रात के अंधेरे में अतिक्रमण की फसलें हो रही तर

पाईबालापुरा पेयजल योजना से नैनवां कस्बे को पानी कैसे मिले। नलकूपों का जितना पानी नैनवां आना चाहिए, उसका एक तिहाई तो बांध में उगी अतिक्रमणों की फसल ही गटक रही है।

By: Narendra Agarwal

Published: 14 May 2021, 05:34 PM IST

नैनवां. पाईबालापुरा पेयजल योजना से नैनवां कस्बे को पानी कैसे मिले। नलकूपों का जितना पानी नैनवां आना चाहिए, उसका एक तिहाई तो बांध में उगी अतिक्रमणों की फसल ही गटक रही है। पेयजल योजना पर ११ नलकूप चल रहे हैं। जिनमें से आठ से भरपूर पानी मिल रहा है। फिर पानी कहा जा रहा है? गुरुवार को अधिकारी व जनप्रतिनिधि इसका कारण जानने के लिए पाईबालापुरा पेयजल के नलकूप की स्थिति देखने पहुंचे तो सरकारी नलकूपों से बांध के अन्दर अतिक्रमण कर बोयी अतिक्रमियों की मूंग की फसलें तर मिली। नलकूपों का पानी सिंचाई केे लिए धोरों में बहाया जा रहा था। जलदाय विभाग के नलकूपों की लाइनों को खोलकर या तोडक़र जमीन के अन्दर ही पाइप डालकर दो-दो किमी दूर तक पानी पहुंचाया जा रहा है। यह नजारा देखकर अधिकारी व जनप्रतिनिधि चकित रह गए। पेयजल योजना पर लगे ११ में से आठ नलकूपों में भरपूर पानी होने के बाद भी जलदाय विभाग नैनवां कस्बे की जलापूर्ति व्यवस्था नहीं सुधार पाया तो जलदाय विभाग के अधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों को अपनी परेशानी से अवगत कराया कि पेयजल योजना पर पानी का उत्पादन कम हो गया। जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों से कहा कि जब आठ नलकूप भरपूर पानी दे रहे तो फिर पानी जा कहां रहा है।

यह अधिकारी व जनप्रतिनिधि पहुंचे
दोपहर को जलदाय विभाग के अधिशासी अभियंता राजेन्द्र भार्गव, कनिष्ठ अभियंता डीपी चौधरी, नायब तहसीलदार अमितेश मीणाा, नगरपालिका के उपाध्यक्ष आबिद हुसैन, पार्षद राजेश गुर्जर, राजकुमार गुर्जर, युवराज सहित अन्य जनप्रतिधि बांध पर स्थित पेयजल योजना को देखने पहुंचेे। पम्पहाउस की मोटरों को देखने के बाद बांध के अन्दर लगी नलकूपों की स्थिति देखने गए तो बांध में उग रही फसलों को पानी देने के लिए एक जगह पाइपलाइन को तोड़ रखा था। उससे आगे बढ़े तो एक नलकूप पानी से फसलों के धोरों में लबालब पानी बहता मिला। फसलों में पानी पहुंचाने के इस नलकूप से दो किमी दूर तक पानी ले जाने के लिए भूमिगत पाइपलाइन डाल रखी थी। इससे आगे बढ़े तो एक नलकूप की लाइन को तोडक़र उससे सिंचाई के लिए गड्ढों में पानी भरा जा रहा था।

अतिक्रमण हटाने का अधिकारी राजस्व विभाग को
आधे बांध की पेटे में अतिक्रमण कर मूंग की फसल लहलहाती रहे और जिम्मेदार विभाग देखता रहा। बांध की पेटाकाश्त भूमि राजस्व विभाग की होती है। उस पर होने वाले अतिक्रमण को हटाने का अधिकार राजस्व विभाग को होता है। राजस्व विभाग पहले पेटा भूमि पर अतिक्रमण दर्शाता फिर राजस्व एक्ट ९१ के तहत कार्रवाई करता है। बांध का स्वामित्व जल संसाधन विभाग के पास है। १६ फीट पानी शेष रहने के बाद जलदाय विभाग पानी की सुरक्षा करता है। बांध की पेटा भूमि का मालिक राजस्व विभाग होता है। जिसको ही अतिक्रमण हटाने का अधिकारी होता है।

नायब तहसीलदार का कहना
नायब तहसीलदार अमितेश मीणा ने बताया कि बांध की पेटा काश्त में अतिक्रमण की फसलें हो रही है। आगे की कार्रवाई के लिए उपखंड अधिकारी से मार्गदर्शन लिया जाएगा।

अधिशासी अभियंता का कहना
जलदाय विभाग के अधिशासी अभियंता राजेन्द्र भार्गव ने बताया कि बांध के अन्दर अवैध खेती हो रही है। अवैध खेती करने वाले बार-बार पेयजल योजना की पाइप लाइन को तोड़ देतेे हंै। जिनके खिलाफ सहायक अभियंता ने नैनवां थाने में एफआईआर दी है। पानी की कमी को दूर करने के लिए विभाग ने तीस व नगरपालिका की ओर से बीस टैंकर पानी उपलब्ध करवाया जाएगा। सभी पचास टैंकरों का पानी कार्यालय के जलाशयों में खाली करवाया जाएगा।

Narendra Agarwal Desk
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