बूंदी के रामगढ़ विषधारी अभयारण्य में आया बाघ, वन अधिकारियों ने बढ़ाई चौकसी

बूंदी जिले के वन्यजीव प्रेमियों के लिए सोमवार का दिन खुशियों से भरा रहा।

By: pankaj joshi

Published: 30 Jun 2020, 06:32 PM IST

बूंदी के रामगढ़ में आपका स्वागत है ‘वनराज’
रामगढ़ विषधारी अभयारण्य में आया बाघ, वन अधिकारियों ने बढ़ाई चौकसी
बाघ आने की पुष्टि के बाद वन्यजीव प्रेमियों में छाई खुशी रणथम्भौर अभयारण्य से आया नर बाघ
बूंदी. बूंदी जिले के वन्यजीव प्रेमियों के लिए सोमवार का दिन खुशियों से भरा रहा। यहां के रामगढ़ विषधारी अभयारण्य में एक बार फिर बाघ की दहाड़ सुनाई पड़ी। बाघ के अभयारण्य परिसर में आने की वन अधिकारियों के देर शाम पुष्टि करने के साथ ही सुरक्षा के लिए ऐहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए। बाघ की पहचान के लिए फोटो ट्रेप कैमरे लगा दिए। फिलहाल पगमार्क के आधार पर उसकी नर बाघ के रूप में पहचान हुई। रणथंभौर अभयारण्य का यह बाघ रविवार की रात परम्परागत रहे रास्ते से होता हुआ रामगढ़ विषधारी अभयारण्य में प्रवेश हुआ। बाघ के लंबे समय से खरायता के निकट मौजूद होने की जानकारी आ रही थी। जानकारों ने बताया कि संभवतया यही बाघ रामगढ़ में पहुंचा होगा। सोमवार को उपवन संरक्षक बीजू जॉय ने अभयारण्य क्षेत्र का दौरा किया और वनकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। अभयारण्य के 800 वर्ग किलोमीटर में प्रदेश का चौथा टाइगर रिजर्व प्रस्तावित है, बाघ के आने के बाद अब इसकी संभावनाएं प्रबल मानी जा रही है।
बाघों के लिए मुफीद
रामगढ़ विषधारी अभयारण्य में बाघों को बसाने के लिए बीते एक साल से काम चल रहा था। प्रे-बेस तैयार किया गया। जिसमें सांभर व चीतल छोड़े गए। लोगों का दखल रोकने के लिए प्रवेश बंद किया गया। अब जंगल भी पहले से अधिक घना हो गया। एनिकटों में पानी की भरमार हो गई। ऐसे में अब बाघों का रुकना अधिक आसान हो गया।
सरकार कर चुकी घोषणा
प्रदेश सरकार बीते वर्ष के बजट में बूंदी के रामगढ़ अभयारण्य को टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित करने की घोषणा कर चुकी। खेल राज्यमंत्री अशोक चांदना ने भी अभयारण्य के समूचित विकास की मांग राज्य सरकार के समक्ष रखी थी। ताकि बूंदी में पर्यटन को और बढ़ावा मिल सके।
रणथंभौर से आते रहे बाघ
रामगढ़ अभयारण्य में रणथंभौर अभयारण्य से बाघ आते रहे। शुरुआत ब्रोकन टेल ने वर्ष 2003 में की। इसके बाद युवराज आया। वर्ष 2013 में टी-62 जो करीब पौने दो वर्ष तक रामगढ़ में रहा। इसके बाद टी-91 आया, जिसे 3 अप्रेल 2018 के दिन मुकुन्दरा में शिफ्ट किया। अब इसका नाम एमटी -1 हो गया।
खरायता तक बना रखी थी टेरेटरी
जिले के खरायता क्षेत्र में बीते कई महिनों ने रणथंभौर के एक नर बाघ ने टेरेटरी बनी रखी थी। इस बाघ के बारिश के मौसम में रामगढ़ में आने का अनुमान था। अब जानकारों ने बताया कि खरायता में मौजूद बाघ ही रामगढ़ में पहुंचा होगा। हालांकि फोटो या फिर एक्सपर्ट ही इसकी आधिकारिक पुष्टि करेंगे।
वनकर्मियों का दे चुके प्रशिक्षण
अभयारण्य क्षेत्र में लगे वनकर्मियों में से अधिकतर को बाघ की ट्रेकिंग का प्रशिक्षण दे चुके। साथ ही टी-62 व टी -91 की ट्रेकिंग भी कर चुके, ऐसे में अब वन कर्मियों के लिए बाघ की ट्रेकिंग करना आसान हो गई। जैतपुर रेंजर धर्मराज गुर्जर ने बताया कि बाघ की ट्रेकिंग शुरू कर दी।
सदियों से वन्यजीवों की शरणस्थली रहा
रामगढ़ विषधारी अभयारण्य, रणथंभौर और मुकुंदरा टाइगर रिजर्व से जुड़ा होने के कारण राजस्थान का जीवंत बाघ कोरिडोर के रूप में पहचाना गया। वर्ष 1982 में इसे अभयारण्य का दर्जा मिला। उप वन संरक्षक कोटा के अधीन इस अभयारण्य का क्षेत्रफल 307 वर्ग किलोमीटर रहा। इसके कोर क्षेत्र में 8 गांव व परिधि पर 33 गांव बताए। इस अभयारण्य में मेज नदी के अतिरिक्त दो बड़े जलाशय और 20 से अधिक प्राकृतिक जल-स्रोत मौजूद बताए।
बाघों का जच्चा घर रहा रामगढ़
शुरुआत से ही बाघों के जच्चा घर के रूप में बूंदी जिले का रामगढ़ विषधारी अभयारण्य बीते 30 वर्षों से बाघविहीन है, लेकिन पूर्व रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 1985 तक बूंदी जिले में एक दर्जन से अधिक बाघ थे। जिनमें से 9 बाघ रामगढ़ में ही थे, लेकिन अवैध शिकार के चलते यहां से विलुप्त हो गए।
& बाघ चलकर रामगढ़ विषधारी अभयारण्य में आया यह सभी के लिए खुशी की बात रही। पगमार्क मिल गए। यहां बाघ की सुरक्षा के लिए ऐहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए। स्टाफ ने ट्रेकिंग शुरू कर दी।
बीजू जॉय, उपवन संरक्षक
मेटिंग सीजन होने से जल्द बाघिन छोड़ी जानी चाहिए, ताकि रामगढ़ में जल्द कुनबा बढ़े। उच्चाधिकारियों को इसकी सूचना दे दी। बूंदी के लिए यह खुशी की खबर साबित होगी।
बिट्ठल सनाढ्य, पूर्वमानद वन्यजीव प्रतिपालक, बूंदी
रामगढ़ में बाघ फिर से स्वयं आया जो बूंदी के साथ-साथ पूरे हाड़ौती व राजस्थान के लिए अच्छी खबर रही। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ कि यह कौनसा नर बाघ है। अभयारण्य में फोटोट्रेप कैमरे लगा दिए।
पृथ्वी सिंह राजावत, पूर्व मानद वन्यजीव प्रतिपालक, बूंदी

pankaj joshi Photographer
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