केशव घाट पर चम्बल के उफान में पुरातत्व विभाग की ओर से नवनिर्मित छतरियां ढही

pankaj joshi | Updated: 18 Sep 2019, 08:52:48 PM (IST) Bundi, Bundi, Rajasthan, India

चंबल नदी में आए उफान के थमने के बाद नवनिर्माण तहस-नहस दिखा।

केशवरायपाटन. चंबल नदी में आए उफान के थमने के बाद नवनिर्माण तहस-नहस दिखा। चंबल के किनारे पौराणिक महत्व वाली धर्मशाला व अन्य निर्माण चट्टान की तरह खड़े रहे, लेकिन नवनिर्माण तेज बहाव के आगे नहीं टिका। बुधवार शाम को चंबल नदी का पानी केशव घाट पर पहुंचने पर तबाही दिखी।
पुरातत्व विभाग की ओर से नवनिर्मित सभी छतरियां ढह गई। छतरियों के अवशेष इधर-उधर बिखर गए। कई छतरियों के तो पत्थर ही बह गए। सीढिय़ों के पास शौचालय घर की दीवार भी पानी का वैग नहीं झेल पाई। बड़ी छतरी गिरने से धर्मशाला का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। पटान उखड़ गया। केशव रंगमंच के आस पत्थर निकल आए। जिधर देखों-उधर पत्थर ही पत्थर बिखरे पड़े दिखे। नाव घाट के पास दो दशक पुराना कक्ष भी क्षतिग्रस्त हो गया। यहां करीब 50 लाख रुपए की लागत से छतरियों का निर्माण किया गया था। घटिया निर्माण उखड़ गया, दीवारें ढह गई। पुरातत्व विभाग ने पौराणिक केशव मंदिर के लिए 5 करोड़ रुपए स्वीकृत किए थे।जिनमें से अब तक एक करोड़ रुपए खर्च हो चुके। यहां नदी के किनारों को आकर्षक बनाने के लिए नाव घाट से महिला घाट के बीच 15 छोटी-बड़ी छतरियों का निर्माण किया था। यहां पर कुल 49 छतरियां बनना प्रस्तावित बताई।

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