इस वर्ष कम हुई मटर की बुवाई, उत्पादन पर भी होगा असर

प्रदेश में मटर उत्पादन में अग्रणी हिण्डोली क्षेत्र में इस बार गत वर्ष की तुलना में मटर की बुवाई कम हो पाई है। जिससे यहां पर रिकॉर्ड मटर उत्पादन की संभावना कम रहेगी।

By: pankaj joshi

Updated: 28 Dec 2020, 08:22 PM IST

इस वर्ष कम हुई मटर की बुवाई, उत्पादन पर भी होगा असर
हिण्डोली. प्रदेश में मटर उत्पादन में अग्रणी हिण्डोली क्षेत्र में इस बार गत वर्ष की तुलना में मटर की बुवाई कम हो पाई है। जिससे यहां पर रिकॉर्ड मटर उत्पादन की संभावना कम रहेगी। जानकारी के अनुसार यहां के मीठे मटर की देश- विदेशों में काफी मांग है। इस बार किसान मटर की बुवाई गत वर्ष की तुलना कम ही कर पाए। कई किसानों ने बुवाई भी की, लेकिन बीच में बारिश होने व कीट प्रकोप होने से फसल नष्ट हो गई थी। जिससे किसानों ने मटर की फसल हांककर गेहूं की फसल बुवाई कर दी थी। जिस कारण यहां पर मटर का रकबा कम हो गया।किसानों की माने तो इस बार मटर बीज के भाव दो सौ से ढाई सौ रुपए किलो थे। ऐसे में कुछ किसान बुवाई करने में असमर्थ रहे और उन्होंने भी गेहूं की फसल की ज्यादा बुवाई की। कृषि विभाग के आधिकारिक सूत्रों की माने तो इस बार क्षेत्र में करीब एक हजार से 11 हैक्टेयर के बीच ही मटर की बुवाई हुई है। जबकि गत वर्ष 14 से 15 सौ हैक्टेयर पर मटर की बुवाई की थी।
यहां होता है मटर का उत्पादन
हिण्डोली, चतरगंज, बड़ानया गांव, चेतां गुढा बांध, सथूर, सहसपुरिया, अलोद, बडौदिया, डाटूंदा, मांगली कला सहित कई ग्राम पंचायतों के दर्जनों गांव में मटर का उत्पादन होता है।
क्षेत्र में मटर का रकबा एक हजार हैक्टेयर के करीब हैं। जो गत वर्ष की तुलना कम है। जबकि गत वर्ष करीब 14 सौ हैक्टेयर में मटर की बुवाई की थी। इस बार कीट प्रकोप व मावठ से मटर की फसल खराब हुई। किसानों ने खराब फसल हांककर गेहूं की बुवाई कर दी थी।
सुरेंद्र गौतम, सहायक कृषि अधिकारी बड़ा नयागांव
हिण्डोली क्षेत्र का मटर देश में अलग पहचान रखता है। इस बार मटर की बुवाई कम होने से उत्पादन पर भी प्रभाव पड़ेगा ।
आमोद शर्मा, किसान नेता, मांगली खुर्द

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