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तीमारदारों के लिए मददगार साबित हो रही नि:शुल्क कम्बल निधि सेवा

जिला अस्पताल में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल पर शुरू की गई नि:शुल्क कम्बल निधि की सेवा दूर-दराज के गांवों से आने वाले मरीजों के तीमारदारों के लिए मददगार साबित हो रही है।

बूंदी

Published: December 07, 2021 07:00:46 pm

तीमारदारों के लिए मददगार साबित हो रही नि:शुल्क कम्बल निधि सेवा
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल
बूंदी. जिला अस्पताल में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल पर शुरू की गई नि:शुल्क कम्बल निधि की सेवा दूर-दराज के गांवों से आने वाले मरीजों के तीमारदारों के लिए मददगार साबित हो रही है। अपने परिजनों के इलाज के लिए जिला अस्पताल आ रहे तीमारदारों को इस सेवा की मदद से कपकंपाती सर्द हवाओं व ठिठुरन से राहत मिली है।
कम्बल निधि के संचालन की व्यवस्था संभाल रहे सुरेश अग्रवाल ने बताया कि शाम से ही बड़ी संख्या में तीमारदार अपने कम्बल रजाई के लिए केंद्र पर पहुंच जाते हैं। यहां केवल मरीज की पर्ची व आधार कार्ड से बिना किसी अमानत राशि लिए नि:शुल्क कम्बल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। रात में इस्तेमाल के बाद सुबह कम्बल-रजाई को केंद्र पर लौटाने की व्यवस्था की गई है। कम्बल निधि की शुरुआत 150-150 कम्बल व रजाइयों से किया था। मौसम में हुए बदलाव व तीमारदारों की परेशानी को देखते हुए अब कम्बल व रजाई की संख्या में बढ़ोतरी की गई है। ताकि अधिक से अधिक लोगों को इस सेवा का लाभ मिल सके। कोटा में 2007 से लगातार संचालित की जा रही इस सेवा की शुरुआत बीते दिनों लोकसभा अध्यक्ष बिरला व बूंदी विधायक अशोक डोगरा ने बूंदी अस्पताल में की थी। जनसहयोग के माध्यम से मेडिसिन बैंक से संचालित इस सेवा की शुरुआत के बाद अब तक सैकड़ों तीमारदारों को इस सेवा का लाभ मिल चुका है। कम्बल निधि के संचालन में जितेंद्र हाड़ा, महावीर खंगार व रोशन घेंगट भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
पिछली बार दो दिन तक भटके थे
अपने भतीजे के इलाज के लए बूंदी आए लाखेरी निवासी राधेश्याम ने बताया कि वे दो वर्ष पहले अपनी मां के इलाज के लिए बूंदी अस्पताल आए थे। मां की गंभीर हालत के कारण वे दोबार घर जाकर कम्बल-रजाई का प्रबंध नहीं कर पाए, अस्पताल के नजदीक कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें दो दिन तक भटकना पड़ा था। कम्बल निधि के कारण इस बार न सर्दी से परेशानी झेलनी पड़ रही है न ही फिजूल भटकना पड़ा।
...केवल दो ही रजाई ले पाते थे
नैनवां निवासी नरेश ने बताया कि वह अपने परिवारजनों के साथ 16 नवम्बर को अपने भतीजे के इलाज के लिए बूंदी आए थे। रजाई-कम्बल की व्यवस्था के लिए उन्हें बतौर अमानत राशि बड़ी राशि चुकानी पड़ती थी। धन के अभाव में वे केवल दो ही रजाई का प्रबंध कर पाते थे, लेकिन 4 दिन बाद नि:शुल्क कम्बल निधि की शुरुआत हुई तो उन्हें और उनके परिजनों को बड़ी राहत मिल पाई।

तीमारदारों के लिए मददगार साबित हो रही नि:शुल्क कम्बल निधि सेवा
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