए देखा गया। बहरहाल कारण जो भी रहे हों, लेकिन यदि इन वाहनों को नहीं रोका गया तो कई बेगुनाहों की जान नहीं बच पाएंगी।जिले के खटकड, गेण्डोली, देई, तालेड़ा, बसोली, डाबी, रामगंजबालाजी क्षेत्रों में ओवरलोड वाहनों की संख्या कम नहीं दिखी।इनमें अधिकांश तो पुलिस थानों के सामने से होकर निकले।
जानकार सूत्रों ने बताया कि इसके लिए पुलिस और परिवहन विभाग संयुक्त रूप से प्रभावी कार्रवाई का अभियान चलाएं। इनके दस्तावेजों की बिना कोई राजनीतिक दबाव के जांच हो, ताकि अनफिट वाहनों को सडक़ों से हटाया जा सके।
हाइटेंशन लाइन तक का नहीं डर
यात्रियों को नीचे जगह नहीं मिलने पर छतों पर बैठाना आम बात हो गई। इसके लिए वाहन चालक हाइटेंशन लाइन तक की परवाह नहीं कर रहे। जबकि जिले में कई बार झूलते तारों को छूने से हादसा होने का मामला सामने आ चुका। पत्रिका टीम की पड़ताल में पाया कि इन वाहनों की छतों पर बैठे लोगों के करीब से कई जगहों पर तार निकलते दिखाई पड़े। यदि बस ने थोड़ी भी ओवटेक किया तो हादसे से इनकार नहीं दिया जा सकता।
निजी बसों के ऊंचे रसूखात
निजी बस चालकों पर तो मानों जिम्मेदार कार्रवाई करना ही भूल गए। बूंदी के जैतसागर रोड पर ऐसी दर्जनों बसें निकली जिनकी छतों पर तक लोग सवार थे। इन्हें रोकने वाला कोई नहीं दिखा। दोपहर बाद टैरेस गार्डन के करीब पुलिस का दस्ता खड़ा भी हुआ, लेकिन दुपहिया वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई के सिवाय कुछ नहीं किया गया। इन बसों की तो पुलिस वाहन को देखकर गति भी धीमी नहीं हुई। जबकि इस रोड से सारी निजी बसें आती-जाती दिखी।यहां खड़े लोगों ने बताया कि हादसों का एक कारण अनफिट बसे हैं।
कई बस ड्राइवरों के पास नहीं लाइसेंस
जब कुछ बस चालकों से कागजात के बारे में चर्चा की तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि इसकी कोई जरूरत नहीं होती। बस चालकों के लाइसेंस की सिर्फ दूसरे राज्यों में जाने के दौरान जरूरत पड़ती है। जिले की सीमा में कोई जांच नहीं करता। साथ ही ड्राइवरों ने इस मामले में घुली भांग के कई रोचक खुलासे भी किए।
रोडवेज बनें नजीर
जिले में ऐसे भी स्थान मिले जहां रोडवेज की बसों पर लोग छत पर थे। जबकि रोडवेज प्रबन्धन ने छतों पर लोगों को यात्रा कराने से रोका हुआ है। बावजूद कंडक्टर ऊपर की कमाई के लिए इस नियम को धता बता रहे हैं। लोगों को छतों पर बैठाकर यात्रा कराई जा रही है।

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