दवा का ऑर्डर कमीशन से होता है तय, बूंदी में हुआ खुलासा

बूंदी की एसीबी टीम ने शनिवार को जिला चिकित्सालय परिसर स्थित सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार में कार्यरत संविदाकर्मी कम्प्यूटर ऑपरेटर व फार्मासिस्ट इंद्रराज बैरवा को 25 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया।

By: pankaj joshi

Published: 11 Apr 2021, 08:48 PM IST

दवा का ऑर्डर कमीशन से होता है तय, बूंदी में हुआ खुलासा
सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार का फार्मासिस्ट दवा सप्लायर से रिश्वत लेते धरा
बूंदी एसीबी की कार्रवाई, दवाओं का ऑर्डर जारी करने के कमीशन के नाम पर लिए 25 हजार रुपए
एक अन्य फार्मासिस्ट की भूमिका संदिग्ध, एसीबी कर रही पूछताछ
बूंदी. बूंदी की एसीबी टीम ने शनिवार को जिला चिकित्सालय परिसर स्थित सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार में कार्यरत संविदाकर्मी कम्प्यूटर ऑपरेटर व फार्मासिस्ट इंद्रराज बैरवा को 25 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपी ने उक्त राशि दवाओं के सप्लायर से दवा का ऑर्डर जारी करने की एवज में 30 प्रतिशत कमीशन के रूप में ली। एसीबी टीम ने मेडिकल स्टोर दुकान नम्बर-2 पर यह कार्रवाई की। एक अन्य फार्मासिस्ट की भूमिका भी एसीबी ने संदिग्ध मानते हुए पूछताछ शुरू कर दी।
बूंदी एसीबी के डिप्टी ज्ञानचंद मीणा ने बताया कि 5 अप्रेल को दवा सप्लायर शिव बाहेती ने परिवाद दिया था। परिवाद में बताया था कि बूंदी के नैनवां रोड हनुमान कॉलोनी गौशाला के सामने रहने वाला सामान्य चिकित्सालय के सहकारी उपभोक्ता हॉलसेल भंडार दुकान-2 में कार्यरत संविदाकर्मी फार्मासिस्ट इंद्रराज बैरवा दवा सप्लाई का ऑर्डर देने के नाम पर 30 प्रतिशत कमीशन के रूप में 25 हजार रुपए की मांग कर रहा है। परिवादी मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव का कार्य करता है और ओरल लाइफ सांइसेज कम्पनी की दवाइयां सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार को सप्लाई करता है। इस पर एसीबी की टीम ने परिवादी की शिकायत का सत्यापन कराया।
सत्यापन सही पाए जाने पर शनिवार को टीम ने आरोपी संविदाकर्मी को रिश्वत की राशि लेते पकड़ लिया। एसीबी ने उससे रिश्वत की राशि बरामद की। इस मामले में एसीबी ने फार्मासिस्ट दिनेश गौतम की भूमिका को भी संदिग्ध मानते हुए जांच शुरू कर दी। गौतम की भूमिका जांच में स्पष्ट हो सकेगी। कार्रवाई टीम में निरीक्षक ताराचंद, शिव नारायण सोनी, राजकमल, जितेंद्र सिंह, राम सिंह शामिल थे।
आखिर कब से चल रहा था कमीशन का ‘खेल’
एसीबी की संविदाकर्मी के विरुद्ध की गई कार्रवाई से जिलेभर में हडक़ंप मच गया। अस्पतालों में दवाओं के नाम पर खुलेआम कमीशन खोरी उजागर हो गई। कई कमीशन खोर सक्रिय हो गए। कमीशन खोर अब तक न जाने कितने जनों से काली कमाई कर चुका। जानकार सूत्रों की माने तो दवाओं के इस खेल से परतें हटें तो कई बड़े नाम सामने आएंगे।
सफेदपोश लोगों के बेनामी धंधे
बूंदी जिले में दवा कारोबार में कमीशन का खुला खेल चल रहा बताया। अस्पताल की कई दुकानों में कमीशन की बंधियां तय बताई। अपने-अपने ब्रांड की दवाओं को बेचने में दवा कारोबारी कमीशन का खुला खेल कर रहे बताए। यह सबकुछ जिम्मेदारों की नाक के नीचे हो रहा बताया, बावजूद कोई ध्यान नहीं दे रहा। एसीबी की कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर कमीशन के खेल को लेकर लोगों ने खूब प्रतिक्रिया की।
30 प्रतिशत कमीशन
दवाओं की मांग कमीशन पर तय होती है। इसका खुलासा शनिवार को एसीबी की कार्रवाई में हुआ। दवा विक्रेता सप्लायर से 30 फीसदी तक कमीशन ले रहे, ऐसे में अकेले बूंदी जिले में ही लाखों रुपये के कमीशन का खेल हो रहा बताया। जानकारों ने बताया कि पेंशनर्स के लिए मंगवाई जा रही दवाओं की भी जांच होनी चाहिए।

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