बूंदी जिला चिकित्सालय के गेट पर गिड़गिड़ाता रहा एम्बुलेंस चालक और बीमार बुजुर्ग का बेटा, बस चालकों ने बुुजुर्ग के मरने तक नहीं हटाई बसें

बूंदी जिला चिकित्सालय के गेट पर गिड़गिड़ाता रहा एम्बुलेंस चालक और बीमार बुजुर्ग का बेटा, बस चालकों ने बुुजुर्ग के मरने तक नहीं हटाई बसें
बूंदी जिला चिकित्सालय के गेट पर गिड़गिड़ाता रहा एम्बुलेंस चालक और बीमार बुजुर्ग का बेटा, बस चालकों ने बुुजुर्ग के मरने तक नहीं हटाई बसें

pankaj joshi | Updated: 18 Sep 2019, 12:49:22 PM (IST) Bundi, Bundi, Rajasthan, India

जिला चिकित्सालय के सामने सोमवार रात मरीज को लेकर आ रही 108 एम्बुलेंस 20मिनट तक जाम में फंसी रही, लेकिन बीचों-बीच खड़े बस चालकों ने उसे निकलने के लिए रास्ता नहीं दिया।

बूंदी. जिला चिकित्सालय के सामने सोमवार रात मरीज को लेकर आ रही 108 एम्बुलेंस 20मिनट तक जाम में फंसी रही, लेकिन बीचों-बीच खड़े बस चालकों ने उसे निकलने के लिए रास्ता नहीं दिया। जिससे मरीज ने एम्बुलेंस में ही दम तोड़ दिया। बावजूद यहां पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की नींद नहीं खुल रही।
प्राप्त जानकारी के अनुसार देर रात बसोली निवासी 60वर्षीय रामस्वरूप पालीवाल को 108 एम्बुलेंस उपचार के लिए बूंदी जिला चिकित्सालय लेकर पहुंची थी। एम्बुलेंस चिकित्सालय के गेट के बाहर खड़ी परिवहन और रोडवेज की बसों के पीछे फंस गई। देर तक एम्बुलेंस चालक ने हॉर्न बजाया, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। जबकि एम्बुलेंस में मरीज रामस्वरूप को सीने में दर्द उठने के बाद सांसें उखड़ रही थी। एम्बुलेंस के फंसे रहने के दौरान यहां चिकित्सालय के गेट के बाहर 3बसें खड़ी थी। बीस मिनट तक फंसे रहने से बाद में रामस्वरूप ने एम्बुलेंस में ही दम तोड़ दिया। एम्बुलेंस चालक राजेंद्र सेन ने बताया करीब बीस मिनट तक निकलने का रास्ता नहीं मिला। जिसके चलते बुजुर्ग की मौत चिकित्सालय के सामने ही हो गई।
बुजुर्ग के पुत्र सत्यनारायण पालीवाल ने बताया कि यहां खड़ी बस चालकों को बार-बार कहने के बाद भी बसों को आगे नहीं बढ़ाया। जबकि उन्हें भी पता चल गया था कि पीछे एम्बुलेंस फंस गई। बार-बार गिड़गिड़ाने पर भी बस ड्राइवरों ने एक नहीं सुनी।
दो आगे-पीछे, एक बराबर में थी बसें
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि चिकित्सालय के गेट पर रात को दो बसें आगे पीछे खड़ी थी। एक बस उनके बराबर में खड़ी कर दी। जिससे रास्ता पूरी तरह से जाम हो गया। बसें सवारियों के उतरने और चढऩे के दौरान यों ही खड़ी रही। उन्हें आस-पास के लोगों ने टोका भी, लेकिन सभी बसों के चालक बेपरवाह दिखे। इससे कुछ देर यहां माहौल भी गर्मा गया था। बाद में एम्बुलेंस चालक ने नीचे उतरकर बस चालकों को कहा तब वह हटे।
...तो बच जाती जान
चिकित्सालय सूत्रों ने बताया कि यदि बुजुर्ग रामस्वरूप को समय पर चिकित्सालय पहुंचा दिया जाता तो जान बच जाती।उन्हें यहां ट्रोमा वार्ड के चिकित्सकों ने देखा था।
चिकित्सालय के गेट पर वाहनों के खड़े होने की पहले भी शिकायत थी। तब भी चालान बनाकर पाबंद किया था। फिर से खड़े होने लग गए। इनके खिलाफ फिर कार्रवाई करेंगे। रोडवेज प्रबंधक को भी पत्र लिख दिया।
राजेन्द्र सिंह हाड़ा, यातायात प्रभारी, बूंदी

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