आजादी के कई वर्षों बाद भी पक्की नहीं बनी पंचायत मुख्यालय को जोडऩे वाली सडक़ें

एक ओर सरकार गांवों के विकास की बात करती है, लेकिन गांव मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। ऐसा ही मामला ग्राम पंचायत नोताड़ा के मालिकपुरा, व लक्ष्मीपुरा गांव का देखने को मिल रहा है।

By: pankaj joshi

Published: 06 Jul 2020, 09:25 PM IST

आजादी के कई वर्षों बाद भी पक्की नहीं बनी पंचायत मुख्यालय को जोडऩे वाली सडक़ें
नोताड़ा. एक ओर सरकार गांवों के विकास की बात करती है, लेकिन गांव मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। ऐसा ही मामला ग्राम पंचायत नोताड़ा के मालिकपुरा, व लक्ष्मीपुरा गांव का देखने को मिल रहा है। यहां पंचायत मुख्यालय से जोडऩे वाली सडक़ें आज तक कच्ची है। पंचायत मुख्यालय से मालिकपुरा की दूरी चार किलोमीटर है। जिसमें रघुनाथपुरा तक तो पक्की सडक़ है, लेकिन रघुनाथपुरा से मालिकपुरा के बीच 1 किमी का रास्ता कच्चा है। जिसमें बारिश के दिनों में पानी भरने से कीचड़ फैल जाता है और मालिकपुरा के ग्रामीणों का इधर से पंचायत मुख्यालय तक का सम्पर्क कट जाता है। बारिश के बाद यहां के लोगों को मुख्यालय तक पहुंचने के लिए 14 किमी का चक्कर अतिरिक्त लगाकर देहीखेड़ा होकर आना पड़ता है। कांग्रेस पर्यावरण प्रकोष्ठ के ब्लॉक अध्यक्ष गिरिराज मीणा, सत्यनारायण सेन, कांग्रेस युवा नेता दीपक कुमार सैनी, राम कल्याण गुर्जर ने बताया कि मालिकपुरा के लोगों को बारिश के दिनों में राशन सामग्री लाने के लिए या फिर पंचायत मुख्यालय पर कोई काम को लेकर सीधा रास्ता खराब हो जाने की वजह से देहीखेड़ा होकर गुजरना पड़ता है। वहीं पास के ही गांव के रघुनाथपुरा में विद्यालय पांचवीं तक होने की वजह से बच्चों को आगे की कक्षा में पढा़ई करने के लिए मालिकपुरा आना पड़ता है। बारिश से रास्ता खराब हो जाने की वजह बच्चों को आने जाने में परेशानी उठानी पड़ती है। यहीं हाल लक्ष्मीपुरा गांव के भी है। यहां से नोताड़ा की दूरी करीब तीन चार किमी है, लेकिन सडक़ पक्की नहीं होने के कारण बारिश के दिनों में परेशानी उठानी पड़ती है। यहां के ग्रामीणों को भी बारिश के दिनों में पंचायत मुख्यालय तक पहुंचने या राशन सामग्री लेने के लिए रैबारपुरा पचीपला होकर खेडिय़ा दुर्जन के रास्ते से आना पड़ता है। उप सरपंच कन्हैयालाल गोचर ने बताया कि यह रास्ता ग्रेवल तो है लेकिन बारिश में परेशानी उठानी पड़ती है। यहां से बच्चे नोताड़ा विद्यालय में अध्ययन के लिए जाते हैं। ऐसे में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
कई बार कर चुके मांग, नहीं हुआ समाधान
पंचायत के दोनों गांव मुख्यालय तक पक्की सडक़ को लेकर प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों से मांग कर चुके लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।

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